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क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार? Indo-Pak Ceasefire के दावों पर उठे सवाल

None 2025-08-01 10:00:12
क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार? Indo-Pak Ceasefire के दावों पर उठे सवाल

व्हाइट हाउस का दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रोका

भारत ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों को बताया झूठा, अमेरिका अड़ा


व्हाइट हाउस ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग दोहराई है। भारत-पाक युद्ध रोकने के दावे पर भारत ने अपनी स्थिति फिर साफ की।

क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार? अमेरिका के दावे और भारत की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली/वॉशिंगटन,(Shah Times) । अमेरिका की राजनीति में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में दावा किया कि ट्रंप ने दुनिया भर में छह बड़े संघर्षों को रोका है—औसतन हर महीने एक युद्धविराम या शांति समझौता।

इन दावों में सबसे बड़ा और विवादास्पद पहलू रहा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति को रोकने का दावा। जबकि भारत सरकार ने इस पर दो टूक कहा है कि यह भारत की सैन्य कार्रवाई और रणनीति का नतीजा था, न कि किसी अमेरिकी हस्तक्षेप का।

https://twitter.com/WhiteHouse/status/1950970896463622527?t=Carz1o9PtQoTXAfGCkAv_w&s=19

छह महीनों में छह युद्धविराम: अमेरिका के दावे

कैरोलिन लेविट ने मीडिया को बताया कि “पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती छह महीनों में छह गंभीर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में सफलता पाई।” उन्होंने जिन संघर्षों का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:

थाईलैंड-कंबोडिया युद्धविराम

इजराइल-ईरान टकराव में मध्यस्थता

रवांडा और कांगो संघर्ष

भारत-पाकिस्तान युद्ध की आशंका को टालना

सर्बिया-कोसोवो टकराव में हस्तक्षेप

मिस्र-इथियोपिया विवाद में संवाद

इनमें से कुछ घटनाओं के प्रमाण और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलना अभी बाकी है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने इन प्रयासों को ट्रंप की वैश्विक शांति के लिए भूमिका के तौर पर पेश किया है।

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भारत-पाक युद्ध रोकने का दावा

लेविट ने एक बार फिर दोहराया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका।” उनका इशारा मई महीने की उन घटनाओं की ओर था जब जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी।

इस संदर्भ में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की पहल पर दोनों देश युद्ध से पीछे हटे, लेकिन यह दावा भारत सरकार बार-बार खारिज कर चुकी है।

भारत की स्थिति: "हमने पाकिस्तान को मजबूर किया"

भारत ने अमेरिका के दावे पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी युद्धविराम का कारण केवल भारत की जवाबी कार्रवाई थी, जिसके बाद पाकिस्तान ने पहल की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में एक बयान में बताया कि—

“9 मई की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मैं अपनी सेना के साथ रणनीतिक बैठक में व्यस्त था। बाद में मैंने बात की, और उन्हें साफ कहा कि अगर पाकिस्तान हमला करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत ने अमेरिका के किसी हस्तक्षेप के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के तहत निर्णय लिए।

ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 7 मई को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की तरफ से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि किसी भी हमले का बड़ा जवाब दिया जाएगा।

DGMO स्तर की बातचीत के बाद ही सीजफायर पर सहमति बनी। भारत के मुताबिक, यह पहल पाकिस्तान की तरफ से आई थी क्योंकि वह भारत की सैन्य प्रतिक्रिया से हतप्रभ था।

ट्रंप की शांति नीति और आलोचना

डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल कूटनीतिक दृष्टि से विवादों से भरा रहा है, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक नॉन-कन्वेंशनल वैश्विक नेता के रूप में पेश करते हैं। उन्होंने कई बार किम जोंग उन, व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं के साथ सीधे संवाद की कोशिश की।

हालांकि आलोचक कहते हैं कि उनकी शांति की रणनीति अक्सर घरेलू राजनीति या चुनावी प्रचार का हिस्सा रही है। नोबेल शांति पुरस्कार जैसे विषयों पर ट्रंप की मांग या दावों को कई बार प्रचारात्मक और सतही करार दिया गया है।

क्या ट्रंप नोबेल के हकदार हैं?

नोबेल शांति पुरस्कार देने का निर्णय नोबेल कमिटी लेती है, जिसमें किसी देश की सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता। अगर ट्रंप को वाकई छह बड़े संघर्षों को रोकने में सफलता मिली है, तो यह ज़रूर उनके पक्ष में जाएगा।

हालांकि, भारत-पाक जैसे मामलों में जब खुद संबंधित देश ट्रंप के दावों को खारिज कर चुके हैं, तब ऐसे दावों पर भरोसा करना कठिन है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की कथनी और तथ्य के बीच एक बड़ा अंतर है।

निष्कर्ष: शांति के प्रयास या प्रचार की राजनीति?

डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना या नहीं—यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन भारत जैसे मामलों में उनकी ओर से बार-बार किए जा रहे युद्धविराम के दावे न सिर्फ विवादास्पद हैं, बल्कि कूटनीतिक रूप से भारत के रुख के खिलाफ भी हैं।

भारत ने साफ कहा है कि वह अपनी सुरक्षा नीतियों पर किसी विदेशी दबाव में नहीं चलता। ऐसे में अमेरिकी बयान चाहे जितने भी प्रचारात्मक हों, भारत का स्टैंड स्पष्ट, मजबूत और आत्मनिर्भर रहा है।

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व्हाइट हाउस का दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रोका

भारत ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों को बताया झूठा, अमेरिका अड़ा


व्हाइट हाउस ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग दोहराई है। भारत-पाक युद्ध रोकने के दावे पर भारत ने अपनी स्थिति फिर साफ की।

क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार? अमेरिका के दावे और भारत की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली/वॉशिंगटन,(Shah Times) । अमेरिका की राजनीति में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में दावा किया कि ट्रंप ने दुनिया भर में छह बड़े संघर्षों को रोका है—औसतन हर महीने एक युद्धविराम या शांति समझौता।

इन दावों में सबसे बड़ा और विवादास्पद पहलू रहा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति को रोकने का दावा। जबकि भारत सरकार ने इस पर दो टूक कहा है कि यह भारत की सैन्य कार्रवाई और रणनीति का नतीजा था, न कि किसी अमेरिकी हस्तक्षेप का।

https://twitter.com/WhiteHouse/status/1950970896463622527?t=Carz1o9PtQoTXAfGCkAv_w&s=19

छह महीनों में छह युद्धविराम: अमेरिका के दावे

कैरोलिन लेविट ने मीडिया को बताया कि “पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती छह महीनों में छह गंभीर अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में सफलता पाई।” उन्होंने जिन संघर्षों का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:

थाईलैंड-कंबोडिया युद्धविराम

इजराइल-ईरान टकराव में मध्यस्थता

रवांडा और कांगो संघर्ष

भारत-पाकिस्तान युद्ध की आशंका को टालना

सर्बिया-कोसोवो टकराव में हस्तक्षेप

मिस्र-इथियोपिया विवाद में संवाद

इनमें से कुछ घटनाओं के प्रमाण और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलना अभी बाकी है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने इन प्रयासों को ट्रंप की वैश्विक शांति के लिए भूमिका के तौर पर पेश किया है।

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भारत-पाक युद्ध रोकने का दावा

लेविट ने एक बार फिर दोहराया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका।” उनका इशारा मई महीने की उन घटनाओं की ओर था जब जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी।

इस संदर्भ में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की पहल पर दोनों देश युद्ध से पीछे हटे, लेकिन यह दावा भारत सरकार बार-बार खारिज कर चुकी है।

भारत की स्थिति: "हमने पाकिस्तान को मजबूर किया"

भारत ने अमेरिका के दावे पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी युद्धविराम का कारण केवल भारत की जवाबी कार्रवाई थी, जिसके बाद पाकिस्तान ने पहल की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में एक बयान में बताया कि—

“9 मई की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मैं अपनी सेना के साथ रणनीतिक बैठक में व्यस्त था। बाद में मैंने बात की, और उन्हें साफ कहा कि अगर पाकिस्तान हमला करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत ने अमेरिका के किसी हस्तक्षेप के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के तहत निर्णय लिए।

ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 7 मई को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की तरफ से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि किसी भी हमले का बड़ा जवाब दिया जाएगा।

DGMO स्तर की बातचीत के बाद ही सीजफायर पर सहमति बनी। भारत के मुताबिक, यह पहल पाकिस्तान की तरफ से आई थी क्योंकि वह भारत की सैन्य प्रतिक्रिया से हतप्रभ था।

ट्रंप की शांति नीति और आलोचना

डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल कूटनीतिक दृष्टि से विवादों से भरा रहा है, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक नॉन-कन्वेंशनल वैश्विक नेता के रूप में पेश करते हैं। उन्होंने कई बार किम जोंग उन, व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं के साथ सीधे संवाद की कोशिश की।

हालांकि आलोचक कहते हैं कि उनकी शांति की रणनीति अक्सर घरेलू राजनीति या चुनावी प्रचार का हिस्सा रही है। नोबेल शांति पुरस्कार जैसे विषयों पर ट्रंप की मांग या दावों को कई बार प्रचारात्मक और सतही करार दिया गया है।

क्या ट्रंप नोबेल के हकदार हैं?

नोबेल शांति पुरस्कार देने का निर्णय नोबेल कमिटी लेती है, जिसमें किसी देश की सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता। अगर ट्रंप को वाकई छह बड़े संघर्षों को रोकने में सफलता मिली है, तो यह ज़रूर उनके पक्ष में जाएगा।

हालांकि, भारत-पाक जैसे मामलों में जब खुद संबंधित देश ट्रंप के दावों को खारिज कर चुके हैं, तब ऐसे दावों पर भरोसा करना कठिन है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की कथनी और तथ्य के बीच एक बड़ा अंतर है।

निष्कर्ष: शांति के प्रयास या प्रचार की राजनीति?

डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना या नहीं—यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन भारत जैसे मामलों में उनकी ओर से बार-बार किए जा रहे युद्धविराम के दावे न सिर्फ विवादास्पद हैं, बल्कि कूटनीतिक रूप से भारत के रुख के खिलाफ भी हैं।

भारत ने साफ कहा है कि वह अपनी सुरक्षा नीतियों पर किसी विदेशी दबाव में नहीं चलता। ऐसे में अमेरिकी बयान चाहे जितने भी प्रचारात्मक हों, भारत का स्टैंड स्पष्ट, मजबूत और आत्मनिर्भर रहा है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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