आयकर विभाग ने मिर्ज़ा इंटरनेशनल समूह पर देशव्यापी छापेमारी की, 45 ठिकानों से फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के सबूत बरामद।
Delhi, (Shah Times)। लखनऊ से लेकर कानपुर और दिल्ली से कोलकाता तक, देश की प्रतिष्ठित लेदर निर्यातक कंपनी मिर्ज़ा इंटरनेशनल आयकर विभाग के शिकंजे में आ चुकी है। गुरुवार सुबह से ही विभाग की विशेष टीमें कंपनी के 45 से अधिक ठिकानों पर एक साथ उतरीं और छापेमारी की इस कार्रवाई ने पूरे बिज़नेस जगत को हिला दिया। मशहूर ब्रांड ""Red Tape" और "Thomas Crick" के लिए जानी जाने वाली यह कंपनी अब टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और बोगस पर्चेज के गंभीर आरोपों में घिरी है।
आयकर विभाग की टीमों ने कानपुर के जाजमऊ, माल रोड, वीआईपी रोड, उन्नाव की टेनरियों, दिल्ली-नोएडा के दफ्तरों और कोलकाता के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।
करीब 150 अधिकारी और कर्मचारी इस ऑपरेशन में शामिल रहे।
कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए।
लैपटॉप और कंप्यूटर से डाटा खंगाला गया।
कच्चे और तैयार माल का ब्योरा एक-एक कर जांचा गया।
शुरुआती जांच में भारी मात्रा में फर्जी बिलिंग और बोगस पर्चेज का खुलासा हुआ है। टीम ने करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन से जुड़े दस्तावेज़, कंप्यूटर डेटा और मोबाइल चैट्स भी जब्त किए हैं।
मिर्ज़ा इंटरनेशनल, जिसकी स्थापना 1979 में इरशाद मिर्ज़ा ने की थी, भारत की सबसे बड़ी लेदर निर्यातक कंपनियों में गिनी जाती है। "रेड टेप" ब्रांड के जूते ब्रिटेन, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, फ्रांस और यूएई समेत 24 देशों में बिकते हैं।
लेकिन आयकर विभाग के मुताबिक, कंपनी ने अपने टैक्स देनदारी को बचाने के लिए नकली कंपनियों का सहारा लिया और "बोगस पर्चेज" के जरिए लाखों-करोड़ों का फर्जी खर्च दिखाया।
इस तरह के अपराध का असर केवल सरकारी खजाने पर नहीं पड़ता बल्कि यह पूरे मार्केट स्ट्रक्चर को प्रभावित करता है। जब एक बड़ी कंपनी टैक्स चोरी करती है तो छोटे और मध्यम व्यापारी नुकसान में चले जाते हैं और प्रतिस्पर्धा असमान हो जाती है।
भारत की लेदर इंडस्ट्री पहले से ही मंदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है। ऐसे में मिर्ज़ा इंटरनेशनल जैसी प्रमुख कंपनी पर लगे आरोप पूरे सेक्टर के लिए चिंता का विषय हैं।
विदेशी खरीदार भारतीय ब्रांड्स पर संदेह कर सकते हैं।
छोटे निर्यातकों के लिए ट्रस्ट फैक्टर कमजोर होगा।
सरकार की "मेक इन इंडिया" और "एक्सपोर्ट प्रमोशन" नीतियों पर असर पड़ सकता है।
आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत की टैक्स गवर्नेंस के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है।
एक पूर्व आयकर अधिकारी ने कहा, "जब इतनी बड़ी कंपनियां टैक्स चोरी करती हैं तो सरकार की सख्ती न सिर्फ ज़रूरी बल्कि अनिवार्य हो जाती है। यह मैसेज देना जरूरी है कि किसी भी स्तर पर टैक्स चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
दूसरी ओर, लेदर एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी कंपनी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
अब तक मिर्ज़ा इंटरनेशनल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कंपनी के समर्थकों का तर्क है कि "रेड टेप" जैसे ब्रांड ने भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाई है और इरशाद मिर्ज़ा को पद्मश्री जैसे सम्मान भी मिले हैं। ऐसे में, बिना अदालत या जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष निकाले किसी कंपनी पर टैक्स चोरी का ठप्पा लगाना जल्दबाजी हो सकती है।
आयकर विभाग अब कंपनी के निदेशकों — फराज मिर्ज़ा, राशिद मिर्ज़ा और सूजा मिर्ज़ा — से पूछताछ कर रहा है। अगर आरोप पुख्ता साबित हुए तो उन पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 132 और अन्य प्रावधानों के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक भी जा सकता है अगर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एंगल सामने आते हैं।
मिर्ज़ा इंटरनेशनल पर आयकर विभाग की छापेमारी ने भारतीय लेदर इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट सेक्टर को गहराई से झकझोर दिया है। शुरुआती जांच से यह तो साफ हो गया है कि फर्जी बिलिंग और बोगस पर्चेज का खेल लंबे समय से चल रहा था, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने तक ठोस निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।
फिर भी, यह मामला एक स्पष्ट संकेत देता है कि भारत में आर्थिक अपराधों पर शिकंजा कसना अब सरकार की प्राथमिकता है। और अगर यह साबित हो गया कि देश की सबसे बड़ी लेदर कंपनी टैक्स चोरी में लिप्त थी, तो यह भारतीय कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए सबसे बड़ा सबक होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।