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रायपुर रथ यात्रा में सीएम साय ने निभाई छेरा पहरा रस्म, उमड़ा जनसैलाब

Shahana • 2026-07-16 14:31:57
रायपुर रथ यात्रा में सीएम साय ने निभाई छेरा पहरा रस्म, उमड़ा जनसैलाब

रायपुर रथ यात्रा में सीएम साय ने सोने की झाड़ू से निभाई परंपरा

छेरा पहरा रस्म के साथ निकली जगन्नाथ रथयात्रा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


Location:-  Raipur, Chhattisgarh

Date:-  16 July 2026

Byline:-  Shahana


राज्यपाल और सीएम ने खींचा रथ, रायपुर में दिखा आस्था का महासागर

रायपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्यपाल रमेन डेका ने पारंपरिक छेरा पहरा रस्म निभाई। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बना। सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठे लोग भी परंपरा के सामने स्वयं को सेवक मानते हैं।

रायपुर में आस्था और परंपरा का भव्य संगम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के रंग में रंगी दिखाई दी। गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से निकली रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन का सबसे चर्चित क्षण तब सामने आया जब राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोने की झाड़ू से पारंपरिक "छेरा पहरा" रस्म निभाई।

क्या है छेरा पहरा की परंपरा

छेरा पहरा ओडिशा की जगन्नाथ परंपरा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें राजा या सर्वोच्च शासक सोने की झाड़ू से रथ के आसपास प्रतीकात्मक सफाई करते हैं। इसका संदेश यह है कि ईश्वर के सामने सभी समान हैं और सत्ता का सर्वोच्च पद भी सेवा का प्रतीक है। यह परंपरा सदियों से पुरी की रथयात्रा में निभाई जाती रही है और देश के कई जगन्नाथ मंदिरों में इसका पालन किया जाता है।

विधि-विधान के साथ हुई पूजा

रथयात्रा शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की अमन, तरक्की और खुशहाली की दुआ की। इसके बाद पारंपरिक रीति से छेरा पहरा की रस्म अदा की गई और रथयात्रा आगे बढ़ी।

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी

सुबह से ही मंदिर परिसर और रथयात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। परिवारों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। धार्मिक भजन, शंखनाद और जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के लिए विशेष इंतजाम किए थे।

रायपुर की रथयात्रा क्यों है महत्वपूर्ण

रायपुर की रथयात्रा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में यह राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो चुकी है। इसमें विभिन्न समाजों, धार्मिक संगठनों और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। यह आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।

परंपरा और राजनीति पर चर्चा

हर वर्ष सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख नेताओं की धार्मिक आयोजनों में मौजूदगी चर्चा का विषय बनती है। समर्थकों का कहना है कि यह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का हिस्सा है, जबकि कुछ विश्लेषकों का मत है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक आयोजनों में अपनी भूमिका संतुलित रखनी चाहिए। इस विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।

हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रायपुर का यह आयोजन पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम था, जिसमें राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने स्थानीय परंपरा के अनुरूप भाग लिया। इस संबंध में किसी विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं। जगन्नाथ परंपरा केवल ओडिशा तक सीमित नहीं रही, बल्कि छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में इसकी मजबूत धार्मिक और सांस्कृतिक उपस्थिति विकसित हुई है।

आगे क्या

रथयात्रा के बाद परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ निर्धारित अवधि तक विश्राम स्थल पर विराजमान रहते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से पुनः मंदिर लौटते हैं। आगामी धार्मिक कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

 

रायपुर की रथयात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराएं केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक निरंतरता और सार्वजनिक सहभागिता का माध्यम भी हैं। छेरा पहरा की रस्म ने सेवा, विनम्रता और समानता के उस संदेश को दोहराया, जिसे जगन्नाथ परंपरा सदियों से आगे बढ़ाती रही है।

 

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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