1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भाजपा ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। पार्टी ने मांग की है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े सभी लंबित हत्या मामलों की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
📍 श्रीनगर
📰 02 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
सरला भट हत्या मामला: तीन दशक बाद जांच में नई प्रगति
1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या से जुड़े मामले में हाल ही में दाखिल चार्जशीट ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों की जांच को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे न्याय प्रक्रिया की दिशा में अहम कदम बताते हुए सभी लंबित आतंकी हत्याओं की व्यापक जांच की मांग उठाई है।
भाजपा का कहना है कि आतंकवाद के दौरान हुई हर हत्या के पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और जांच किसी एक मामले तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
भाजपा ने क्या कहा
जम्मू-कश्मीर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा कि सरला भट केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है, लेकिन अंतिम न्याय तभी माना जाएगा जब सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
उन्होंने राज्य में आतंकवाद से जुड़े अन्य अनसुलझे हत्या मामलों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।
चार्जशीट में क्या है
जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने इस मामले में 700 से अधिक पृष्ठों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। इसमें प्रतिबंधित संगठन जेकेएलएफ से जुड़े कई लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार कुछ नामजद आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक आरोपी के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में होने की जानकारी सामने आई है। मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पुराने मामलों की जांच पर फिर बहस
इस घटनाक्रम के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के दौर से जुड़े लंबित मामलों की जांच को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का मानना है कि वर्षों पुराने मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि इतने लंबे समय बाद साक्ष्य जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर आपराधिक मामलों में समय बीत जाने के बावजूद यदि पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हों तो जांच और मुकदमा चलाया जा सकता है।
आगे क्या
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। साथ ही यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां अन्य लंबित मामलों में भी इसी तरह की कार्रवाई करती हैं या नहीं।
सरला भट हत्या मामला केवल एक पुराने अपराध की जांच नहीं बल्कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की लंबी प्रक्रिया का प्रतीक बन गया है। आने वाले समय में न्यायालय की कार्यवाही और जांच एजेंसियों के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।