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गुजरात बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: आदेश की अवमानना ​​हुई तो जिम्मेदार जाएंगे जेल

None 2024-10-05 08:52:44
गुजरात बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: आदेश की अवमानना ​​हुई तो जिम्मेदार जाएंगे जेल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उसे लगता है कि अधिकारियों ने गुजरात में तोड़फोड़ को लेकर उसके आदेश का उल्लंघन किया है तो वह ढहाए गए ढांचे को बहाल करने का आदेश पारित करेगा।

नई दिल्ली,( Shah Times) ।  गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पास बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दायर अवमानना ​​याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हमारे आदेश की अवमानना ​​हुई तो दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। साथ ही हम आदेश देंगे कि सब कुछ फिर से बहाल हो। 

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की यथास्थिति बनाए रखने की मांग को खारिज कर दिया है। 

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की ओर से एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला 2003 से चल रहा है। मुस्लिम समुदाय की ओर से पूरी पटनी मुस्लिम जमात की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना ​​याचिका दायर की गई थी। अवमानना ​​याचिका में गिर सोमनाथ के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में गिर सोमनाथ में स्थित दरगाह मंगरोली शाह बाबा, ईदगाह, प्रभास पाटन, वेरावल और कई अन्य संरचनाओं के कथित अवैध विध्वंस का हवाला दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर उसे लगता है कि अधिकारियों ने गुजरात में तोड़फोड़ को लेकर उसके आदेश का उल्लंघन किया है तो वह ढहाए गए ढांचे को बहाल करने का आदेश पारित करेगा। पीठ ने कहा कि अगर हमें लगता है कि वे हमारे आदेश की अवहेलना कर रहे हैं तो हम न केवल उन्हें जेल भेजेंगे, बल्कि उनसे यह सब बहाल करने को भी कहेंगे। पीठ ने कहा कि उसका पिछला आदेश सभी पर समान रूप से लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सॉलिसिटर जनरल से जवाब मांगा है और सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 17 सितंबर के कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन के मामले में दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में कहा था कि देशभर में आरोपियों व अन्य की संपत्तियों को कोर्ट की अनुमति के बिना नहीं गिराया जाना चाहिए। उसके बाद याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गुजरात में तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। 

 याचिकाकर्ता समस्तीपुर मुस्लिम जमानत के वकील संजय हेगड़े ने दलील दी कि कोर्ट के आदेश के बावजूद तोड़फोड़ की गई। सुप्रीम कोर्ट में गुजरात के अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह ढांचा समुद्र के पास और सोमनाथ मंदिर से करीब 340 मीटर दूर स्थित था और यह अपवाद के तहत आता है।

अगर हम देखते हैं कि अधिकारियों ने गुजरात में तोड़फोड़ के संबंध में उनके आदेश का उल्लंघन किया है, तो वे ध्वस्त ढांचे को बहाल करने का आदेश पारित करेंगे।

पिछले महीने अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि अगर किसी सार्वजनिक स्थान जैसे सड़क, फुटपाथ, रेलवे लाइन या नदी या किसी जल निकाय से सटा कोई अनधिकृत ढांचा है, तो हमारा आदेश लागू नहीं होगा।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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