भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7,976 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। घुटने की तकलीफ के बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
📍 ग्लासगो, स्कॉटलैंड
📰 1 अगस्त 2026
✍️ BY Haris
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए एथलेटिक्स से एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। उन्होंने 7,976 अंक अर्जित किए और इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।
ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की डेकाथलॉन प्रतियोगिता में तेजस्विन शंकर ने दस अलग-अलग स्पर्धाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। घुटने में दर्द होने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता पूरी की और कुल 7,976 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
डेकाथलॉन एथलेटिक्स की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में गिनी जाती है। इसमें खिलाड़ियों को दो दिनों में 10 अलग-अलग ट्रैक और फील्ड इवेंट में भाग लेना होता है। इसमें प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।
भारतीय एथलेटिक्स में इस स्पर्धा में अब तक कोई खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों का पदक नहीं जीत सका था। तेजस्विन शंकर ने यह कमी पूरी कर दी।
ग्रेनेडा के लिंडन विक्टर ने 8,096 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता।
कनाडा के डेमियन वार्नर ने 8,036 अंक हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया।
तेजस्विन शंकर ने 7,976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया।
समाचार एजेंसी वार्ता द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, तेजस्विन शंकर ने घुटने की तकलीफ के बावजूद प्रतियोगिता पूरी की और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता।
यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डेकाथलॉन जैसी कठिन स्पर्धा में पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी का राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह भारत की बहु-स्पर्धा एथलेटिक्स में बढ़ती क्षमता को भी दर्शाता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की नजर अब एथलेटिक्स की अन्य स्पर्धाओं पर रहेगी। तेजस्विन शंकर के इस प्रदर्शन से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय दल का आत्मविश्वास भी बढ़ने की उम्मीद है।
तेजस्विन शंकर की सफलता केवल एक कांस्य पदक तक सीमित नहीं है। डेकाथलॉन जैसी बहु-स्पर्धा में लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रमाण होता है। घुटने की समस्या के बावजूद पदक जीतना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के विकास और बहु-स्पर्धाओं में भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।