79वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने Semiconductor उद्योग पर पिछली सरकारों को घेरा, जयराम रमेश ने X पर करारा जवाब दिया
New Delhi, (Shah Times) । 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए Semiconductor उद्योग का मुद्दा उठाया। उन्होंने बिना नाम लिए पिछली सरकारों पर तीखा परोक्ष हमला करते हुए कहा कि 50-60 साल पहले भारत में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का विचार आया था, लेकिन उसकी "भ्रूण हत्या" कर दी गई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस बयान को झूठा करार देते हुए सोशल मीडिया पर पलटवार किया।
पीएम मोदी का लाल किला भाषण और सेमीकंडक्टर पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा,
"50-60 साल पहले Semiconductor पर फाइलें चली थीं, फैक्ट्री का विचार भी आया था, लेकिन वे अटक गईं, लटक गईं और भटक गईं। इस विचार की भ्रूण हत्या हो गई और देश ने 50-60 साल गंवा दिए।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब भारत इस क्षेत्र में पीछे था, तब कई अन्य देशों ने सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में महारत हासिल की और आज तकनीकी ताकत के बल पर दुनिया में अपनी पकड़ बना ली है।
कांग्रेस का जवाब: ‘मोदी झूठ बोल रहे हैं’
पीएम मोदी के बयान के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा,
"मिस्टर मोदी कितने बड़े झूठे हैं, इसका एक और उदाहरण मिला है।"
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में यह दावा किया कि चंडीगढ़ में स्थापित सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स लिमिटेड (SCL) ने 1983 में संचालन शुरू किया था। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि सेमीकंडक्टर का विचार और उसका क्रियान्वयन पूर्व सरकारों के समय में ही शुरू हो गया था।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन: 6 यूनिट निर्माणाधीन, 4 को मंजूरी
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग को मिशन मोड में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
6 सेमीकंडक्टर यूनिट देश में निर्माणाधीन हैं।
4 नए प्रोजेक्ट्स को पहले ही ग्रीन सिग्नल दिया जा चुका है।
वर्ष के अंत तक "मेड इन इंडिया" चिप्स बाजार में उपलब्ध होंगी।
उन्होंने इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
सेमीकंडक्टर: भारत के लिए क्यों ज़रूरी?
सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार, चिकित्सा उपकरण और रक्षा प्रणालियों तक में होता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इसकी कमी ने भारत जैसे देशों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की जाए।
भारत का उद्देश्य है कि वह इस क्षेत्र में चीन, अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।
राजनीतिक तकरार: चुनावी संदेश या विकास एजेंडा?
विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह बयान दोहरे उद्देश्य के साथ आया है:
राजनीतिक संदेश – यह बताना कि पिछली सरकारें तकनीकी विकास के प्रति उदासीन थीं।
विकास एजेंडा – युवाओं को यह भरोसा दिलाना कि वर्तमान सरकार भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर ध्यान दे रही है।
वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ पलटकर दिखाना चाहती है कि तकनीकी विकास की नींव पहले ही डाली जा चुकी थी।
नतीजा
सेमीकंडक्टर पर यह विवाद सिर्फ तकनीकी उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। पीएम मोदी जहां इसे भारत के "गंवाए हुए दशकों" के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस ऐतिहासिक आंकड़ों के जरिए यह बताने की कोशिश कर रही है कि शुरुआत पहले ही हो चुकी थी।
स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होगी, खासकर तब जब "मेड इन इंडिया" चिप्स बाजार में आएंगी और देश तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम आगे बढ़ेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।