मुज़फ़्फ़रनगर में रोहन राठी हत्याकांड की जांच से असंतुष्ट भाकियू और ग्रामीण एसएसपी कार्यालय पहुंचे। निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग उठी। पुलिस का नया आधिकारिक पक्ष अभी उपलब्ध नहीं है।
📍 मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 21 अक्टूबर 2026
✍️Wasi Siddiqui
इंसाफ की मांग लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे किसान
मुज़फ़्फ़रनगर में रोहन राठी हत्याकांड की जांच को लेकर परिवार और ग्रामीणों की नाराज़गी बुधवार, 21 अक्टूबर को प्रदर्शन के रूप में सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसान और ग्रामीण एसएसपी कार्यालय पहुंचे। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और परिवार की आपत्तियों का जवाब दिया जाए। प्रदर्शन में सीबीआई जांच की मांग भी उठी है।
वाहनों की एंट्री पर नोकझोंक की सूचना
प्राप्त स्थानीय विवरण के अनुसार, प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से कार्यालय पहुंच रहे थे। वाहनों को परिसर के अंदर जाने से रोकने पर किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक की सूचना है।
इस विवरण की स्वतंत्र पुष्टि और घटना पर पुलिस का ताज़ा आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे हिंसक झड़प या पुलिस कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जांच से परिवार की नाराज़गी बरकरार
शाह टाइम्स की पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, पुरकाजी क्षेत्र के हरेटी गांव निवासी रोहन राठी का शव 24 सितंबर को गांव के पास खेत में मिला था। उनके पिता विवेक राठी ग्राम प्रधान हैं। पुलिस ने मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा करने का दावा किया था। परिवार ने जांच के कुछ पहलुओं पर आपत्तियां उठाईं।
प्रमुख तथ्य और उपलब्ध जानकारी
• 24 सितंबर को रोहन का शव मिलने की जानकारी पूर्व रिपोर्टिंग में दर्ज है।
• पुलिस ने 2 आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी का दावा किया था। गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।
• परिवार की आपत्तियों के बाद एसपी सिटी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित हुई।
• 18 अक्टूबर को विशेषज्ञ टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण और सीन रीक्रिएशन किया।
• 21 अक्टूबर के प्रदर्शन में निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग सामने आई है।
पुलिस का पूर्व पक्ष और परिवार की आपत्तियां
पूर्व प्रकाशित विवरण में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिलने और रोहन का सामान बरामद होने का दावा किया था। परिवार की मांग रही है कि घटना से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की गहन पड़ताल हो।
उपलब्ध सामग्री में आज के प्रदर्शन पर पुलिस का नया लिखित बयान नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के सत्यापित शब्दशः बयान उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां कोई प्रत्यक्ष उद्धरण शामिल नहीं किया गया है।
एसआईटी और विशेषज्ञ टीमों की पड़ताल
शाह टाइम्स की पूर्व रिपोर्ट में एसआईटी अध्यक्ष के अतिरिक्त 5 सदस्यों का उल्लेख है। इस विवरण के अनुसार दल में कुल 6 अधिकारी शामिल हैं। हालांकि गठन का मूल आदेश इस सत्यापन में उपलब्ध नहीं हुआ।
18 अक्टूबर की घटनास्थल जांच संबंधी रिपोर्टिंग के मुताबिक, मेडिकोलीगल और साइबर विशेषज्ञों ने एसआईटी के साथ सीन रीक्रिएशन किया। इसका उद्देश्य घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करना था। इस कार्रवाई से किसी नए निष्कर्ष की पुष्टि अपने आप नहीं होती।
तारीखों से समझें घटनाक्रम
• 24 सितंबर 2026: रोहन का शव मिलने की जानकारी।
• 25 सितंबर 2026: पूर्व रिपोर्टिंग के अनुसार 2 आरोपियों की गिरफ्तारी।
• 18 अक्टूबर 2026: घटनास्थल पर विशेषज्ञ टीमों की जांच और सीन रीक्रिएशन।
• 21 अक्टूबर 2026: एसएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन और जांच संबंधी मांगें।
आगे किन जवाबों का इंतज़ार
अब एसआईटी की जांच में सामने आने वाले निष्कर्ष और परिवार की आपत्तियों पर पुलिस का जवाब अहम होगा। उपलब्ध सामग्री में सीबीआई जांच मंजूर होने, मामला हस्तांतरित होने या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट जारी होने की पुष्टि नहीं मिली है।
प्रदर्शन के बाद प्रशासन और परिवार के बीच किसी सहमति की भी पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसकी आधिकारिक जानकारी आने पर रिपोर्ट अपडेट की जानी चाहिए।
जांच और जवाबदेही पर निगाह
रोहन राठी मामले में परिवार की असंतुष्टि सार्वजनिक प्रदर्शन तक पहुंची है। आगे की रिपोर्टिंग में पुलिस के दावों, परिवार की आपत्तियों और जांच से पुष्ट तथ्यों को स्पष्ट रूप से अलग रखना ज़रूरी है। किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगा।
पारदर्शिता से जुड़े सवाल
इस मामले में प्रमुख सवाल जांच पर परिवार के भरोसे का है। परिवार की आपत्तियों और एसआईटी गठन का उल्लेख पहले से उपलब्ध रिपोर्टिंग में है। विशेषज्ञ टीमों की पड़ताल जांच का एक चरण है, अंतिम नतीजा नहीं।
संपादकीय दृष्टि से प्रशासन के जवाब में 3 बातें अहम होंगी। परिवार के किन सवालों की जांच हुई, किन पहलुओं की पड़ताल बाकी है और वैज्ञानिक साक्ष्यों से क्या स्थापित हुआ। प्रदर्शन अपने आप पुलिस की जांच को गलत साबित नहीं करता। पुलिस का खुलासा भी न्यायिक परीक्षण का विकल्प नहीं है।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।