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सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में Anti-Ragging Week की शुरुआत

None • 2025-08-13 20:53:39
सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में Anti-Ragging Week की शुरुआत


पिलखुवा स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में जागरूकता कार्यक्रम, 

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता और रैली से छात्रों में रैगिंग के खिलाफ संकल्प


 

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में एंटी-रैगिंग सप्ताह की शुरुआत, जागरूकता कार्यक्रमों से सुरक्षित और रैगिंग-मुक्त माहौल का संकल्प।

~ हाशिम

हापुड़ (शाह टाइम्स)। पिलखुवा के अनवरपुर स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में एंटी-रैगिंग सप्ताह की शुरुआत बड़े ही उत्साह और जागरूकता के माहौल में हुई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और रैगिंग-मुक्त वातावरण बनाना है, जहां नए और पुराने छात्र एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते विकसित कर सकें।

एंटी-रैगिंग डे के साथ शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ एंटी-रैगिंग डे से हुआ, जिसमें संस्थान की प्राचार्य डॉ. बर्खा गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा,

“रैगिंग न केवल एक अनुशासनहीनता है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध भी है। हमारा संस्थान रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाता है।”

उन्होंने सभी छात्रों को जागरूक किया कि रैगिंग के कानूनी परिणाम कितने कठोर हो सकते हैं, और यह कैसे छात्रों के करियर और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

वरिष्ठ सलाहकार का मार्गदर्शन

वरिष्ठ सलाहकार डॉ. साहगल ने संस्थान द्वारा अपनाए गए एंटी-रैगिंग उपायों की जानकारी दी, जिसमें शामिल हैं—

24x7 एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन नंबर

नए छात्रों के लिए मेंटरिंग प्रोग्राम

कैंपस में सीसीटीवी निगरानी

एंटी-रैगिंग सेल और कमेटी की सक्रिय निगरानी

नुक्कड़ नाटक और रचनात्मक गतिविधियां

कार्यक्रम में छात्रों द्वारा प्रस्तुत एक नुक्कड़ नाटक ने रैगिंग के नकारात्मक प्रभावों को जीवंत तरीके से दर्शाया। नाटक का संदेश स्पष्ट था—
"नए छात्रों का स्वागत सम्मान और मित्रता से करें, भय और दबाव से नहीं।"

साथ ही, एक सेल्फी कॉर्नर भी बनाया गया, जहां छात्र और शिक्षक एंटी-रैगिंग स्लोगन के साथ तस्वीरें खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे।

सप्ताह भर के कार्यक्रम

एंटी-रैगिंग सप्ताह के दौरान संस्थान ने कई रचनात्मक और जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है—

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता — रैगिंग के खिलाफ संदेश देने वाले क्रिएटिव पोस्टर

स्लोगन लेखन प्रतियोगिता — छोटे लेकिन प्रभावशाली संदेश

जागरूकता रैली — कैंपस और आसपास के क्षेत्रों में एंटी-रैगिंग संदेश का प्रसार

संस्थान का संकल्प

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने यह स्पष्ट किया है कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य केवल रैगिंग को रोकना ही नहीं, बल्कि छात्रों के बीच अनुशासन, सहयोग और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना भी है।

“हमारा मकसद है कि हर छात्र खुद को सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस करे।” — डॉ. बर्खा गुप्ता

आज का शाह टाइम्स ई-पेपर डाउनलोड करें और पढ़ें

रैगिंग कानून और दंड

भारत में रैगिंग Ragging Prohibition Act और UGC Regulations के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर—

निलंबन या निष्कासन

जुर्माना

कानूनी कार्यवाही और जेल की सजा

डिग्री पर रोक

इसलिए छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी तरह की रैगिंग गतिविधि में भाग न लें और न ही इसे नजरअंदाज करें।

एंटी-रैगिंग सप्ताह जैसी पहलें न केवल संस्थान के अनुशासन को मजबूत करती हैं, बल्कि एक सकारात्मक और प्रगतिशील शैक्षणिक माहौल भी तैयार करती हैं।
पिलखुवा का सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ इस दिशा में एक मिसाल पेश कर रहा है, जो अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक है।


पिलखुवा स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में जागरूकता कार्यक्रम, 

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता और रैली से छात्रों में रैगिंग के खिलाफ संकल्प


 

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में एंटी-रैगिंग सप्ताह की शुरुआत, जागरूकता कार्यक्रमों से सुरक्षित और रैगिंग-मुक्त माहौल का संकल्प।

~ हाशिम

हापुड़ (शाह टाइम्स)। पिलखुवा के अनवरपुर स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में एंटी-रैगिंग सप्ताह की शुरुआत बड़े ही उत्साह और जागरूकता के माहौल में हुई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और रैगिंग-मुक्त वातावरण बनाना है, जहां नए और पुराने छात्र एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते विकसित कर सकें।

एंटी-रैगिंग डे के साथ शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ एंटी-रैगिंग डे से हुआ, जिसमें संस्थान की प्राचार्य डॉ. बर्खा गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा,

“रैगिंग न केवल एक अनुशासनहीनता है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध भी है। हमारा संस्थान रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाता है।”

उन्होंने सभी छात्रों को जागरूक किया कि रैगिंग के कानूनी परिणाम कितने कठोर हो सकते हैं, और यह कैसे छात्रों के करियर और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

वरिष्ठ सलाहकार का मार्गदर्शन

वरिष्ठ सलाहकार डॉ. साहगल ने संस्थान द्वारा अपनाए गए एंटी-रैगिंग उपायों की जानकारी दी, जिसमें शामिल हैं—

24x7 एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन नंबर

नए छात्रों के लिए मेंटरिंग प्रोग्राम

कैंपस में सीसीटीवी निगरानी

एंटी-रैगिंग सेल और कमेटी की सक्रिय निगरानी

नुक्कड़ नाटक और रचनात्मक गतिविधियां

कार्यक्रम में छात्रों द्वारा प्रस्तुत एक नुक्कड़ नाटक ने रैगिंग के नकारात्मक प्रभावों को जीवंत तरीके से दर्शाया। नाटक का संदेश स्पष्ट था—
"नए छात्रों का स्वागत सम्मान और मित्रता से करें, भय और दबाव से नहीं।"

साथ ही, एक सेल्फी कॉर्नर भी बनाया गया, जहां छात्र और शिक्षक एंटी-रैगिंग स्लोगन के साथ तस्वीरें खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे।

सप्ताह भर के कार्यक्रम

एंटी-रैगिंग सप्ताह के दौरान संस्थान ने कई रचनात्मक और जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है—

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता — रैगिंग के खिलाफ संदेश देने वाले क्रिएटिव पोस्टर

स्लोगन लेखन प्रतियोगिता — छोटे लेकिन प्रभावशाली संदेश

जागरूकता रैली — कैंपस और आसपास के क्षेत्रों में एंटी-रैगिंग संदेश का प्रसार

संस्थान का संकल्प

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने यह स्पष्ट किया है कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य केवल रैगिंग को रोकना ही नहीं, बल्कि छात्रों के बीच अनुशासन, सहयोग और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना भी है।

“हमारा मकसद है कि हर छात्र खुद को सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस करे।” — डॉ. बर्खा गुप्ता

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रैगिंग कानून और दंड

भारत में रैगिंग Ragging Prohibition Act और UGC Regulations के तहत दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर—

निलंबन या निष्कासन

जुर्माना

कानूनी कार्यवाही और जेल की सजा

डिग्री पर रोक

इसलिए छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी तरह की रैगिंग गतिविधि में भाग न लें और न ही इसे नजरअंदाज करें।

एंटी-रैगिंग सप्ताह जैसी पहलें न केवल संस्थान के अनुशासन को मजबूत करती हैं, बल्कि एक सकारात्मक और प्रगतिशील शैक्षणिक माहौल भी तैयार करती हैं।
पिलखुवा का सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ इस दिशा में एक मिसाल पेश कर रहा है, जो अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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