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रंग पंचमी 8 मार्च 2026: तिथि, परंपरा और पूजा विधि

None 2026-03-05 10:40:24
रंग पंचमी 8 मार्च 2026: तिथि, परंपरा और पूजा विधि

रंग पंचमी 2026: 8 मार्च को पूरे दिन होगा उत्सव

होली के बाद रंग पंचमी: तिथि और धार्मिक परंपराएं

रंग पंचमी कब है: पंचमी तिथि, पूजा और मान्यताएं

रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च 2026, रविवार को मनाया जाएगा। यह होली के पांचवें दिन, चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर आता है। पंचमी तिथि 7 मार्च 2026 को शाम 7:17 बजे शुरू होकर 8 मार्च की रात 9:11 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार पूरे दिन 8 मार्च को रंग पंचमी का आयोजन होगा। यह पर्व धार्मिक परंपराओं, मंदिरों में विशेष पूजा और गुलाल उड़ाने की परंपरा से जुड़ा है।

✍️ज्योतिर्विद पं. सुबोध पाण्डेय 

रंग पंचमी 8 मार्च 2026 को मनाई जाएगी

यह चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर आती है, जो होली के पांचवें दिन होती है। 

 पंचमी तिथि 7 मार्च 2026 को शाम 7:17 बजे शुरू होकर 8 मार्च को रात 9:11 बजे तक रहेगी। इसलिए उदय तिथि के अनुसार पूरा दिन 8 मार्च (रविवार) को उत्सव मनाया जाएगा । 

सूर्योदय लगभग सुबह 6:46 बजे होगा।

 पंचमी पर देवी-देवताओं, विशेषकर भगवान कृष्ण और राधा को रंग-गुलाल चढ़ाया जाता है।

रंग पंचमी हिंदू पंचांग के चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया  इस त्यौहार को देवताओं की होली के नाम से भी जाना जाता है।भगवान कृष्ण और राधा रानी द्वारा खेली गई होली से जुड़ा है, जहां देवी-देवता भी रंगों के साथ शामिल होते हैं। रंग उड़ाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा आती है और रज-तम गुणों का नाश होता है। इससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती हैं 

लोग अबीर-गुलाल हवा में उड़ाते हैं, न कि एक-दूसरे पर लगाते।  राधा-कृष्ण या लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती हैं।

रंग पंचमी की पूजा सरल और भक्ति भरी होती है, मुख्य रूप से भगवान कृष्ण, राधा रानी, शिव-पार्वती और माता लक्ष्मी की की जाती है।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें घर के मंदिर में उत्तर दिशा में चौकी सजाएं, राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तांबे के कलश में जल भरकर रखें, कुंकुम-चंदन से तिलक लगाएं।

गुलाल, अबीर, फूलमाला, चंदन और पुष्प अर्पित करें।घी का दीपक जलाएं, धूप-दीप दिखाएं, नैवेद्य (फल, मिठाई) चढ़ाएं।राधा-कृष्ण को रंग लगाएं, आरती उतारें और  नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।

शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाएं।

 लक्ष्मी-विष्णु को लाल गुलाल अर्पित करें।  

कनकधारा स्तोत्र पढ़ें  इससे धन लाभ होता है।कृष्ण-राधा को लाल वस्त्र, चंदन और पीला-गुलाबी गुलाल अर्पित करें वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करें, लाल धागा बांधें विवाह बाधाएं दूर होती हैं

पर्स में हल्दी की गांठ या पीला धागा रखें आर्थिक उन्नति के द्वार खुलते हैं।तुलसी पर रंग-जल छिड़कें, मुख्य द्वार पर गुलाल लगाएं; घर में सुख-शांति बनी रहती है।

व्रत में शाम को फलाहार करें और अगले दिन दान करें।

रंग पंचमी पर भगवान कृष्ण, राधा रानी और विष्णु-लक्ष्मी के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। मुख्य रूप से नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।  108 बार जाप से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

  ऐं श्रीं राधायै नमः वैवाहिक सुख के लिए लाभकारी मंत्र हैं।

 श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः धन लाभ हेतु मंत्र हैं।

आरती के बाद प्रसाद बांटें, एक-दूसरे को रंग लगाकर होली खेलें। 

सात्विक भोजन ग्रहण करें या व्रत रखने वाले अगले दिन दान के बाद तोड़ें। इससे सुख-समृद्धि मिलती है।

रंग पंचमी: तिथि और पंचांग विवरण

रंग पंचमी हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 7 मार्च की शाम से आरंभ होकर 8 मार्च की रात तक रहेगी। धार्मिक कैलेंडर के अनुसार उदय तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए उत्सव 8 मार्च, रविवार को मनाया जाएगा। उस दिन सूर्योदय लगभग सुबह 6:46 बजे होगा।

यह पर्व होली के पांचवें दिन आता है और कई क्षेत्रों में इसे देवताओं की होली के रूप में जाना जाता है। रंग पंचमी पर मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष आयोजन देखे जाते हैं।

धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक संदर्भ

रंग पंचमी का संबंध धार्मिक कथाओं और परंपराओं से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवताओं को रंग और गुलाल अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में यह उल्लेख मिलता है कि भगवान कृष्ण और राधा से जुड़ी होली की परंपरा के विस्तार के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

इस दिन रंग उड़ाने की परंपरा प्रचलित है। लोग एक-दूसरे पर रंग लगाने के बजाय गुलाल को हवा में उड़ाते हैं। इसे वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार से जोड़ा जाता है।

पूजा का स्वरूप और विधि

रंग पंचमी की पूजा सरल मानी जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। घर के मंदिर में उत्तर दिशा की ओर चौकी सजाई जाती है। राधा-कृष्ण या लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति या चित्र स्थापित किए जाते हैं।

तांबे के कलश में जल भरा जाता है और कुंकुम व चंदन से तिलक किया जाता है। गुलाल, अबीर, फूलमाला, चंदन और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। घी का दीपक जलाकर धूप-दीप दिखाया जाता है। फल और मिठाई का नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, राधा-कृष्ण को रंग अर्पित कर आरती की जाती है। कई घरों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। लक्ष्मी-विष्णु की पूजा में लाल गुलाल चढ़ाने की परंपरा भी देखी जाती है।

मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान

रंग पंचमी पर मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार “नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। इसके अलावा राधा और लक्ष्मी से जुड़े मंत्रों का पाठ भी कई श्रद्धालु करते हैं।

आरती के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है। परिवार और समुदाय के लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं देते हैं।

व्रत, दान और सामाजिक परंपराएं

कुछ श्रद्धालु रंग पंचमी पर व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग शाम को फलाहार करते हैं और अगले दिन दान करने की परंपरा निभाते हैं। सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह पर्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है। मंदिरों में भजन, कीर्तन और रंग उड़ाने के आयोजन होते हैं। कई स्थानों पर पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

समकालीन संदर्भ में रंग पंचमी

आज के समय में रंग पंचमी का आयोजन पारंपरिक और आधुनिक दोनों रूपों में देखा जाता है। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप का यह पर्व लोगों को जोड़ने का अवसर देता है। प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए जाते हैं ताकि उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

क्षेत्रीय परंपराएं और आयोजन

देश के विभिन्न हिस्सों में रंग पंचमी अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष रंगोत्सव होते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सामूहिक जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हालांकि परंपराओं में विविधता होती है, लेकिन मूल भावना धार्मिक श्रद्धा और सामूहिक उत्सव की ही रहती है।

सार्वजनिक व्यवस्था और तैयारियां

रंग पंचमी के अवसर पर स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियां व्यवस्थाओं की समीक्षा करती हैं। भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन कराने के प्रयास भी किए जाते हैं।

रंग पंचमी 2026 में 8 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 7 मार्च की शाम से 8 मार्च की रात तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार पूरे दिन उत्सव होगा। यह पर्व धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता से जुड़ा है और देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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