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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद VB-G RAM G बिल 2025 लागू होने की तैयारी

None 2025-12-21 21:00:23
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद VB-G RAM G बिल 2025 लागू होने की तैयारी

VB-G RAM G बिल 2025: ग्रामीण रोजगार कानून में बड़ा बदलाव

मनरेगा की जगह VB-G RAM G, 125 दिन रोजगार गारंटी तय


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद VB-G RAM G बिल 2025 लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।

📍 नई दिल्ली ✍️ Asif Khan

राष्ट्रपति की मंजूरी से कानून लागू होने का मार्ग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी VB-G RAM G बिल 2025 को मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के बाद देश की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव को कानूनी आधार मिल गया है। करीब दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह अब नया ढांचा लागू किया जाएगा। सरकार ने इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा है और कहा है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया ढांचा मिलेगा।

मनरेगा से VB-G RAM G तक का बदलाव

नए कानून के लागू होने के साथ मनरेगा की मौजूदा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। सरकार के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में रोजगार गारंटी का दायरा सीमित हो गया था। नए ढांचे में ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की कानूनी गारंटी को बढ़ाया गया है। सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव मौजूदा श्रमिकों के पंजीकरण और भुगतान प्रणाली को प्रभावित नहीं करेगा और ट्रांजिशन पीरियड तय किया जाएगा।

रोजगार गारंटी 125 दिन

नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष कर दी गई है। सरकार का कहना है कि पहले 100 दिन की सीमा अक्सर अधिकतम सीमा की तरह लागू होती थी। नए प्रावधान के जरिए परिवारों को अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। यह बदलाव फील्ड लेवल पर डिमांड-बेस्ड अप्रोच को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।

फंडिंग पैटर्न में संशोधन

VB-G RAM G ढांचे में फंडिंग सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। अब केंद्र और राज्य सरकारें खर्च को 60:40 के अनुपात में साझा करेंगी। इससे पहले मनरेगा के तहत अलग-अलग राज्यों के लिए अलग पैटर्न लागू था, जिसमें कुछ राज्यों को ज्यादा केंद्रीय सहायता मिलती थी। सरकार के अनुसार नया पैटर्न फिस्कल डिसिप्लिन और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को बढ़ावा देगा। राज्यों की भूमिका अब फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव दोनों स्तरों पर बढ़ेगी।

पीक एग्रीकल्चर सीजन में काम रोकने का प्रावधान

नए कानून में पहली बार यह प्रावधान जोड़ा गया है कि बुआई और कटाई के पीक सीजन के दौरान ग्रामीण रोजगार को अधिकतम 60 दिनों तक रोका जा सकता है। सरकार का तर्क है कि इससे खेती के अहम समय में लेबर की उपलब्धता बनी रहेगी। ग्रामीण इलाकों से किसानों की ओर से मजदूरों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस प्रावधान को उसी संदर्भ में जोड़ा गया है।

काम के दायरे में बदलाव

VB-G RAM G कानून के तहत काम के दायरे को चार प्रमुख क्षेत्रों तक सीमित किया गया है। इनमें जल सुरक्षा, बेसिक ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका से जुड़े संसाधन और क्लाइमेट एडाप्टेशन शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे बनने वाली परिसंपत्तियों की क्वालिटी बेहतर होगी और लॉन्ग टर्म सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित की जा सकेगी। नए ढांचे में एसेट क्रिएशन पर ज्यादा फोकस रखा गया है।

प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी

सरकार ने बताया है कि नए कानून के तहत मॉनिटरिंग सिस्टम को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। वर्क अलोकेशन, अटेंडेंस और पेमेंट ट्रैकिंग को टेक्नोलॉजी बेस्ड बनाया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायत निवारण को मजबूत करने का दावा किया गया है। राज्य सरकारों को इम्प्लीमेंटेशन गाइडलाइंस अलग से जारी की जाएंगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

VB-G RAM G बिल 2025 को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कानून के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नया ढांचा अधिकार आधारित अप्रोच को कमजोर करता है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी संसद में इस बिल पर विरोध जताया है। सरकार ने इन आरोपों पर कहा है कि कानून का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को अधिक प्रभावी बनाना है।

आगे की प्रक्रिया

सरकारी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद राज्यों के साथ कंसल्टेशन प्रक्रिया शुरू होगी। नए कानून को वित्तीय वर्ष 2026 से पूरी तरह लागू करने की तैयारी की जा रही है। ट्रांजिशन के दौरान मौजूदा लाभार्थियों के हितों को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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