उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू हुए एक साल पूरा हो चुका है। इस दौरान पांच लाख से अधिक आवेदन हुए, लेकिन निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई।
यूसीसी के एक साल पूरे, आवेदन संख्या पांच लाख पार
उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद बीते एक साल में विभिन्न सेवाओं के लिए कुल पांच लाख से अधिक आवेदन दर्ज किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में किसी भी स्तर पर निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। राज्य सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था नागरिकों की निजी जानकारी की हिफाजत के अपने संकल्प पर पूरी तरह खरी उतरी है।
यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव इन पंजीकरण और लिव इन संबंध समाप्त करने जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन सभी सेवाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया पर जोर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार यूसीसी से जुड़े लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस है, यानी आवेदक को किसी भी अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं पड़ती। आवेदन घर बैठे किए जा सकते हैं और तय समयसीमा में उनका निस्तारण किया जाता है।
फेसलेस सिस्टम का मकसद यही रखा गया है कि किसी भी स्तर पर आवेदक की पहचान सार्वजनिक न हो और निजी जानकारी सुरक्षित रहे। इसी वजह से अब तक किसी भी तरह की शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर शुरुआत में कुछ लोगों ने नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया था। उनका कहना है कि बीते एक साल का अनुभव इन सभी आशंकाओं का जवाब है।
मुख्यमंत्री के अनुसार यूसीसी के क्रियान्वयन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकों की निजता का शत प्रतिशत पालन किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस सरलता से पूरे प्रदेश में यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह गुड गवर्नेंस का उदाहरण है।
मजबूत डेटा सुरक्षा व्यवस्था
सरकार के मुताबिक यूसीसी पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। आवेदन के दौरान दी गई जानकारी तक सीमित पहुंच सुनिश्चित की गई है।
एक बार आवेदन सक्षम स्तर के अधिकारी द्वारा मंजूर हो जाने के बाद, संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख सकता। केवल आवेदक को ही अपनी जानकारी तक पहुंच होती है, और वह भी आवश्यक वैरिफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से।
गोपनीयता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश
अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल के डिजाइन में ही यह सुनिश्चित किया गया है कि डेटा का दुरुपयोग न हो। हर स्तर पर लॉगिंग और मॉनिटरिंग की व्यवस्था है। इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को समय-समय पर अपडेट किया जाता है।
इसी वजह से बीते एक साल में निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। सरकार इसे यूसीसी की सबसे बड़ी उपलब्धि मान रही है।
सेवाओं की बढ़ती संख्या
यूसीसी लागू होने के बाद से नागरिकों ने अलग-अलग सेवाओं के लिए पोर्टल का उपयोग किया है। विवाह पंजीकरण के साथ-साथ अब लोग विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण और लिव इन संबंधों से जुड़ी सेवाओं के लिए भी आवेदन कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन सेवाओं में हर महीने आवेदन की संख्या बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि लोग इस व्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं।
औसत पांच दिन में प्रमाणपत्र
राज्य सरकार के मुताबिक यूसीसी के तहत आवेदन करने के बाद औसतन पांच दिन में प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। पहले इसी तरह की सेवाओं के लिए लोगों को कई हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था।
तेज प्रक्रिया के कारण न सिर्फ समय की बचत हो रही है, बल्कि अनावश्यक देरी और शिकायतों में भी कमी आई है।
नागरिकों की सुविधा पर फोकस
सरकार का कहना है कि यूसीसी का मकसद केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सरल और पारदर्शी सेवाएं देना है। ऑनलाइन आवेदन, स्पष्ट दिशा-निर्देश और तय समयसीमा इसी सोच का हिस्सा हैं।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग भी अब आसानी से सेवाओं का लाभ ले पा रहे हैं। इंटरनेट और मोबाइल के जरिए आवेदन करने से भौगोलिक दूरी की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है।
प्रशासनिक स्तर पर निगरानी
यूसीसी के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है, जिससे यह देखा जा सके कि आवेदन समय पर निपटाए जा रहे हैं या नहीं।
अगर किसी स्तर पर देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाता है। सरकार का कहना है कि इसी वजह से औसत निस्तारण समय कम रखा जा सका है।
शुरुआती आशंकाएं और मौजूदा स्थिति
यूसीसी लागू होने से पहले निजता और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने इसे लेकर चिंता जताई थी।
हालांकि एक साल के आंकड़े यह दिखाते हैं कि इन आशंकाओं का कोई आधार सामने नहीं आया है। सरकार का कहना है कि व्यावहारिक अनुभव ने इन सभी सवालों का जवाब दे दिया है।
आगे की योजना
सरकारी सूत्रों के अनुसार यूसीसी पोर्टल को और बेहतर बनाने पर काम जारी है। तकनीकी सुधार, यूजर इंटरफेस को सरल बनाना और साइबर सुरक्षा को और मजबूत करना आने वाले समय की प्राथमिकताएं हैं।
इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को यूसीसी की सेवाओं और प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
निष्कर्ष के बिना तथ्यात्मक स्थिति
एक साल के अनुभव के आधार पर सरकार यह कह रही है कि समान नागरिक संहिता के तहत सेवाओं का संचालन बिना किसी बड़ी समस्या के हुआ है। पांच लाख से अधिक आवेदन और निजता उल्लंघन की शून्य शिकायत को प्रशासनिक रिकॉर्ड के रूप में पेश किया जा रहा है।
आने वाले समय में आवेदन संख्या और सेवाओं के दायरे में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।