बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए पहली सूची जारी कर दी है। दूसरी ओर, महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर खींचतान बढ़ती जा रही है। तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेताओं के बीच बातचीत बेनतीजा रही, जबकि बीजेपी ने 71 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सियासी बढ़त हासिल कर ली है। बिहार की राजनीति में यह टकराव नए समीकरणों की भूमिका तय कर सकता है।
बिहार की सियासत हमेशा चुनाव से पहले एक नए मोड़ पर आ खड़ी होती है — और इस बार भी वही नज़ारा है।
बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट जारी कर Game की पहली चाल चल दी है। सम्राट चौधरी को तारापुर से और रामकृपाल यादव को दानापुर से टिकट देकर पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि यह चुनाव केवल सीटों का नहीं बल्कि सियासी साख का होगा।
दूसरी तरफ़ महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वीआईपी) में हालात बेचैनी भरे हैं। तेजस्वी यादव कांग्रेस नेताओं से नाराज़ होकर मीटिंग छोड़ दिल्ली से पटना लौट आए — बिना राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले।
इससे एक संदेश गया कि सीट बंटवारे का मसला अभी भी अनसुलझा है।
आरजेडी का रुख़ साफ़ है — 61 सीटों से ज़्यादा नहीं। मगर कांग्रेस कुछ ऐसी सीटों की मांग कर रही है जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, जैसे कहलगांव, नरकटियागंज और वारिसलीगंज।
कहलगांव पर कांग्रेस का पुराना गढ़ है, वहीं नरकटियागंज में मुस्लिम आबादी और जातीय समीकरण का असर है।
तेजस्वी यादव को लगता है कि ज़्यादा रियायत देना उनके लिए नुकसानदेह होगा, जबकि राहुल गांधी का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है — “जहाँ कांग्रेस मज़बूत है, वहाँ झुकना नहीं।”
यानी कि दोनों दलों के बीच Political Trust Deficit खुलकर सामने आ चुका है।
उधर बीजेपी की रणनीति एकदम स्पष्ट है।
केंद्रीय चुनाव समिति की मीटिंग के बाद पार्टी ने 71 नामों की पहली लिस्ट जारी कर दी।
इसमें नौ महिलाओं को टिकट देकर बीजेपी ने Gender Representation और Social Balance दोनों का ध्यान रखा है।
सम्राट चौधरी, तारकिशोर प्रसाद और प्रेम कुमार जैसे नाम दिखाते हैं कि बीजेपी पुराने चेहरों और नए समीकरणों के मेल पर भरोसा कर रही है।
इसके साथ ही पार्टी ने भोजपुर, मिथिलांचल और सीमांचल के इलाक़ों में जातीय संतुलन को प्राथमिकता दी है।
अब बड़ा सवाल यह है — क्या तेजस्वी और कांग्रेस आख़िरी वक़्त में कोई समझौता कर पाएंगे?
या बिहार की महागठबंधन राजनीति चुनाव से पहले ही दरकने लगेगी?
फिलहाल तस्वीर यही बताती है कि बीजेपी ने Narrative Control अपने हाथ में ले लिया है और विपक्ष अब Defensive Mode में दिखाई दे रहा है।
बीजेपी ने तेज़ शुरुआत की है।
महागठबंधन अभी उलझन में है।
आने वाले हफ़्ते बिहार की सियासत की दिशा तय करेंगे — सत्ता या रणनीति, कौन जीतेगा मैदान?
बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी की। इस सूची में कई वरिष्ठ नेताओं और नए चेहरों को मौका मिला है। प्रमुख नामों में विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय), सम्राट चौधरी (तारापुर), रामकृपाल यादव (दानापुर), डॉ. प्रेम कुमार (गया टाउन), तारकिशोर प्रसाद (कटिहार), आलोक रंजन झा (सहरसा) और मंगल पांडेय (सीवान) शामिल हैं। यह लिस्ट दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद जारी की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
महिलाओं की भागीदारी पर भी पार्टी ने खास ध्यान दिया है। पहली सूची में 9 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है—रेणु देवी (बेतिया), गायत्री देवी (परिहार), देवंती यादव (नरपतगंज), स्वीटी सिंह (किशनगंज), निशा सिंह (प्राणपुर), कविता देवी (कोढा), रमा निषाद (औराई), अरुणा देवी (वारसलीगंज) और श्रेयसी सिंह (जमुई)। इससे साफ है कि बीजेपी इस बार महिला वोट बैंक को भी अपने पक्ष में मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।