भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन के अंतरिक्ष मिशन के बाद पृथ्वी पर लौट आई हैं। जानिए इस लंबे प्रवास का उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा।
फ्लोरिडा, (Shah Times)। भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट बुच विल्मोर ने 9 महीने 14 दिन के लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद पृथ्वी पर वापसी की है। उनके साथ क्रू-9 के दो अन्य सदस्य, अमेरिका के निक हेग और रूस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी सुरक्षित लौटे हैं। इनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर सफलतापूर्वक लैंड हुआ।
ये चारों एस्ट्रोनॉट्स मंगलवार (18 मार्च) को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से रवाना हुए थे। स्पेसक्राफ्ट के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर इसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे करीब 7 मिनट तक संपर्क टूट गया। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट और नासा के बीच कम्युनिकेशन ब्लैकआउट रहा।
ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की वापसी में कुल 17 घंटे लगे।
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग और नासा के जॉइंट ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ के तहत 5 जून 2024 को अंतरिक्ष गए थे। यह मिशन केवल 8 दिन का था, जिसमें बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की कार्यक्षमता का परीक्षण किया जाना था। लेकिन थ्रस्टर में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह मिशन 9 महीने से ज्यादा लंबा हो गया।








लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद एस्ट्रोनॉट्स के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सुनीता विलियम्स के शरीर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट्स की सफल वापसी न केवल नासा के लिए, बल्कि पूरे विज्ञान जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनके इस मिशन ने भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया रास्ता खोला है। अब देखना होगा कि लंबी अंतरिक्ष यात्रा के बाद सुनीता विलियम्स की रिकवरी कितनी तेजी से होती है और नासा भविष्य में इस तरह की तकनीकी गड़बड़ियों से कैसे निपटता है।
भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन के अंतरिक्ष मिशन के बाद पृथ्वी पर लौट आई हैं। जानिए इस लंबे प्रवास का उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा।
फ्लोरिडा, (Shah Times)। भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट बुच विल्मोर ने 9 महीने 14 दिन के लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद पृथ्वी पर वापसी की है। उनके साथ क्रू-9 के दो अन्य सदस्य, अमेरिका के निक हेग और रूस के अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी सुरक्षित लौटे हैं। इनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर सफलतापूर्वक लैंड हुआ।
ये चारों एस्ट्रोनॉट्स मंगलवार (18 मार्च) को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से रवाना हुए थे। स्पेसक्राफ्ट के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर इसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे करीब 7 मिनट तक संपर्क टूट गया। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट और नासा के बीच कम्युनिकेशन ब्लैकआउट रहा।
ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की वापसी में कुल 17 घंटे लगे।
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग और नासा के जॉइंट ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ के तहत 5 जून 2024 को अंतरिक्ष गए थे। यह मिशन केवल 8 दिन का था, जिसमें बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की कार्यक्षमता का परीक्षण किया जाना था। लेकिन थ्रस्टर में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह मिशन 9 महीने से ज्यादा लंबा हो गया।








लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद एस्ट्रोनॉट्स के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सुनीता विलियम्स के शरीर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट्स की सफल वापसी न केवल नासा के लिए, बल्कि पूरे विज्ञान जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनके इस मिशन ने भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया रास्ता खोला है। अब देखना होगा कि लंबी अंतरिक्ष यात्रा के बाद सुनीता विलियम्स की रिकवरी कितनी तेजी से होती है और नासा भविष्य में इस तरह की तकनीकी गड़बड़ियों से कैसे निपटता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।