रूस ने 407 ड्रोन और 45 मिसाइलों से यूक्रेन पर तीन घंटे में जबरदस्त पलटवार किया। कीव समेत कई शहरों में तबाही के बाद ज़ेलेंस्की ने शांति की अपील की। जानिए इस हमले के पीछे की रणनीति और रूस की 'अस्तित्व की लड़ाई' की असली वजह।
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6 जून 2025 की सुबह रूस-यूक्रेन युद्ध के इतिहास में एक और वीभत्स अध्याय जोड़ गई। रूस ने यूक्रेन के विभिन्न शहरों पर एक साथ 407 ड्रोन और 45 क्रूज व बैलेस्टिक मिसाइलें दागीं। केवल तीन घंटे में हुई इस कार्रवाई में कीव समेत कई शहरों को नुकसान पहुंचा, तीन नागरिकों की मौत हुई और 49 लोग घायल हुए। हालांकि यूक्रेन ने दावा किया कि उसने अधिकांश हमलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, लेकिन संपत्ति और ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
यह हमला सीधे तौर पर एक जून को यूक्रेनी सेना द्वारा रूसी एयरबेस पर किए गए ड्रोन हमलों का जवाब माना जा रहा है। उन हमलों में रूस के न्यूक्लियर-कैपेबल एयरक्राफ्ट को क्षति पहुंचाई गई थी। पुतिन ने पहले ही इस बात का संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक टेलीफोन वार्ता में दे दिया था कि प्रतिक्रिया ‘निर्धारित’ होगी। क्रेमलिन ने इस कार्रवाई को रूस के "अस्तित्व की लड़ाई" का हिस्सा बताया है।
रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह हमला यूक्रेन के "आतंकी कृत्यों" के जवाब में किया गया, और इसमें सभी "निर्धारित लक्ष्यों" को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। बयान में यह भी कहा गया कि हमले ज़मीन, आसमान और समुद्री प्लेटफॉर्म से किए गए — यह दर्शाता है कि रूस अब मल्टी-डायमेंशनल युद्ध रणनीति पर चल रहा है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस हमले को "मानवता के खिलाफ युद्ध" करार दिया और पश्चिमी देशों से रूस पर तत्काल दबाव बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रूस शांति नहीं, नियंत्रण चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस की शांति वार्ता की शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं — जैसे यूक्रेन का नाटो से अलग रहना, चार क्षेत्रों से सेना हटाना और पश्चिमी सैन्य सहयोग समाप्त करना।
हाल ही में तुर्किए में हुई शांति वार्ता एक बार फिर निष्फल रही। रूस की 'अस्तित्ववादी' रणनीति अब राजनयिक प्रयासों को और जटिल बना रही है। अमेरिका और तुर्किए जैसे देशों की मध्यस्थता की कोशिशें रूसी कड़े रुख के सामने ठंडी पड़ती दिख रही हैं।
उधर, पुतिन और ट्रंप के बीच ईरान के परमाणु मसले पर भी चर्चा हुई, जिसमें ट्रंप ने पुतिन से सहयोग मांगा — यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय समीकरण भी इस युद्ध को प्रभावित कर रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल दो देशों के बीच सीमित संघर्ष नहीं रह गया है। यह भू-राजनीतिक शीत युद्ध का प्रतीक बन चुका है, जिसमें नाटो, यूरोपीय संघ और अमेरिका की भागीदारी बढ़ती जा रही है। अगर स्थिति पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह संघर्ष वैश्विक संकट में तब्दील हो सकता है — जिससे ऊर्जा आपूर्ति, खाद्यान्न सुरक्षा और सामरिक स्थिरता सभी प्रभावित होंगे।
इस युद्ध में अब सवाल यह नहीं रहा कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि क्या दुनिया शांति को प्राथमिकता देगी या अस्तित्व की लड़ाई में और अधिक खून-खराबा होगा?
यूक्रेन जहां अपने क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए खड़ा है, वहीं रूस इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है। ऐसे में अगर वैश्विक शक्तियाँ समय रहते प्रभावी और निष्पक्ष मध्यस्थता नहीं करतीं, तो मानवता को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।