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NCERT : बंटवारे के तीन मुजरिम? जिन्ना,कांग्रेस और माउंटबेटन पर सियासी जंग

None 2025-08-16 20:52:42
NCERT : बंटवारे के तीन मुजरिम? जिन्ना,कांग्रेस और माउंटबेटन पर सियासी जंग

NCERT मॉड्यूल ने बताया बंटवारे के तीन अपराधी: जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन

भारत-पाक विभाजन पर नई बहस, NCERT ने उठाए पुराने सवाल

NCERT के नए मॉड्यूल में बंटवारे के लिए जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया। इस पर शुरू हुआ बड़ा सियासी विवाद।

भारत का बंटवारा (Partition of India 1947) महज़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि एक जख़्म है जो आज भी South Asia की collective memory में ताज़ा है। NCERT ने हाल ही में Class 6 से 12 तक के लिए नया special module जारी किया है, जिसका टाइटल है – Culprits of Partition.

इस module में साफ लिखा है कि जिम्मेदारी तीन मुजरिमों पर जाती है – मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस पार्टी और लॉर्ड माउंटबेटन।
यही बात आज के सियासी माहौल में बड़ी political debate का कारण बन रही है।

NCERT का Narrative – Culprits of Partition

नए मॉड्यूल में लिखा गया है –

जिन्ना ने Two-Nation Theory के आधार पर पाकिस्तान की मांग रखी।

कांग्रेस, सत्ता की सियासत और तुष्टिकरण की वजह से, इस demand को accept करने पर मजबूर हुई।

और लॉर्ड माउंटबेटन, जो final British viceroy थे, उन्होंने इस plan को execute कर दिया।

Module में पंडित नेहरू का वो famous speech भी दिया गया है –
“हमें या तो विभाजन स्वीकार करना होगा या फिर endless conflict और anarchy का सामना करना होगा।”

विभाजन की त्रासदी – दर्दनाक तसवीर

इस module में सिर्फ blame-game नहीं, बल्कि partition की human tragedy भी बच्चों तक पहुँचाने की कोशिश है। इसमें बताया गया है कि –

करीब 1.5 करोड़ लोग displaced हुए,

लाखों की हत्या हुई,

हज़ारों औरतों के साथ sexual violence हुआ,

Punjab और Bengal की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई,

और Kashmir एक unresolved crisis बन गया।

यानी Partition महज़ geographical division नहीं बल्कि पूरी region की socio-political aur cultural fabric की तबाही थी।

सियासी हंगामा – Congress vs BJP vs AIMIM

जैसे ही ये मॉड्यूल सामने आया, सियासी तूफ़ान खड़ा हो गया।

BJP का रुख:
भाजपा प्रवक्ता शाहज़ाद पूनावाला बोले –
“बंटवारे का अपराध कांग्रेस, जिन्ना और माउंटबेटन ने मिलकर किया। सत्ता की लालच aur तुष्टिकरण की सियासत ने मुल्क को तोड़ दिया।”

गौरव भाटिया ने तो कांग्रेस को “राहुल-जिन्ना पार्टी” तक कह डाला।

Congress का पलटवार:
कांग्रेस नेताओं ने कहा –
“यह BJP और NCERT का political agenda है।”
संदीप दीक्षित बोले – “इतिहास की आधी तस्वीर दिखाना खतरनाक है।”
पवन खेड़ा ने गुस्से में कहा – “ऐसी किताब को आग लगा देनी चाहिए।”

AIMIM का बयान:
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा –
“Partition के बारे में बार-बार झूठ बोला जाता है। 2-3% मुसलमानों के पास vote देने का अधिकार भी नहीं था, फिर उन्हें responsible कैसे ठहराया जा सकता है?”

तहरीर-ए-इतिहास या Political Narrative?

यहां बड़ा सवाल ये है – क्या NCERT history पढ़ा रहा है या BJP का narrative build कर रहा है?

इतिहासकारों के मुताबिक Partition कई factors का नतीजा था –

British की Divide and Rule Policy,

Muslim League का pressure,

कांग्रेस की internal weaknesses,

और उस दौर की हालात।

इसे सिर्फ तीन व्यक्तियों पर थोपना एक तरह का oversimplification है।

Global Impact of Partition

Partition का असर सिर्फ भारत-पाक तक सीमित नहीं रहा।

Cold War की शुरुआत में South Asia, US और USSR की geopolitics का हिस्सा बना।

Pakistan जल्दी ही Western bloc (America-NATO) से जुड़ गया।

India ने Non-Aligned Movement (NAM) अपनाया।

Kashmir issue आज भी South Asia की security architecture का सबसे बड़ा crisis है।

उर्दू अदब की तहरीर

Partition की बात हो और Urdu literature का ज़िक्र न हो, ये नामुमकिन है।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने कहा –
“ये दाग़-दाग़ उजाला, ये शब-गज़ीदा सहर...”

सआदत हसन मंटो ने लिखा –
“सियासतदानों ने सरहदें खींचीं, इंसानियत को खून में डुबो दिया।”

इस्मत चुगताई और कृष्णा सोबती जैसी लेखिकाओं ने औरतों पर पड़े असर को उजागर किया।

यानी Partition सिर्फ geography का मसला नहीं था बल्कि insaniyat aur tehzeeb की तबाही था।

Modi vs Nehru – Memory Politics

मॉड्यूल में PM मोदी का बयान भी शामिल है –
“Partition का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

यहाँ साफ़ दिखता है कि BJP, Partition की यादों को Nehru vs Modi फ्रेम में रखकर एक नया narrative बनाना चाहती है।

जहाँ नेहरू को “Compromise leader” दिखाया जा रहा है, वहीं मोदी को “Partition की त्रासदी याद दिलाने वाले nationalist leader” की छवि दी जा रही है।

एडिटोरियल एनालिसिस – मेरी राय

Educational Perspective:
इतिहास पढ़ाने का मकसद blame-game नहीं बल्कि critical understanding होना चाहिए।

Political Utilization:
यह साफ़ है कि BJP इस मॉड्यूल से कांग्रेस की credibility कमजोर करना चाहती है।

Global Lens:
Partition सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि आज भी India-Pak relations और global South Asia policy shaping में central है।

Urdu Heritage:
अगर Partition की चर्चा Urdu adab और cultural trauma के बिना हो तो वो अधूरी रहेगी।

नतीजा

NCERT का नया मॉड्यूल इतिहास को नए सिरे से पढ़ाने का प्रयास है। लेकिन साथ ही यह current politics की memory politics का हिस्सा भी है।

असल सवाल यह नहीं कि जिन्ना, कांग्रेस या माउंटबेटन जिम्मेदार थे या नहीं।
असल सवाल यह है कि हम इस tragedy से क्या सीखते हैं और आने वाली पीढ़ी को क्या सिखाते हैं।भारत के लिए यह ज़रूरी है कि Partition को blame-game से ऊपर उठाकर, एक सबक – Unity aur Secularism के रूप में याद किया जाए।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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