भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा ने विश्व शतरंज में एक और बड़ा इतिहास रच दिया है। उन्होंने अमेरिका के सेंट लुइस में ग्रैंड चेस टूर 2026 का खिताब अपने नाम किया और इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। फाइनल में प्रज्ञानंदा ने अमेरिका के शीर्ष ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारुआना को 15-13 से मात दी।
सेंट लुइस, अमेरिका | 28 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
इस जीत की सबसे खास बात प्रज्ञानंदा की वापसी रही। फाइनल के शुरुआती चरण में वह कारुआना से 6 अंकों से पीछे चल रहे थे। मुकाबला उनके खिलाफ जाता दिखाई दे रहा था, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में संयम बनाए रखा और रैपिड मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्थिति पलट दी।
फाइनल की शुरुआत प्रज्ञानंदा के लिए मुश्किल रही। कारुआना ने शुरुआती क्लासिकल मुकाबले में 6-0 की बढ़त हासिल कर ली। दूसरे क्लासिकल गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच 3-3 का स्कोर रहा। इससे कारुआना को कुल मिलाकर मजबूत बढ़त हासिल थी। प्रज्ञानंदा के सामने अब वापसी के लिए बेहद कठिन चुनौती थी। लेकिन भारतीय ग्रैंडमास्टर ने निर्णायक चरण में अपना खेल पूरी तरह बदल दिया।
रैपिड चरण में प्रज्ञानंदा ने लगातार दोनों गेम जीतकर मुकाबले की तस्वीर बदल दी। इन दो जीतों के बाद स्कोर 11-9 हो गया और भारतीय खिलाड़ी पहली बार फाइनल में बढ़त की स्थिति में पहुंचे। इस वापसी ने कारुआना पर दबाव बढ़ा दिया। दूसरी तरफ प्रज्ञानंदा ने आक्रामकता और संयम का संतुलन बनाए रखा। फाइनल का यह चरण उनकी मानसिक मजबूती का सबसे बड़ा उदाहरण रहा। 6 अंकों से पिछड़ने के बाद लगातार जीत हासिल करना आसान नहीं था।
रैपिड मुकाबलों के बाद फाइनल रोमांचक स्थिति में पहुंच गया। कारुआना ने एक गेम जीतकर वापसी की कोशिश की और अंतर कम किया।
प्रज्ञानंदा ने इसके बाद तीसरे निर्णायक रैपिड गेम में जीत दर्ज की। इससे उनका स्कोर 14-12 हो गया। अंतिम गेम ड्रॉ रहने के बाद कुल स्कोर 15-13 रहा और प्रज्ञानंदा ने खिताब पर कब्जा कर लिया। इस तरह उन्होंने केवल मुकाबला नहीं जीता, बल्कि बेहद मुश्किल स्थिति से वापसी करके अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया।
प्रज्ञानंदा की इस उपलब्धि का सबसे बड़ा पहलू यह है कि वह ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। ग्रैंड चेस टूर में विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच मुकाबले होते हैं। ऐसे टूर्नामेंट में खिताब जीतना भारतीय शतरंज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस जीत के साथ प्रज्ञानंदा ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
प्रज्ञानंदा के लिए 2026 बेहद सफल साल रहा है। ग्रैंड चेस टूर से पहले उन्होंने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब भी जीता था। नॉर्वे चेस जीतकर वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। उस प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी दो बार हराया था। अब ग्रैंड चेस टूर की जीत ने उनके इस शानदार साल को और खास बना दिया है।
प्रज्ञानंदा की ऐतिहासिक जीत पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रज्ञानंदा की मानसिक मजबूती और रणनीतिक कौशल की सराहना की। उन्होंने इस कामयाबी को तमिलनाडु और भारत के लिए गर्व का विषय बताया तथा कहा कि उनकी उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी। मुख्यमंत्री और प्रज्ञानंदा के बीच इससे पहले भी मुलाकात हो चुकी है। नॉर्वे चेस की जीत के बाद प्रज्ञानंदा को तमिलनाडु सरकार की ओर से सम्मानित किया गया था।
प्रज्ञानंदा कम उम्र में ही विश्व शतरंज के शीर्ष स्तर पर पहुंचने वाले भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे।
फिडे के मुताबिक उनकी सर्वश्रेष्ठ रेटिंग 2785 रही है और वह विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान तक पहुंच चुके हैं। 2023 फिडे विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता था। 2024 शतरंज ओलंपियाड में वह भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा भी रहे। इन उपलब्धियों के बाद ग्रैंड चेस टूर का खिताब उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है।
फैबियानो कारुआना विश्व शतरंज के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ फाइनल में जीत हासिल करना प्रज्ञानंदा की क्षमता और दबाव में प्रदर्शन करने की काबिलियत को दिखाता है। हालांकि मुकाबले का शुरुआती हिस्सा पूरी तरह कारुआना के पक्ष में था। प्रज्ञानंदा की असली परीक्षा तब हुई जब उन्हें 6 अंकों की कमी से वापसी करनी थी। उन्होंने रैपिड चरण में लगातार जीत हासिल कर मुकाबले की दिशा बदल दी। यही वापसी इस फाइनल की सबसे बड़ी कहानी बन गई।
प्रज्ञानंदा की लगातार अंतरराष्ट्रीय कामयाबी भारतीय शतरंज के बदलते दौर को भी दिखाती है। विश्वनाथन आनंद के बाद भारतीय शतरंज में नई पीढ़ी के कई खिलाड़ी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। प्रज्ञानंदा इस पीढ़ी के सबसे प्रमुख चेहरों में हैं। उनकी सफलता से देश में युवा खिलाड़ियों के बीच शतरंज को लेकर दिलचस्पी और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। ग्रैंड चेस टूर का खिताब इस बात का भी संकेत है कि भारतीय खिलाड़ी अब दुनिया के सबसे मजबूत शतरंज सर्किट में केवल चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि खिताब जीतने के लिए उतर रहे हैं।
इतिहास रचने के बाद अब प्रज्ञानंदा के सामने सबसे बड़ी चुनौती निरंतरता बनाए रखने की होगी। शीर्ष स्तर के शतरंज में एक बड़ी जीत के बाद उसी प्रदर्शन को लगातार दोहराना आसान नहीं होता। 2026 में नॉर्वे चेस और ग्रैंड चेस टूर की जीत ने उनकी क्षमता जरूर साबित कर दी है। अब उनका लक्ष्य विश्व रैंकिंग में अपनी स्थिति और मजबूत करना तथा आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में खिताबी प्रदर्शन जारी रखना होगा।
प्रज्ञानंदा की ग्रैंड चेस टूर जीत भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। 6 अंकों से पिछड़ने के बाद 15-13 से फाइनल जीतना इस कामयाबी को और खास बनाता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की बधाई ने भी इस उपलब्धि को राष्ट्रीय चर्चा में जगह दी है। प्रज्ञानंदा अब उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां उनकी हर बड़ी जीत भारतीय शतरंज की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को और मजबूत करती है। सेंट लुइस में मिली यह जीत उनके 2026 अभियान की एक और बड़ी कामयाबी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रैंड चेस टूर का खिताब अब पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी के नाम है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।