अखिलेश यादव ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी मामले को लेकर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राम धन की चोरी करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े कथित चोरी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर फिर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव का कहना है कि रामराज की बात करने वालों ने राम धन तक को नहीं छोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंच रही।
अगस्त 2026 में एक जनसभा के दौरान अखिलेश ने कहा था कि जो लोग रामराज लाने की बात करते थे, उन्होंने “राम धन” को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपनी बदनामी बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
अखिलेश यादव इस विवाद को केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं मानते। उनका राजनीतिक तर्क है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया चढ़ावा धार्मिक आस्था से जुड़ा है।
इसलिए अगर दान की रकम या दूसरी चढ़ावा सामग्री में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जून 2026 में भी अखिलेश ने कहा था कि अगर चढ़ावे को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है तो संबंधित लोग उसे वापस रख दें। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच शुरू की गई थी।
जांच की प्रक्रिया को लेकर अखिलेश यादव लगातार सवाल उठाते रहे। जून में उन्होंने तंज करते हुए कहा था कि एसआईटी सावधान रहे, कहीं जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए।
उनका आरोप था कि जांच को लंबा खींचकर सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। यह भी अखिलेश का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई सामने आई।
आकाशवाणी की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ाई गई थी। मामला श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान के कथित गबन से संबंधित बताया गया।
जुलाई की एक रिपोर्ट में आरोपी अविनाश शुक्ला की 24 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर होने की जानकारी भी सामने आई थी। पुलिस ने कथित चोरी की रकम, संभावित बरामदगी और पूरे नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की बात कही थी।
इससे साफ है कि मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन अंतिम जिम्मेदारी और दोष अदालत तथा जांच के निष्कर्षों से तय होंगे।
राम मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। अखिलेश यादव ने इस मामले को भाजपा सरकार की जवाबदेही से जोड़ दिया है।
सपा लगातार यह सवाल उठा रही है कि मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था कितनी पारदर्शी है और जांच का दायरा कितना व्यापक है।
जून 2026 में अखिलेश ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा था कि उसके लिए धर्म का मतलब धन हो गया है। उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े
विवाद को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की थी।
इस विवाद ने सरकार और मंदिर प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान की निगरानी, गिनती, रिकॉर्डिंग और सुरक्षित रख-रखाव की व्यवस्था कितनी मजबूत है?
अगर किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो कार्रवाई केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग उठती है।
दूसरी तरफ जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है। यही वजह है कि इस मामले में राजनीतिक आरोप और जांच के निष्कर्षों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है।
अखिलेश यादव का “राम धन” वाला बयान सीधे भाजपा के उस राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देता है जिसमें राम मंदिर और अयोध्या को उसकी बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
सपा नेता इसी धार्मिक और राजनीतिक प्रतीक को जवाबदेही के सवाल से जोड़ रहे हैं।
उनका संदेश है कि राम मंदिर के नाम पर श्रद्धालुओं से मिले धन या चढ़ावे में अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी वजह से यह मामला अब केवल मंदिर प्रबंधन से जुड़ा विवाद नहीं रह गया है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक अहम मुद्दा बन चुका है।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर जून और जुलाई 2026 में कई बयान दिए। उन्होंने कभी एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया तो कभी भाजपा पर मंदिर के चढ़ावे को लेकर हमला बोला।
जुलाई में उन्होंने कहा था कि भगवान राम ऐसे लोगों को माफ नहीं करेंगे और चढ़ावे के हिसाब को लेकर भी सवाल उठाए।
अखिलेश ने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट के जरिए भी इस मुद्दे को लगातार उठाया। जुलाई में उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए चढ़ावा चोरी के आरोपों पर भाजपा पर राजनीतिक तंज किया था।
राम मंदिर से जुड़े इस मामले का राजनीतिक असर आने वाले समय में भी दिखाई दे सकता है। भाजपा जहां राम मंदिर निर्माण को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती है, वहीं सपा अब मंदिर से जुड़े दान और प्रबंधन की पारदर्शिता को सवाल बना रही है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अयोध्या का चढ़ावा विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील और लगातार उठाया जा रहा मुद्दा बना हुआ है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।