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सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 1 जून तक दी अंतरिम जमानत

None 2024-05-10 15:28:37
सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 1 जून तक दी अंतरिम जमानत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने का कांग्रेस ने किया स्वागत

नई दिल्ली (Shah Times ) । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित धनशोधन के एक मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के संयाेजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी।न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह आदेश पारित किया।पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू और अरविंद केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद सात मई को कहा था कि वह अंतिम जमानत पर आगे की सुनवाई गुरुवार या अगले सप्ताह पूरी होने पर कोई आदेश पारित करेगी।राऊज एवेन्यू स्थित काबेरी बाबेजा की विशेष अदालत ने सात मई को ही उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 20 मई तक बढ़ाने का आदेश पारित किया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा था कि  केजरीवाल को केवल इस शर्त पर राहत देने पर वह विचार कर सकती किसी वह किसी भी आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करेंगे। इसके साथ ही पीठ ने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति ‘असाधारण’ है, क्योंकि लोकसभा चुनाव पांच साल में एक बार होते हैं।

पीठ ने कहा कि अंतरिम जमानत देते समय हम विचार करते हैं कि (जमानत का) क्या कोई दुरुपयोग होगा या क्या संबंधित व्यक्ति एक संगीन अपराधी है। अदालत ने उससे पहले तीन मई को भी  केजरीवाल की याचिका पर उन्हें अंतरिम जमानत देने पर विचार करने का संकेत दिया था।

केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित कथित धनशोधन घोटाले के एक मामले में ईडी की ओर से अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती है। उन्होंने विशेष अदालत और फिर दिल्ली उच्च न्यायालय से याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

शीर्ष अदालत के समक्ष अपने लिखित जवाब में श्री केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद अपनी गिरफ्तारी के तरीके और समय पर सवाल उठाया है।

उन्होंने तर्क दिया है कि उनकी गिरफ्तारी लोकतंत्र के सिद्धांतों, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और संघवाद पर एक अभूतपूर्व हमला था।

गौरतलब है कि केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। कावेरी बावेजा की विशेष अदालत के आदेश पर वह न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय से अपनी याचिका खारिज होने के बाद 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने (नौ अप्रैल को) मुख्यमंत्री केजरीवाल को गिरफ्तार करने और उस केंद्रीय जांच एजेंसी को उन्हें हिरासत में देने के एक विशेष अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए उनकी याचिका (मुख्यमंत्री केजरीवाल की) खारिज कर दी थी।

एकल पीठ ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी और हिरासत के मामले में हस्तक्षेप करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया था।

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने कहा था कि ईडी की ओर से अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों से प्रथम दृष्ट्या पता चलता है कि आरोपी केजरीवाल उक्त अबकारी नीति को तैयार करने की साजिश शामिल थे। उन्होंने (आरोपी) उस अपराध से प्राप्त आय का इस्तेमाल किया। एकल पीठ ने यह भी कहा था कि वह (केजरीवाल ) व्यक्तिगत तौर पर उस नीति को बनाने और रिश्वत मांगने में भी कथित तौर पर शामिल थे।

केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए केंद्रीय एजेंसी द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह (उनकी गिरफ्तारी) लोकतंत्र, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और समान अवसर सहित संविधान की मूल संरचना का 'उल्लंघन' करता है। इसलिए उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।

ईडी ने केजरीवाल पर दिल्ली आबकारी नीति के माध्यम से गलत तरीके से करोड़ों रुपए हासिल करने और इस में मुख्य भूमिका निभाने वाला साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया है।

केंंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अगस्त 2022 को आबकारी नीति बनाने और उसके कार्यान्वयन में की गई कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। इसी आधार पर ईडी ने 22 अगस्त 2022 को धनशोधन का मामला दर्ज किया था।

ईडी का दावा है कि आप के शीर्ष नेताओं - दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसौदिया, राज्य सभा सांसद संजय सिंह सहित अन्य ने अवैध कमाई के लिए ‘साजिश’ रची थी।

गौरतलब है कि इस मामले में 'आप' सांसद श्री सिंह को उच्चतम न्यायालय ने दो अप्रैल को राहत दी। शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत की अनुमति के साथ ही संबंधित विशेष अदालत को जमानत की शर्ते तय करने का भी निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत के इस आदेश के मद्देनजर राऊज एवेन्यू स्थित काबेरी बाबेजा की विशेष अदालत ने तीन अप्रैल को उन्हें सशर्त तिहाड़ जेल से रिहा ।

कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (आप) नेता एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी इसी तरह से राहत मिलेगी।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने केजरीवाल को जमानत मिलने पर खुशी व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशान साधा कि वह जिस तरह की राजनीति करते हैं उसके लिए उन्हें चार जून को प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद साबरमती आश्रम में जाकर आत्म चिंतन करना चाहिए।

उन्होंने कहा,“उच्चतम न्यायालय से अरविंद केजरीवाल को जो राहत मिली है उसका हम स्वागत करते हैं। उम्मीद करते हैं कि चार जून तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री हो चुके होंगे और उसके बाद वह साबरमती आश्रम में बैठकर आत्म चिंतन और मनन करेंगे कि वह किस तरह की राजनीति करते हैं। साथ ही, यह भी उम्मीद करते हैं कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी शीघ्र अतिशीघ्र इसी तरह से न्याय मिलेगा। ”

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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