घर की छत पर शुरू करें सब्जियों की खेती, कम जगह में ऐसे उगाएं फसल
शहरों में घर के आसपास खेती के लिए जगह सीमित होती जा रही है। ऐसे में छत, बालकनी या छोटे खुले स्थान का इस्तेमाल किचन गार्डन के लिए किया जा सकता है। छत पर कंटेनर, गमले और वर्टिकल गार्डन की मदद से अलग-अलग मौसम के मुताबिक सब्जियां और पत्तेदार फसलें उगाई जा सकती हैं।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर से जुड़े संस्थानों ने भी किचन और टेरेस गार्डनिंग को लेकर प्रशिक्षण और तकनीकों पर काम किया है। आईसीएआर-सीआईएआरआई ने सीमित स्थान में पत्तेदार सब्जियों और जड़ी-बूटियों की खेती के लिए वर्टिकल मॉडल विकसित किया है, जिसमें कम जगह का इस्तेमाल करते हुए कई पौधे लगाए जा सकते हैं।
छत पर खेती के लिए जगह का चुनाव
सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि छत पर पौधों के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध है या नहीं। सब्जियों की वृद्धि के लिए धूप महत्वपूर्ण होती है। इसलिए ऐसे हिस्से का चुनाव करना चाहिए जहां पौधों को उनकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिल सके।छत पर खेती शुरू करने से पहले भवन की संरचना और पानी निकासी की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है। गमलों या कंटेनरों से निकलने वाला अतिरिक्त पानी छत पर जमा नहीं होना चाहिए।
गमले और कंटेनर में उगाएं सब्जियां
छत पर खेती के लिए मिट्टी सीधे फर्श पर डालने के बजाय गमले, ग्रो बैग, ट्रे या दूसरे उपयुक्त कंटेनर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कंटेनर का आकार फसल और पौधे की जड़ के फैलाव के अनुसार होना चाहिए।पत्तेदार सब्जियों के लिए अपेक्षाकृत कम गहराई वाले कंटेनर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि टमाटर, बैंगन या दूसरी ज्यादा जगह लेने वाली फसलों के लिए बड़े कंटेनर की जरूरत पड़ सकती है।
मिट्टी और पोषण का रखें ध्यान
कंटेनर में पौधों के लिए ऐसा माध्यम होना चाहिए जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो और जड़ों को हवा मिल सके। जरूरत के मुताबिक मिट्टी के साथ जैविक पदार्थ या तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।आईसीएआर के कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किचन गार्डन के लिए मिट्टी, पोषक तत्व, पानी प्रबंधन, जैविक उत्पादन और कीट एवं रोग प्रबंधन जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है। खाद की मात्रा फसल, कंटेनर और पौधे की अवस्था के अनुसार तय करनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा खाद डालना पौधे के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
कौन-सी सब्जियां उगाई जा सकती हैं?
छत पर मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कई प्रकार की सब्जियां उगाई जा सकती हैं। पत्तेदार सब्जियों के अलावा टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा और कुछ बेल वाली सब्जियां भी उपयुक्त व्यवस्था के साथ उगाई जा सकती हैं। आईसीएआर के एक शहरी बागवानी पाठ्यक्रम में टेरेस गार्डनिंग, कंटेनर गार्डनिंग और वर्टिकल गार्डनिंग को शहरी एवं अर्ध-शहरी बागवानी के महत्वपूर्ण रूपों में शामिल किया गया है।
कम जगह में वर्टिकल गार्डनिंग
अगर छत पर फर्श की जगह कम है तो वर्टिकल गार्डनिंग उपयोगी विकल्प हो सकती है। इसमें पौधों को अलग-अलग स्तरों या ऊंचाई पर व्यवस्थित किया जाता है, जिससे सीमित स्थान का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।आईसीएआर-सीआईएआरआई का ‘द्वीप वर्टिग्रो’ मॉडल लगभग पांच वर्ग मीटर स्थान में करीब सौ गमलों और एक ट्रे की व्यवस्था के लिए विकसित किया गया था। इसमें पत्तेदार सब्जियों और जड़ी-बूटियों की खेती के साथ पानी और पोषक तत्वों के बेहतर इस्तेमाल की व्यवस्था भी शामिल है।
पानी देने में बरतें सावधानी
छत पर लगे पौधों को पानी देते समय मिट्टी की नमी पर ध्यान देना चाहिए। हर पौधे को एक जैसी मात्रा में पानी की जरूरत नहीं होती। बहुत अधिक पानी देने से जड़ों में पानी जमा हो सकता है, जबकि कम पानी से पौधे मुरझा सकते हैं।कंटेनर में जल निकासी के लिए उचित छेद होना जरूरी है। पानी जमा रहने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और कुछ रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
कीट और रोगों पर रखें नजर
छत पर उगाई गई सब्जियों में भी कीट और रोग लग सकते हैं। पौधों की पत्तियों, तनों और फलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। पत्तियों पर असामान्य धब्बे, कीट, मुड़ना या पौधे का अचानक कमजोर होना दिखाई दे तो समय रहते कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह ली जा सकती है।किचन गार्डन के वैज्ञानिक प्रबंधन में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
मौसम के अनुसार बदलें फसल
छत पर सफल सब्जी उत्पादन के लिए मौसम के अनुसार फसल का चुनाव महत्वपूर्ण है। हर सब्जी पूरे साल एक जैसी परिस्थितियों में अच्छी नहीं बढ़ती। इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या कृषि विज्ञान केंद्र से मौसम के मुताबिक उपयुक्त किस्म और बुवाई का समय पता करना बेहतर रहता है।आईसीएआर के एक हालिया प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी अलग-अलग मौसम के लिए उपयुक्त सब्जियों और फलों के चयन, बीज एवं रोपण सामग्री, नर्सरी तैयार करने और सालभर उत्पादन की योजना पर जोर दिया गया।
घर की जरूरत के लिए उपयोगी विकल्प
टेरेस किचन गार्डन का उद्देश्य हमेशा व्यावसायिक उत्पादन करना नहीं होता। सीमित मात्रा में उगाई गई सब्जियां घरेलू उपयोग में लाई जा सकती हैं। इससे घर के आसपास उपलब्ध जगह का उपयोग भी होता है और परिवार को ताजी उपज उपलब्ध हो सकती है।आईसीएआर से जुड़े कार्यक्रमों में किचन गार्डन को घरेलू पोषण सुरक्षा और ताजी सब्जियों की उपलब्धता से जोड़कर बढ़ावा दिया गया है।
शुरुआत छोटे स्तर से करें
अगर पहली बार छत पर सब्जियों की खेती शुरू कर रहे हैं तो एक साथ बहुत सारे पौधे लगाने के बजाय कुछ गमलों से शुरुआत करना बेहतर रहेगा। पहले पानी, धूप, खाद और पौधों की देखभाल की व्यवस्था समझें। अनुभव बढ़ने के साथ कंटेनरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।छत पर खेती करते समय सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। भारी गमलों और बड़ी मात्रा में मिट्टी रखने से पहले छत की भार-वहन क्षमता के संबंध में विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
निष्कर्ष
सीमित जगह का मतलब यह नहीं है कि घर में सब्जियां उगाने का विकल्प खत्म हो गया। सही योजना के साथ छत, बालकनी या छोटे खुले स्थान में कंटेनर और वर्टिकल गार्डनिंग के जरिए किचन गार्डन तैयार किया जा सकता है। हालांकि फसल का चुनाव, धूप, जल निकासी, पोषण और कीट प्रबंधन स्थानीय मौसम और पौधे की जरूरत के अनुसार करना जरूरी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।