India
राष्ट्रपति मुर्मु का फिल्मी सितारों को संदेश, “स्टार वही जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं”
Mohammad Naved
•
2026-09-23 13:50:50
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सेलिब्रिटीज से स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह उत्पादों का प्रचार नहीं करने की अपील की। उन्होंने युवाओं पर उनके असर का जिक्र किया।
📍 एकता नगर, गुजरात
🗓️ 23 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
राष्ट्रपति मुर्मु का सितारों को संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्मी सितारों और लोकप्रिय कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर अहम संदेश दिया है। 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में उन्होंने कहा कि कामयाब कलाकारों की बात और उनके व्यवहार का बच्चों और युवाओं पर गहरा असर पड़ता है।
राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों से ऐसे उत्पादों का प्रचार नहीं करने की अपील की, जो लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह हों। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “स्टार वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।” उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया मिली है।
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में दिया संदेश
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में हुआ। राष्ट्रपति मुर्मु ने अलग-अलग श्रेणियों में वर्ष 2024 की फिल्मों और कलाकारों को सम्मान प्रदान किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों की लोकप्रियता और उनके सामाजिक प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब कामयाब कलाकार अनुशासित जीवनशैली के फायदों के बारे में बात करते हैं, तो लाखों बच्चे और युवा उससे प्रभावित होते हैं।
इसी वजह से उन्होंने लोकप्रिय कलाकारों से ऐसे उत्पादों का समर्थन नहीं करने को कहा, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हों। उनका संदेश फिल्मी दुनिया से आगे बढ़कर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सार्वजनिक जिम्मेदारी के सवाल से भी जुड़ता है।
युवाओं पर सेलिब्रिटीज के असर पर जोर
फिल्म कलाकारों की लोकप्रियता आज केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, विज्ञापन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उनकी बात बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने इसी प्रभाव को जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कलाकारों से अपने सार्वजनिक प्रभाव का सकारात्मक इस्तेमाल करने की अपील की। उनके संबोधन का फोकस यह था कि लोकप्रियता के साथ सामाजिक दायित्व भी जुड़ा होता है।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि विज्ञापन में किसी लोकप्रिय चेहरे की मौजूदगी उत्पाद के प्रति उपभोक्ताओं की धारणा को प्रभावित कर सकती है। खास तौर पर युवा दर्शकों के बीच फिल्म कलाकारों की लोकप्रियता व्यापक है।
सोशल मीडिया पर संदेश की चर्चा
राष्ट्रपति के संबोधन के बाद “स्टार वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं” वाला संदेश सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। राष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी इस संदेश को साझा किया गया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया को लेकर अलग-अलग पोस्ट और टिप्पणियां सामने आईं। हालांकि, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को पूरे समाज की राय मानना उचित नहीं होगा। ऑनलाइन प्रतिक्रिया का आकलन करते समय पोस्ट की संख्या, स्रोत और संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है।
महिलाओं की भागीदारी पर भी राष्ट्रपति का जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में केवल सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए फिल्मों का चयन करने वाली ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि हर क्षेत्रीय ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। राष्ट्रपति के मुताबिक किसी भी क्षेत्र में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होने से व्यापक और समग्र मानवीय नजरिया विकसित होता है।
यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कई महिला कलाकारों और फिल्मकर्मियों को सम्मान मिला।
फिल्म इंडस्ट्री के कामगारों का मुद्दा
राष्ट्रपति ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े उन लोगों की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया, जो पर्दे के पीछे काम करते हैं। उन्होंने कामगारों, छोटे कलाकारों, सहायकों और अपने करियर की शुरुआत कर रहे लोगों के लिए सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
फिल्म उद्योग की चमक के पीछे बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारी, सहायक, जूनियर कलाकार और दूसरे श्रमिक काम करते हैं। राष्ट्रपति ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को मान्यता देने और उनके लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा की अपील की।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख सम्मान
समारोह में वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और ममूटी तथा कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म “आर्टिकल 370” को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला।
स्टारडम और विज्ञापन की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति का संदेश ऐसे दौर में आया है जब फिल्मी सितारों के विज्ञापनों को लेकर सार्वजनिक बहस लगातार तेज हुई है। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट में किसी कलाकार की लोकप्रियता उत्पाद के प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
ऐसे में सवाल केवल विज्ञापन की पहुंच तक सीमित नहीं रहता। सार्वजनिक स्वास्थ्य, उपभोक्ता जागरूकता और कलाकारों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बहस का हिस्सा बनते हैं।
हाल के महीनों में कुछ फिल्म कलाकारों से जुड़े पान मसाला और संबंधित विज्ञापनों को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई और कानूनी विवाद भी खबरों में रहे हैं। इन मामलों में संबंधित पक्षों के जवाब और कानूनी प्रक्रिया को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
संदेश का व्यापक संदर्भ
राष्ट्रपति मुर्मु का बयान केवल फिल्म कलाकारों के लिए एक अपील के तौर पर देखा जा सकता है। इसका व्यापक संदर्भ सार्वजनिक जीवन में प्रभावशाली चेहरों की जिम्मेदारी से जुड़ा है।
एक लोकप्रिय कलाकार किसी उत्पाद, जीवनशैली या सामाजिक व्यवहार को लेकर जो संदेश देता है, उसकी पहुंच सामान्य विज्ञापन से अलग हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के प्रचार में सावधानी और उपभोक्ता जागरूकता दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
राष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा की गुणवत्ता को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि देश में बन रही फिल्मों की गुणवत्ता उन्हें भरोसा देती है कि भारतीय सिनेमा वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता के नए मानक स्थापित करेगा।
आगे की बहस किस दिशा में
राष्ट्रपति के संदेश ने फिल्मी सितारों की लोकप्रियता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संबंध को फिर चर्चा में ला दिया है। आगे यह बहस विज्ञापन उद्योग, फिल्म कलाकारों, ब्रांड कंपनियों और नियामक संस्थाओं की भूमिका तक जा सकती है।
फिलहाल राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट है। लोकप्रियता के साथ प्रभाव आता है और प्रभाव के साथ सार्वजनिक जिम्मेदारी का सवाल भी जुड़ता है। “रोशनी फैलाने” वाला उनका संदेश इसी जिम्मेदारी को केंद्र में रखता है।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।