यूपी में सीट शेयरिंग पर सपा-कांग्रेस में खींचतान, राजेंद्र पाल गौतम ने 150 से कम सीटों से किया इनकार
Mohammad Naved
•
2026-09-29 12:06:36
यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर पेच है। राजेंद्र पाल गौतम ने 150 से कम सीटों से इनकार किया और अक्टूबर में बंटवारे पर फैसला होने की बात कही।
📍
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️
29 सितंबर 2026
✍️
Mohd Naved
यूपी चुनाव 2027 से पहले सीट शेयरिंग पर नया पेच
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सीट शेयरिंग सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गया है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट किया है कि गठबंधन की स्थिति में पार्टी 150 से कम विधानसभा सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन और उम्मीदवारों के स्तर पर तैयारी कर रही है।
गौतम के ताजा बयान के मुताबिक सीट शेयरिंग पर अंतिम बातचीत अक्टूबर में होने की उम्मीद है। यानी अभी सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का कोई अंतिम फार्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है।
कांग्रेस ने 50% हिस्सेदारी का दावा किया
राजेंद्र पाल गौतम ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को विधानसभा की 50% सीटों का हकदार बताया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इसका आधा 201.5 होता है, इसलिए व्यावहारिक सीट बंटवारे में अंतिम संख्या राजनीतिक बातचीत और सहमति पर निर्भर करेगी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि गौतम के बयान में एक तरफ 50% हिस्सेदारी का दावा सामने आया है, वहीं उन्होंने कांग्रेस के लिए 150 सीटों की न्यूनतम सीमा भी स्पष्ट की है। इसलिए इसे अभी 200 या 201 सीटों की अंतिम मांग के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। मौजूदा सार्वजनिक बयान में स्पष्ट संख्या 150 से कम नहीं होने की है।
सभी 403 सीटों पर कांग्रेस की तैयारी
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के अनुसार पार्टी के पास सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के लिए संभावित उम्मीदवार मौजूद हैं। संगठन स्तर पर भी पार्टी पूरे प्रदेश में तैयारी कर रही है।
इसका राजनीतिक अर्थ यह है कि कांग्रेस फिलहाल किसी संभावित सीट समझौते को लेकर अपनी संगठनात्मक तैयारी सीमित नहीं कर रही है। पार्टी सभी सीटों पर अपना ढांचा मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सितंबर में भी गौतम ने कहा था कि कांग्रेस सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और गठबंधन पर बातचीत अगले चरण में आगे बढ़ेगी।
अक्टूबर में सीट बंटवारे पर बातचीत
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि सीट शेयरिंग पर अक्टूबर में फैसला होने की उम्मीद है। उनके मुताबिक कांग्रेस पिछले करीब 2 महीनों से इस मुद्दे पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस के शीर्ष स्तर के नेता इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और राजेंद्र पाल गौतम का नाम सामने आया है।
हालांकि, सपा की ओर से इस समय कोई ऐसा आधिकारिक सीट शेयरिंग फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है, जिससे दोनों दलों के बीच अंतिम सहमति का दावा किया जा सके।
सपा के लिए क्या है मुख्य चुनौती
सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का सवाल केवल संख्या तक सीमित नहीं है। दोनों दलों को उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करनी होगी जहां गठबंधन के उम्मीदवार के लिए संगठन, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी समीकरण अनुकूल हों।
सपा उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अपना व्यापक संगठनात्मक आधार रखती है। कांग्रेस दूसरी तरफ राज्य में अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के लिए सीटों की संख्या के साथ-साथ सीटों की गुणवत्ता भी बातचीत का अहम हिस्सा होगी।
सीट शेयरिंग में यह भी तय होना होगा कि किन क्षेत्रों में किस पार्टी का स्थानीय संगठन अधिक सक्रिय है और पिछले चुनावी प्रदर्शन तथा मौजूदा राजनीतिक समीकरण किस तरह प्रभावित होते हैं।
2024 के गठबंधन का संदर्भ
सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 2024 का लोकसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था। दोनों दल अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी साथ आने की संभावना पर काम कर रहे हैं।
लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों का चुनावी भूगोल अलग होता है। विधानसभा स्तर पर उम्मीदवार, स्थानीय संगठन, जातीय और सामाजिक समीकरण तथा क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका अधिक प्रत्यक्ष होती है। इसलिए 2024 का गठबंधन अपने आप 2027 के लिए सीटों का फार्मूला तय नहीं करता।
कांग्रेस की मांग और सपा की स्थिति
कांग्रेस की ओर से 50% हिस्सेदारी का दावा पहले भी सामने आ चुका है। जून और जुलाई में राजेंद्र पाल गौतम की ओर से बराबरी और सम्मानजनक हिस्सेदारी की बात कही गई थी। बाद के बयानों में 403 सीटों पर तैयारी और फिर 150 से कम सीटों पर चुनाव न लड़ने का रुख सामने आया।
दूसरी तरफ सपा की ओर से सीट शेयरिंग का अंतिम आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों दल कितनी सीटों पर समझौता करेंगे।
यही वजह है कि मौजूदा स्थिति को अंतिम सीट बंटवारे के बजाय बातचीत के दौर के रूप में देखना अधिक सटीक है।
क्या 200 सीटों की मांग तय है?
इस मुद्दे पर एक अहम तथ्य अलग करना जरूरी है। कांग्रेस के 50% हिस्सेदारी वाले रुख को 403 सीटों के आधार पर देखा जाए तो संख्या 201.5 बनती है। लेकिन राजेंद्र पाल गौतम के ताजा बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
इसलिए 200 सीटों को कांग्रेस की अंतिम और आधिकारिक मांग बताना अभी सही नहीं होगा। 200 या उसके आसपास की संख्या को लेकर पहले अलग-अलग राजनीतिक बयानों और रिपोर्टों में चर्चा हुई है, लेकिन मौजूदा सार्वजनिक स्थिति में 150 सीटों की न्यूनतम सीमा स्पष्ट रूप से सामने आई है।
आगे क्या होगा?
अक्टूबर में सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है। अंतिम फार्मूला बनने के लिए दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति जरूरी होगी।
बातचीत में सीटों की कुल संख्या के साथ विधानसभा क्षेत्रों का चयन भी महत्वपूर्ण रहेगा। इसके बाद दोनों दल अपने संभावित उम्मीदवारों और संगठनात्मक रणनीति को उसी आधार पर अंतिम रूप दे सकते हैं।
फिलहाल कांग्रेस ने 403 सीटों पर तैयारी जारी रखने और 150 से कम सीटों पर गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ने का रुख स्पष्ट किया है। सपा की ओर से अंतिम संख्या सामने आने के बाद ही दोनों दलों के बीच वास्तविक दूरी और संभावित समझौते की तस्वीर साफ होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत अब अहम चरण में पहुंच रही है। कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए 150 सीटों से नीचे जाने से इनकार किया है और साथ ही 50% हिस्सेदारी का दावा भी रखा है।
लेकिन अंतिम सीट बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है। अक्टूबर की बातचीत यह तय करेगी कि 403 सदस्यीय विधानसभा में दोनों दल किस फार्मूले पर सहमत होते हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि कांग्रेस सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है, जबकि गठबंधन की स्थिति में 150 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने से उसने इनकार किया है
वीडियो देखें
ADVERTISEMENT
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।