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रूस की सेना में भर्ती भारतीयों युवाओं को लेकर गंभीर खुलासे

None 2026-01-02 22:03:32
रूस की सेना में भर्ती भारतीयों युवाओं को लेकर गंभीर खुलासे

रूस–यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों का मामला सामने


कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर गुमराह कर रूस–यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। कुछ युवाओं की मौत, कुछ की वापसी और कई के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।


विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार रूस की सेना में भर्ती हुए भारतीय नागरिकों के मामलों में मौत, वापसी और लापता होने की पुष्टि हुई है। परिजन और लौटे नागरिक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

📍 New Delhi ✍️ Asif Khan 

रूस–यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों ने भारत में चिंता बढ़ा दी है। अलग–अलग राज्यों से जुड़े कई युवाओं के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों को विदेश में काम और पढ़ाई के वादों के जरिए बुलाया गया। बाद में उन्हें कथित तौर पर सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और युद्ध क्षेत्र में तैनात कर दिया गया।

कथित भर्ती प्रक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ युवाओं को कहा गया कि उन्हें विदेश में बेहतर नौकरी, वेतन और सुरक्षित काम मिलेगा। दस्तावेज पूरे कराने के बाद उन्हें रूस ले जाया गया। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और संपर्क के साधन सीमित कर दिए गए। कुछ लौटे नागरिकों ने बताया कि मना करने पर कानूनी कार्रवाई और लंबी जेल की धमकी दी गई।

https://youtube.com/shorts/2Uds_-4-ukU?si=L_RPGeEpN7SP_qHP

सीमित प्रशिक्षण और फ्रंट लाइन

एक मामले में एक युवक ने बताया कि उसे केवल कुछ दिनों का सीमित प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उसे सीधे फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। युवक के अनुसार, हालात इतने गंभीर थे कि उसने यूक्रेनी बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसका कहना था कि वह युद्ध जारी रखने के बजाय जेल जाना बेहतर समझता है।

विदेश मंत्रालय की स्थिति

भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले बताया था कि लगभग 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किए जाने की आशंका जताई गई थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इनमें से 119 नागरिक भारत लौट चुके हैं। 26 लोगों की मौत की सूचना मिली है, जबकि 7 नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। शेष करीब 50 नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया चल रही है।

मौत की पुष्टि और दस्तावेज

रूस की सेना में यूक्रेन के साथ युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले भारतीय युवाओं में पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू से जुड़े नागरिक शामिल हैं। पंजाब से तीन युवाओं की मौत की पुष्टि की गई है। लौटे नागरिक जगदीप कुमार ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय में ऐसे दस्तावेज पेश किए, जिनमें रूसी अधिकारियों द्वारा मौत की पुष्टि का उल्लेख था।

परिजनों की प्रतीक्षा

मृतकों के माता–पिता और परिवार लंबे समय तक अपने बेटों की सलामती की उम्मीद करते रहे। कई परिवारों को महीनों बाद यह जानकारी मिली कि उनके बच्चे युद्ध में मारे गए हैं। परिजनों का कहना है कि समय पर सूचना न मिलने से उनका मानसिक तनाव और बढ़ गया।

लापता नागरिकों की जानकारी

रिपोर्टों के मुताबिक, चार भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें दीपक, योगेश्वर प्रसाद, अजहरुद्दीन खान और रामचंद्र शामिल हैं। उनके परिवारों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से लगातार संपर्क बनाए रखा है।

पंजाब के मामलों पर फोकस

जगदीप कुमार के अनुसार, रूस की सेना में मारे गए 10 भारतीयों में अमृतसर के तेजपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के अरविंद कुमार, धीरेंद्र कुमार, विनोद यादव और योगेंद्र यादव सहित अन्य लोग शामिल हैं। इन मामलों में स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार के स्तर पर जानकारी जुटाई गई।

भाई की तलाश में रूस

जगदीप ने बताया कि उनके भाई मनदीप के बारे में कोई सूचना न मिलने पर उन्होंने खुद रूस जाने का फैसला किया। राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल की मदद से उन्हें टिकट और एक आधिकारिक पत्र मिला। उन्होंने दो बार रूस की यात्रा की और वहां फंसे भारतीयों, खासकर पंजाबी युवाओं, की तलाश की।

भाषा और संपर्क की कठिनाई

रूस में रहते हुए जगदीप को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों से संवाद करना मुश्किल था। इसके बावजूद उन्होंने अलग–अलग स्थानों पर जाकर जानकारी जुटाई और दस्तावेज एकत्र किए।

दूसरी यात्रा और जानकारी

दूसरी यात्रा में जगदीप करीब दो महीने रूस में रहे। इस दौरान उन्होंने कई परिवारों से संपर्क किया और विभिन्न स्रोतों से सूचनाएं इकट्ठी कीं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में स्थिति स्पष्ट होने में लंबा समय लगा।

संत सीचेवाल की भूमिका

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने शुरू से ही पीड़ित परिवारों की मदद की। उन्होंने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर रूस की सेना में फंसे भारतीय युवाओं की सुरक्षित वापसी की मांग की। उनकी पहल से कुछ नागरिकों की वापसी संभव हुई।

केंद्र सरकार से अपील

संत सीचेवाल ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह रूस की सेना में भारतीय युवाओं की भर्ती पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन युवाओं की मौत हो चुकी है, उनके शव भारत लाने में सरकार सहायता करे ताकि परिवार अपने धार्मिक और सामाजिक रीति–रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें।

एजेंटों पर कार्रवाई की मांग

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ ट्रैवल एजेंटों ने युवाओं को झांसा देकर विदेश भेजा। संत सीचेवाल और परिजनों ने मांग की है कि ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

आधिकारिक प्रयास

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह रूस के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने और शेष फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

वर्तमान स्थिति

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट चुके हैं, कुछ की मौत की पुष्टि हुई है और कुछ अब भी लापता हैं। सरकार और परिजन दोनों स्तरों पर प्रयास जारी हैं।

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रूस–यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों का मामला सामने


कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर गुमराह कर रूस–यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। कुछ युवाओं की मौत, कुछ की वापसी और कई के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।


विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार रूस की सेना में भर्ती हुए भारतीय नागरिकों के मामलों में मौत, वापसी और लापता होने की पुष्टि हुई है। परिजन और लौटे नागरिक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

📍 New Delhi ✍️ Asif Khan 

रूस–यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों ने भारत में चिंता बढ़ा दी है। अलग–अलग राज्यों से जुड़े कई युवाओं के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों को विदेश में काम और पढ़ाई के वादों के जरिए बुलाया गया। बाद में उन्हें कथित तौर पर सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और युद्ध क्षेत्र में तैनात कर दिया गया।

कथित भर्ती प्रक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ युवाओं को कहा गया कि उन्हें विदेश में बेहतर नौकरी, वेतन और सुरक्षित काम मिलेगा। दस्तावेज पूरे कराने के बाद उन्हें रूस ले जाया गया। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और संपर्क के साधन सीमित कर दिए गए। कुछ लौटे नागरिकों ने बताया कि मना करने पर कानूनी कार्रवाई और लंबी जेल की धमकी दी गई।

https://youtube.com/shorts/2Uds_-4-ukU?si=L_RPGeEpN7SP_qHP

सीमित प्रशिक्षण और फ्रंट लाइन

एक मामले में एक युवक ने बताया कि उसे केवल कुछ दिनों का सीमित प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उसे सीधे फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। युवक के अनुसार, हालात इतने गंभीर थे कि उसने यूक्रेनी बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसका कहना था कि वह युद्ध जारी रखने के बजाय जेल जाना बेहतर समझता है।

विदेश मंत्रालय की स्थिति

भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले बताया था कि लगभग 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किए जाने की आशंका जताई गई थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इनमें से 119 नागरिक भारत लौट चुके हैं। 26 लोगों की मौत की सूचना मिली है, जबकि 7 नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। शेष करीब 50 नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया चल रही है।

मौत की पुष्टि और दस्तावेज

रूस की सेना में यूक्रेन के साथ युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले भारतीय युवाओं में पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू से जुड़े नागरिक शामिल हैं। पंजाब से तीन युवाओं की मौत की पुष्टि की गई है। लौटे नागरिक जगदीप कुमार ने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय में ऐसे दस्तावेज पेश किए, जिनमें रूसी अधिकारियों द्वारा मौत की पुष्टि का उल्लेख था।

परिजनों की प्रतीक्षा

मृतकों के माता–पिता और परिवार लंबे समय तक अपने बेटों की सलामती की उम्मीद करते रहे। कई परिवारों को महीनों बाद यह जानकारी मिली कि उनके बच्चे युद्ध में मारे गए हैं। परिजनों का कहना है कि समय पर सूचना न मिलने से उनका मानसिक तनाव और बढ़ गया।

लापता नागरिकों की जानकारी

रिपोर्टों के मुताबिक, चार भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें दीपक, योगेश्वर प्रसाद, अजहरुद्दीन खान और रामचंद्र शामिल हैं। उनके परिवारों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से लगातार संपर्क बनाए रखा है।

पंजाब के मामलों पर फोकस

जगदीप कुमार के अनुसार, रूस की सेना में मारे गए 10 भारतीयों में अमृतसर के तेजपाल सिंह, उत्तर प्रदेश के अरविंद कुमार, धीरेंद्र कुमार, विनोद यादव और योगेंद्र यादव सहित अन्य लोग शामिल हैं। इन मामलों में स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार के स्तर पर जानकारी जुटाई गई।

भाई की तलाश में रूस

जगदीप ने बताया कि उनके भाई मनदीप के बारे में कोई सूचना न मिलने पर उन्होंने खुद रूस जाने का फैसला किया। राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल की मदद से उन्हें टिकट और एक आधिकारिक पत्र मिला। उन्होंने दो बार रूस की यात्रा की और वहां फंसे भारतीयों, खासकर पंजाबी युवाओं, की तलाश की।

भाषा और संपर्क की कठिनाई

रूस में रहते हुए जगदीप को भाषा की समस्या का सामना करना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों से संवाद करना मुश्किल था। इसके बावजूद उन्होंने अलग–अलग स्थानों पर जाकर जानकारी जुटाई और दस्तावेज एकत्र किए।

दूसरी यात्रा और जानकारी

दूसरी यात्रा में जगदीप करीब दो महीने रूस में रहे। इस दौरान उन्होंने कई परिवारों से संपर्क किया और विभिन्न स्रोतों से सूचनाएं इकट्ठी कीं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में स्थिति स्पष्ट होने में लंबा समय लगा।

संत सीचेवाल की भूमिका

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने शुरू से ही पीड़ित परिवारों की मदद की। उन्होंने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर रूस की सेना में फंसे भारतीय युवाओं की सुरक्षित वापसी की मांग की। उनकी पहल से कुछ नागरिकों की वापसी संभव हुई।

केंद्र सरकार से अपील

संत सीचेवाल ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह रूस की सेना में भारतीय युवाओं की भर्ती पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन युवाओं की मौत हो चुकी है, उनके शव भारत लाने में सरकार सहायता करे ताकि परिवार अपने धार्मिक और सामाजिक रीति–रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें।

एजेंटों पर कार्रवाई की मांग

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ ट्रैवल एजेंटों ने युवाओं को झांसा देकर विदेश भेजा। संत सीचेवाल और परिजनों ने मांग की है कि ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

आधिकारिक प्रयास

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह रूस के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने और शेष फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

वर्तमान स्थिति

अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट चुके हैं, कुछ की मौत की पुष्टि हुई है और कुछ अब भी लापता हैं। सरकार और परिजन दोनों स्तरों पर प्रयास जारी हैं।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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