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बिहार में शिक्षा का हाल बदतर, प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार को घेरा

None 2025-01-31 15:12:28
बिहार में शिक्षा का हाल बदतर, प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार को घेरा

जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षा की दयनीय स्थिति पर नीतीश सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और केवल 13% छात्र ही 12वीं पास कर पा रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षा की बदहाल स्थिति पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार के शिक्षा बजट और उसकी उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए इसे मात्र दिखावा करार दिया। आंकड़ों के अनुसार, बिहार में केवल 13% छात्र ही 12वीं पास कर पा रहे हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। किशोर के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में बिहार के युवा रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं।

उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा के नाम पर खर्च किए जा रहे 50 हजार करोड़ रुपये के बजट की भी आलोचना की और कहा कि इस बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों में केवल ‘खिचड़ी’ और कॉलेजों में केवल ‘डिग्री’ बांटी जा रही है, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।

बिहार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त : प्रशांत किशोर

पटना,(Shah Times )। जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने शुक्रवार को एक किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, जिसके चलते बिहार के युवा शिक्षा और रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा, "गरीबी हटाने के तीन प्रमुख उपाय होते हैं— शिक्षा, जमीन और पूंजी। लेकिन बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल इतना खराब हो चुका है कि यहां 100 में से केवल 13 छात्र ही 12वीं पास कर पाते हैं। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और इसका सीधा असर राज्य के विकास और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।"

शिक्षा बजट पर उठाए सवाल उन्होंने बिहार सरकार के शिक्षा बजट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार हर साल शिक्षा पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की हालत दयनीय है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "वर्तमान व्यवस्था में विद्यालयों में केवल ‘खिचड़ी’ और महाविद्यालयों में केवल ‘डिग्री’ बांटी जा रही है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है और छात्र महज डिग्री हासिल करने तक सीमित रह गए हैं।"

युवाओं को करना पड़ रहा पलायन  किशोर ने कहा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में युवाओं को मजबूरी में दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ रही है। यदि सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

सरकार को सुझाए सुधार के उपाय उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती पारदर्शी तरीके से की जाए, स्कूलों में उपस्थिति की सख्ती से निगरानी हो और छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा दी जाए।

 बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशांत किशोर का यह बयान राज्य सरकार के लिए एक बड़ा सवाल है। यदि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बिहार की युवा पीढ़ी और भी ज्यादा संकट में फंस सकती है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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