रावण के भेष में निकला कांवड़िया, कांवड़ यात्रा में दिया शांति का संदेश
रावण बने कांवड़िये का संदेश, बहन-बेटियों की सुरक्षा पर जोर
कांवड़ यात्रा में रावण का रूप बना चर्चा का विषय, हिंसा रोकने की अपील
रावण के भेष में शिवभक्त बोले, कांवड़ यात्रा प्रेम और संयम से करें पूरी
मुजफ्फरनगर से गुजर रहे रावण के भेषधारी कांवड़िया मूलचंद त्यागी ने अपनी यात्रा के दौरान समाज को शांति, भाईचारे और महिलाओं की सुरक्षा का संदेश दिया। उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली हिंसा और तोड़फोड़ से बचने की अपील करते हुए संयम बनाए रखने पर जोर दिया।
📍 स्थान: मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
📰 दिनांक: 03 अगस्त 2026
✍️ By: Wasi Siddiqui
रावण के भेष में कांवड़ यात्रा बना चर्चा का विषय
मुजफ्फरनगर से गुजर रही कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार एक अनोखा दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बना। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर दिल्ली जा रहे शिवभक्त मूलचंद त्यागी रावण के भेष में यात्रा करते दिखाई दिए। राहगीरों और श्रद्धालुओं ने उन्हें उत्सुकता से देखा और कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
मूलचंद त्यागी दिल्ली के निहाल विहार क्षेत्र की रामलीला में वर्षों से रावण की भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज को सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से भी यही स्वरूप अपनाया है।
रावण के रूप में सामाजिक संदेश
मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान मूलचंद त्यागी ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल भगवान शिव का जलाभिषेक करना नहीं बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है और समाज को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता दें तथा अपराधियों के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर मजबूती से आवाज उठाएं। उनका कहना था कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल सरकार या पुलिस की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी होती है।
कांवड़ यात्रा में संयम रखने की अपील
तोड़फोड़ और हिंसा पर जताई चिंता
मूलचंद त्यागी ने कांवड़ यात्रा के दौरान छोटी-छोटी घटनाओं पर होने वाले विवाद और तोड़फोड़ को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारण से किसी कांवड़िये का गंगाजल खंडित हो जाए तो हिंसा या नुकसान पहुंचाने के बजाय सहयोग और संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क पर चल रहे किसी गरीब मजदूर, वाहन चालक या आम नागरिक की गाड़ी तोड़ना किसी समस्या का समाधान नहीं है। इससे सबसे अधिक नुकसान उसी व्यक्ति को होता है, जिसका विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता।
कांवड़ यात्रा की परंपरा और बदलता स्वरूप
उत्तर भारत में श्रावण मास के दौरान आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल है। हर वर्ष लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर अपने क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यात्रा का स्वरूप भी बदला है। पारंपरिक कांवड़ों के साथ-साथ कई श्रद्धालु सामाजिक संदेशों, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, सड़क सुरक्षा और महिला सम्मान जैसे विषयों को भी अपनी यात्रा से जोड़ते दिखाई देते हैं। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता को भी बढ़ावा देना होता है।
समाज के लिए क्या है संदेश
धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी होती है। ऐसे आयोजनों के दौरान संयम, अनुशासन और कानून का पालन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मूलचंद त्यागी का संदेश भी इसी दिशा में केंद्रित रहा, जिसमें उन्होंने प्रेम, भाईचारे और शांतिपूर्ण यात्रा पर बल दिया।
हालांकि रावण के चरित्र को लेकर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन मूलचंद त्यागी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह स्वरूप केवल एक प्रतीकात्मक सामाजिक संदेश देने के उद्देश्य से अपनाया है। उनके इस संदेश को कई श्रद्धालुओं ने सकारात्मक पहल बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अलग दृष्टिकोण से भी देखा। यह व्यक्तिगत विचारों का विषय हो सकता है।
आगे की यात्रा
संपादकीय दृष्टिकोण
मूलचंद त्यागी ने बताया कि वह एक अगस्त को हरिद्वार से यात्रा शुरू कर चुके हैं और दिल्ली के समयपुर बादली स्थित शिव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने सभी शिवभक्तों से अपील की कि कांवड़ यात्रा को श्रद्धा, अनुशासन और भाईचारे के साथ पूरा करें तथा समाज में शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।