टेक्नोलॉजी की दुनिया में हर दिन कुछ नया होता है, लेकिन जब एलन मस्क कोई नया प्रयोग करते हैं, तो चर्चा और विवाद दोनों अनिवार्य हो जाते हैं। हाल ही में उनकी xAI कंपनी द्वारा विकसित GrokAI में "Imagine" नामक Text-to-Video फीचर का ऐलान हुआ है। यह तकनीक उपयोगकर्ताओं को सिर्फ टेक्स्ट कमांड देकर वीडियो बनाने की सुविधा देती है। हालांकि, इस इनोवेशन के साथ-साथ नैतिक और सामाजिक चिंताएं भी गहराने लगी हैं।
GrokAI का "Imagine" फीचर एक टेक्स्ट-टू-वीडियो जनरेशन टूल है, जिसे X प्रीमियम यूज़र्स के लिए बीटा वर्जन में लॉन्च किया गया है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता केवल एक वाक्य या विचार लिखकर उस पर आधारित 6 सेकेंड तक का वीडियो क्लिप बना सकते हैं। इस फीचर को मस्क ने "Imagine" नाम दिया है, जो कि इसकी कार्यप्रणाली को स्पष्ट करता है — यूज़र की कल्पना पर आधारित वीडियो निर्माण।
यह फीचर Grok के नवीनतम LLM (Large Language Model) पर आधारित है, जिससे वीडियो की क्वालिटी और विषय-वस्तु में सुधार संभव है। यह AI क्षेत्र में Google के Veo3 और OpenAI के Sora जैसे मौजूदा खिलाड़ियों को सीधी चुनौती देता है।
जहां एक ओर Imagine फीचर की तारीफ हो रही है, वहीं "Spicy Mode" नामक इसके विशेष फीचर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मोड में उपयोगकर्ता कथित रूप से कुछ अधिक 'स्पाइसी' यानी बोल्ड और वयस्क कंटेंट आधारित 6-सेकंड वीडियो क्लिप्स बना सकते हैं। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, xAI के कर्मचारी मति रॉय द्वारा किए गए एक पोस्ट में ऐसे वीडियो उदाहरण सामने आए जिसमें एलियन और आदिवासी महिलाओं के चित्रण से जुड़े क्लिप्स शामिल थे। बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर हलचल मच चुकी थी।
GrokAI के Imagine फीचर को लेकर बड़ी संख्या में यूज़र्स और डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि यह तकनीक ग़लत हाथों में पड़कर अश्लील, आपत्तिजनक और फेक वीडियो के निर्माण में इस्तेमाल की जा सकती है। AI आधारित इमेज टूल्स पहले ही फेस स्वैप और फेक न्यूडिटी जैसे विवादों में घिर चुके हैं। ऐसे में वीडियो फीचर का दुरुपयोग गंभीर सामाजिक और कानूनी संकट खड़ा कर सकता है।
Evie नाम की एक महिला उपयोगकर्ता ने US Today को बताया कि उसके सेल्फी को एक AI चैटबॉट ने अश्लील वीडियो क्लिप में बदल दिया था। अगर यही काम अब वीडियो के जरिए भी संभव हो गया, तो व्यक्तिगत गरिमा और निजता की रक्षा करना और मुश्किल हो जाएगा।
एलन मस्क ने अपने X हैंडल से Imagine फीचर की घोषणा करते हुए इसे AI की अगली क्रांति बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह फीचर रचनात्मकता को नई दिशा देगा और कंटेंट निर्माण को लोकतांत्रिक बनाएगा। हालांकि, उन्होंने Spicy Mode के आलोचकों को सीधे जवाब नहीं दिया है।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि Imagine फीचर केवल X प्रीमियम यूज़र्स को ही बीटा वर्जन में उपलब्ध कराया जाएगा और वह भी चयनित यूज़र्स को ही। इसका उद्देश्य संभावित दुरुपयोग को सीमित करना है। इसके अलावा, प्लेटफ़ॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन और रिपोर्टिंग सिस्टम को और सख्त बनाया जा रहा है।
AI और डिजिटल मीडिया के जानकारों का मानना है कि टेक्स्ट-टू-वीडियो तकनीक भविष्य का अहम हिस्सा होगी। लेकिन यदि इसमें सख्त मॉडरेशन न हो तो यह गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकती है। भारत समेत कई देशों में अब ऐसे AI फीचर्स पर निगरानी रखने की मांग उठ रही है।
डॉ. नंदिनी राय, जो एक डिजिटल नीति विशेषज्ञ हैं, कहती हैं,
"AI टेक्नोलॉजी अगर बिना एथिकल गाइडलाइन्स के लॉन्च होती है, तो समाज में अशांति और शोषण की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।"
वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक पर प्रतिबंध नहीं बल्कि शिक्षित उपयोग जरूरी है।
Elon Musk का Imagine फीचर टेक्स्ट से वीडियो जेनरेट करने के मामले में Google के Gemini Veo3 और OpenAI के Sora को सीधी टक्कर देता है। हालांकि, जहां Sora अभी सीमित उपयोग के लिए है और Google का Veo3 शोध आधारित वीडियो आउटपुट देता है, वहीं Grok Imagine का Spicy Mode इसे काफी कंट्रोवर्शियल बनाता है।
फीचर
Sora (OpenAI)
Veo3 (Google)
Grok Imagine (xAI)
बीटा एक्सेस
GrokAI का Imagine फीचर तकनीकी दृष्टि से एक बड़ी छलांग है। यह न केवल वीडियो निर्माण को सरल और सुलभ बनाएगा, बल्कि क्रिएटिव इंडस्ट्री में नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा। लेकिन इसका Spicy Mode और यूज़र के हाथ में इतनी शक्तिशाली तकनीक देना, बिना पर्याप्त नियंत्रण और रेगुलेशन के, खतरनाक हो सकता है।
AI का यह युग रचनात्मकता और रेखाओं के बीच संतुलन मांगता है। मस्क की यह टेक्नोलॉजी जहां एक ओर संभावनाओं से भरपूर है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल नैतिकता और निजी सुरक्षा को लेकर गहन प्रश्न खड़े करती है।
कड़ी मॉडरेशन नीतियां – सभी AI जनरेटेड वीडियो पर सख्त मॉडरेशन लागू होनी चाहिए।
कानूनी फ्रेमवर्क – भारत समेत सभी देशों को टेक्स्ट-टू-वीडियो टूल्स पर नियम बनाना चाहिए।
यूज़र शिक्षा – उपयोगकर्ताओं को टेक्नोलॉजी का नैतिक उपयोग सिखाया जाना चाहिए।
ऑडिट सिस्टम – ऐसे फीचर्स के लिए स्वतंत्र ऑडिट सिस्टम अनिवार्य होना चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।