सम्पूर्ण समाधान दिवस के तहत मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों की शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को समयबद्ध, निष्पक्ष तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुख रहा। यह पहल प्रशासनिक जवाबदेही और जनविश्वास को मज़बूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
📍 : जानसठ, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)
📰 : 06 जुलाई 2026
✍️ : Wasi Siddiqui
## जनसुनवाई को जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश
सम्पूर्ण समाधान दिवस के तहत रविवार को मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों की शिकायतें सुनीं। कार्यक्रम में सहारनपुर मंडल के मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा मौजूद रहे। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर निर्धारित समयसीमा में उसका गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम की शुरुआत मंडलायुक्त को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने से हुई। इसके बाद अधिकारियों ने फरियादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का जायज़ा लिया और संबंधित विभागों से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया।
समाधान दिवस का उद्देश्य क्या है
सम्पूर्ण समाधान दिवस उत्तर प्रदेश सरकार की एक नियमित जनसुनवाई व्यवस्था है, जिसका मक़सद नागरिकों को प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक सीधे अपनी शिकायत पहुंचाने का अवसर देना है। इसका उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसके प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण की निगरानी करना भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाएं तभी प्रभावी साबित होती हैं जब शिकायतों का रिकॉर्ड, फॉलो-अप और जवाबदेही की प्रक्रिया लगातार मज़बूत रहे। केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उनके पालन की भी समीक्षा आवश्यक होती है।
निष्पक्ष जांच और महिला सुरक्षा पर विशेष ज़ोर
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत की मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच की जाए। महिला अपराध से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने और संवेदनशीलता के साथ उनकी जांच पूरी करने पर भी विशेष बल दिया गया।
यह निर्देश ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब प्रशासनिक व्यवस्था में शिकायतों के शीघ्र समाधान और महिला सुरक्षा दोनों ही सार्वजनिक नीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
साइबर अपराध पर बढ़ती चिंता
समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं और कर्मचारियों को साइबर अपराध तथा ऑनलाइन ठगी से बचाव के बारे में भी जागरूक किया। डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर फ्रॉड के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले पूरी सतर्कता बरतें और साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल संबंधित हेल्पलाइन अथवा पुलिस से संपर्क करें।
प्रशासनिक व्यवस्था के सामने चुनौतियां
जनसुनवाई कार्यक्रमों की उपयोगिता व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है, लेकिन इनके सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी रहती हैं। बड़ी संख्या में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, विभागों के बीच समन्वय और आदेशों के वास्तविक अनुपालन की निगरानी प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी रहती है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि शिकायतों की प्रगति सार्वजनिक रूप से ट्रैक की जाए और समय-समय पर समीक्षा हो तो ऐसे कार्यक्रमों की क्रेडिबिलिटी और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सम्पूर्ण समाधान दिवस के बाद मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पौधारोपण किया। अधिकारियों ने कर्मचारियों और उपस्थित लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि पौधारोपण अभियानों की वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रखने की दर पर निर्भर करती है।
आगे की राह
प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि सभी प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता रहेगा। हालांकि किसी भी जनशिकायत प्रणाली की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि नागरिकों को समाधान कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ मिलता है।
यदि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है तो सम्पूर्ण समाधान दिवस केवल औपचारिक जनसुनवाई न रहकर प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मज़बूत करने वाला प्रभावी मंच बन सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।