SIR और मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों के बीच राहुल गांधी ने कहा कि ‘संविधान के दुश्मन बेनकाब’ हुए हैं। उन्होंने शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई।
नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026
मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि “संविधान के दुश्मन बेनकाब हो गए हैं। न्याय होगा।” उन्होंने 24 सितंबर को शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की घोषणा भी की।
राहुल गांधी ने यह बयान ऐसे वक्त दिया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित मतभेदों पर राजनीतिक बहस चल रही है। राहुल गांधी की घोषणा उनके पहले के ‘Vote Chori’ आरोपों की कड़ी में देखी जा रही है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में 23 सितंबर को प्रकाशित The Indian Express की एक रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में SIR, मतदाता नाम जोड़ने और हटाने तथा Form 6 में बदलाव जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
यहां एक अहम तथ्य यह है कि इन रिपोर्टों में सामने आए मतभेदों को लेकर चुनाव आयोग ने अलग रुख रखा है। आयोग ने रिपोर्ट में लगाए गए मतभेद के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं और आयुक्तों के सुझाव चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने से जुड़े आंतरिक विमर्श का हिस्सा हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति में कथित आंतरिक असहमति को चुनाव आयोग की आधिकारिक पुष्टि के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
राहुल गांधी ने 24 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि संविधान के दुश्मन बेनकाब हो गए हैं और न्याय होगा। उन्होंने शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जानकारी दी। पोस्ट के साथ #VoteChori का इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले 23 सितंबर को राहुल गांधी ने SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर चुनाव आयोग, बीजेपी और RSS पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इसे संविधान पर हमला बताया था। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की आधिकारिक पुष्टि प्राप्त तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
Special Intensive Revision का मकसद मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करना है। चुनाव आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने के साथ अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जाती है।
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें अंतिम SIR में नाम खोजने, Enumeration Form भरने और नोटिस मिलने की स्थिति में दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं शामिल हैं।
दिल्ली में SIR के Draft Electoral Roll को 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के मुताबिक, जिन पात्र मतदाताओं का नाम Draft Electoral Roll में नहीं है, वे 30 सितंबर 2026 तक दावा और आपत्ति प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
SIR को लेकर विवाद केवल राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच तक सीमित नहीं है। विपक्ष के कई दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। आयोग की वेबसाइट के अनुसार वह लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का प्रशासन करता है।
SIR विवाद में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 का मुद्दा भी सामने आया है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, Form 6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी और इसे हटाने की मांग की थी।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Form 6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल होता है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर Form 6 के जरिए नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
दिल्ली में SIR के तहत Draft Electoral Roll प्रकाशित हो चुका है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, नागरिक अपने नाम को EPIC नंबर, नाम या मोबाइल के जरिए खोज सकते हैं।
यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम Draft Roll में नहीं मिलता है, तो वह Form 6 के जरिए नाम शामिल करने का दावा दाखिल कर सकता है। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार Claims and Objections की अवधि 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक है।
इस प्रक्रिया में नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता का नाम अंतिम रूप से हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। संबंधित मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया में दस्तावेज और जवाब देने का अवसर दिया जाता है।
SIR को लेकर राजनीतिक आरोपों और आयोग के आधिकारिक रुख को अलग-अलग रखना जरूरी है। विपक्षी नेताओं ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कथित अंदरूनी विभाजन की रिपोर्टों को खारिज किया है।
इस विवाद में वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए लिखित आपत्तियों, आयोग के आदेशों, मतदाता सूची के बदलाव और दावों-आपत्तियों के निपटारे के रिकॉर्ड को देखना महत्वपूर्ण होगा।
राहुल गांधी ने 24 सितंबर को शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की है। इसलिए इस समय उनके अगले बयान का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR, कथित चुनावी अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर बताए जा रहे मतभेदों को लेकर नए आरोप या दस्तावेज सामने आते हैं या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा।
SIR को लेकर मौजूदा विवाद तीन स्तरों पर चल रहा है। पहला, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नामों के सत्यापन की प्रक्रिया। दूसरा, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़े रिपोर्टेड दस्तावेज और आपत्तियां। तीसरा, विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव।
राहुल गांधी ने अपने ताजा बयान में इसे संविधान और न्याय से जोड़ते हुए शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया है। फिलहाल उनके आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन दावों की पुष्टि या खंडन के लिए संबंधित दस्तावेज, चुनाव आयोग का आधिकारिक जवाब और आगे सामने आने वाली जानकारी अहम होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।