कांग्रेस की चौतरफा घेरेबंदी की तैयारी, CEC ज्ञानेश कुमार पर बढ़ा दबाव, 10 बिंदुओं में समझें पूरा घटनाक्रम
Mohammad Naved
•
2026-09-28 11:54:30
कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार पर SIR और Form 6 को लेकर सवाल उठाए हैं। BJP ने चुनाव आयोग के फैसलों को सामूहिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।
Location
नई दिल्ली, भारत
Date
28 सितंबर 2026
By
Mohd Naved
कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच बढ़ता टकराव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी टकराव पिछले कुछ दिनों में और तेज हुआ है। विवाद का केंद्र विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, मतदाता पंजीकरण के Form 6 में किए गए बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद हैं।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है और Form 6 से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग भी उठाई है। दूसरी ओर BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया और फैसलों का बचाव किया है।
इस पूरे मामले में एक अहम तथ्य यह है कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद कहा कि आयोग के फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है। बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद थे।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई
विवाद उस रिपोर्ट के बाद गहरा हुआ जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां उठाए जाने का दावा किया गया।
रिपोर्ट में कथित तौर पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया। इनमें मतदाता पंजीकरण के Form 6, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच और SIR से जुड़े फैसलों जैसे मुद्दे शामिल बताए गए।
हालांकि, इसे चुनाव आयोग के भीतर निर्णायक संस्थागत टूट के रूप में पेश करना अभी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। आयोग की ओर से बाद की आधिकारिक प्रक्रिया में फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त होने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस का आरोप है कि नए मतदाताओं से उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले SIR में मतदाता सूची में शामिल होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई। पार्टी का कहना है कि इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया कठिन हुई।
कांग्रेस ने इस बदलाव की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर संज्ञान लेने और CEC की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। Form 6 को लेकर कांग्रेस का आरोप एक राजनीतिक दावा है। चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आयोग ने इसे Form 6 में मूल वैधानिक संशोधन के बजाय अतिरिक्त घोषणा के तौर पर बताया है।
कांग्रेस की रणनीति के 10 प्रमुख बिंदु
1. CEC के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। राहुल गांधी और जयराम रमेश दोनों ने इस मांग को सार्वजनिक रूप से उठाया है।
2. Form 6 को राजनीतिक मुद्दा बनाना
पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं से जुड़े Form 6 के विवाद को कांग्रेस चुनावी अधिकार और मतदाता पंजीकरण के सवाल से जोड़ रही है। पार्टी का तर्क है कि नए मतदाताओं के सामने अतिरिक्त प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।
3. सुप्रीम कोर्ट का रुख
कांग्रेस ने Form 6 में कथित बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। इससे विवाद राजनीतिक बयानबाजी से आगे न्यायिक मंच तक पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।
4. SIR पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण कांग्रेस के अभियान का दूसरा बड़ा केंद्र है। पार्टी लंबे समय से SIR के जरिए मतदाता सूची में संभावित बदलावों और इसके असर पर सवाल उठाती रही है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ता है। CEC ज्ञानेश कुमार ने अलग-अलग आधिकारिक कार्यक्रमों में कहा है कि चुनावी प्रक्रिया संविधान, कानून और आयोग के निर्देशों के तहत संचालित होती है।
5. चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का मुद्दा
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों की कथित आपत्तियों को संस्थागत जवाबदेही के सवाल से जोड़ा है।
लेकिन आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद जारी आधिकारिक सूचना में तीनों आयुक्तों की मौजूदगी में लिए गए फैसलों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त होने की बात कही गई।
6. विपक्षी दलों के साथ समन्वय
विवाद अब केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है। विपक्षी दलों के बीच CEC के खिलाफ कार्रवाई और SIR से जुड़े मुद्दों पर समन्वय की कोशिशों की खबरें सामने आई हैं।
30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक प्रस्तावित होने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं, जिसमें चुनाव आयोग और CEC को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की बात कही गई है।
7. सड़क से संसद तक दबाव
कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शनों के जरिए इस मुद्दे को संगठनात्मक और सार्वजनिक अभियान में बदलने की कोशिश की है। इसके साथ ही विपक्षी दल संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों के इस्तेमाल पर भी चर्चा कर रहे हैं।
CEC को हटाने की प्रक्रिया सामान्य राजनीतिक प्रस्ताव जैसी नहीं है। संविधान के तहत इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
8. युवा मतदाताओं पर फोकस
Form 6 विवाद का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक आयाम युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिक हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि नई घोषणा ने इस वर्ग के सामने अतिरिक्त बाधा पैदा की। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण और चुनावी जागरूकता को लेकर देशभर में अभियान चलाया है। सितंबर में CEC ने युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के लिए Electoral Literacy Clubs पर भी जोर दिया।
9. BJP का बचाव
BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि चुनाव आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं और आयोग की हालिया बैठक में फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।
BJP ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
10. चुनावी राजनीति पर असर
इस विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर आने वाले चुनावी नैरेटिव पर पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग का मुद्दा राजनीतिक लामबंदी का हिस्सा बन रहा है।
BJP के लिए चुनौती यह है कि वह चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का राजनीतिक और संस्थागत जवाब कैसे देती है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह विवाद किसी चुनाव के परिणाम को किस दिशा में प्रभावित करेगा। उसके लिए मतदाता व्यवहार, स्थानीय मुद्दे, चुनावी गठबंधन और आधिकारिक चुनावी आंकड़ों का इंतजार जरूरी होगा।
चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष क्या है
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक में SIR से जुड़े कई प्रक्रियात्मक फैसले किए। आयोग ने कहा कि जिन लोगों को नोटिस दिया गया है और जिनके मामलों में दस्तावेजी या तार्किक विसंगतियां हैं, उनके घर जाकर BLO दस्तावेज जुटा सकते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को सामान्य परिस्थितियों में ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है।
यह बदलाव विवाद के बीच महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे SIR प्रक्रिया में नागरिकों पर पड़ने वाली प्रक्रियात्मक बाधा कम करने का प्रयास दिखाई देता है।
ज्ञानेश कुमार की भूमिका
ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। इससे पहले वह मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य कर रहे थे।
सितंबर 2026 में वह मतदाता सूची, SIR और चुनावी जागरूकता से जुड़े कई आधिकारिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें वर्तमान CEC के रूप में दर्ज किया गया है।
BJP और कांग्रेस के दावों में मुख्य अंतर
इस विवाद में मूल अंतर संस्थागत प्रक्रिया की व्याख्या को लेकर है।
कांग्रेस का कहना है कि आयोग के कुछ फैसलों और Form 6 में बदलाव से संवैधानिक तथा कानूनी सवाल पैदा हुए हैं। पार्टी इन्हें जवाबदेही और मतदाता अधिकार के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है।
BJP का कहना है कि आयोग की प्रक्रिया वैधानिक है और हालिया आधिकारिक स्पष्टीकरण ने आंतरिक मतभेद से जुड़े सवालों को स्पष्ट कर दिया है।
चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी आधिकारिक सूचना इन फैसलों को पूर्ण आयोग की बैठक और मंजूरी से जोड़ती है।
आगे क्या होगा
अब इस पूरे विवाद की अगली बड़ी कड़ी विपक्षी दलों की प्रस्तावित बैठक, Form 6 से जुड़े सवालों पर संभावित न्यायिक कार्रवाई और SIR की आगे की प्रक्रिया होगी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दस्तावेज जमा करने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। आयोग ने प्रक्रिया को लेकर कुछ सुनवाई संबंधी नियमों में बदलाव किए हैं।
आने वाले दिनों में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। क्या Form 6 को लेकर उठाए गए सवालों पर न्यायिक सुनवाई होती है? क्या विपक्षी दल CEC के खिलाफ एक साझा संसदीय रणनीति बना पाते हैं? और क्या चुनाव आयोग अपने प्रक्रियात्मक फैसलों को लेकर अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी करता है?
ज्ञानेश कुमार को लेकर मौजूदा विवाद केवल एक व्यक्ति या एक राजनीतिक दल के बीच टकराव तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया, चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही और राजनीतिक दलों के बीच भरोसे का सवाल है।
कांग्रेस अपने आरोपों को आगे बढ़ा रही है। BJP चुनाव आयोग के फैसलों का बचाव कर रही है। चुनाव आयोग अपने आधिकारिक फैसलों और प्रक्रियाओं को सामने रख रहा है।
इसलिए इस पूरे मामले में सबसे अहम बात आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच फर्क बनाए रखना है। Form 6, SIR और आयोग के भीतर कथित मतभेद से जुड़े विवादों पर आगे आने वाले आधिकारिक दस्तावेज, न्यायिक आदेश और चुनाव आयोग के फैसले ही तस्वीर को अधिक स्पष्ट करेंगे।
वीडियो देखें
ADVERTISEMENT
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।