India
UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, केंद्र और RBI से शुल्क व्यवस्था पर जानकारी मांगे जाने का मामला
Mohammad Naved
•
2026-09-28 13:03:34
UPI MDR विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ₹2,000 से ऊपर भुगतान पर शुल्क को चुनौती
UPI पर 0.4% MDR का मामला, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और RBI से जवाब तलब
UPI MDR से किसकी कमाई होगी? सुप्रीम कोर्ट में शुल्क व्यवस्था पर उठे सवाल
📍 नई दिल्ली
🗓️ 28 सितंबर 2026
✍️ MOHD NAVED
Introduction
यूपीआई पेमेंट को लेकर देश में एक नया कानूनी और आर्थिक विवाद सामने आया है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई 28 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सूचीबद्ध है।
इस विवाद का अहम सवाल केवल यह नहीं है कि MDR कितना होगा। बड़ा सवाल यह है कि इससे मिलने वाली रकम किस पेमेंट इकोसिस्टम में जाएगी, शुल्क तय करने का कानूनी आधार क्या है और इस व्यवस्था का असर कारोबारियों तथा डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर कैसे पड़ेगा।
Essential Facts
केंद्र की नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M UPI भुगतान में ₹2,000 से अधिक की रकम पर सामान्य MDR 0.4% प्रस्तावित है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96% P2M लेन-देन नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
पात्र छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग राहत का प्रावधान रखा गया है। ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्ति वाली निर्धारित छोटी मर्चेंट श्रेणी पर MDR नहीं लगाने की व्यवस्था बताई गई है।
Main Development
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में इस पूरी व्यवस्था को चुनौती दी गई है। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दाखिल की है। इसमें केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, NPCI और UPI से जुड़ी स्टीयरिंग कमेटी को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में ₹2,000 की सीमा, ₹1 लाख की मासिक प्राप्ति वाली छोटी मर्चेंट श्रेणी और ₹300 की अधिकतम सीमा के पीछे इस्तेमाल किए गए आंकड़ों तथा नीति-निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने पारदर्शिता, वैधानिक सुरक्षा और उपभोक्ताओं पर संभावित अप्रत्यक्ष बोझ से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं।
Statements and Attribution
केंद्र सरकार का कहना है कि MDR सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स नहीं है और इससे मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में जाने के बजाय पेमेंट इकोसिस्टम के हिस्सेदारों में वितरित होगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार इसमें बैंक, पेमेंट एप्लिकेशन प्रोवाइडर और दूसरे संबंधित हिस्सेदार शामिल हैं।
सरकार का तर्क है कि UPI के बढ़ते पैमाने के साथ पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और तकनीकी व्यवस्था के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल जरूरी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य उपभोक्ता से UPI भुगतान के लिए अलग शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने शुल्क व्यवस्था के कानूनी आधार और इसके निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि कारोबारी अतिरिक्त लागत को अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। यह फिलहाल याचिका में उठाया गया तर्क है, स्थापित तथ्य नहीं।
MDR की रकम किसके पास जाएगी
MDR को सरकार द्वारा सीधे वसूला जाने वाला टैक्स नहीं बताया गया है। आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार यह पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच वितरित होगा। इसमें बैंक और पेमेंट एप्लिकेशन प्रोवाइडर जैसे हिस्सेदार शामिल हैं।
यही पहलू मौजूदा विवाद का आर्थिक केंद्र है। शुल्क का भुगतान मर्चेंट की ओर से होना है, जबकि MDR से बनने वाली आमदनी पेमेंट सिस्टम के अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच तय व्यवस्था के अनुसार बांटी जाएगी।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि MDR की पूरी रकम केंद्र सरकार को मिलेगी। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी इसके विपरीत है।
₹10,000 के भुगतान पर क्या गणित होगा
यदि कोई पात्र मर्चेंट ₹10,000 का UPI भुगतान स्वीकार करता है और 0.4% MDR लागू होता है, तो MDR ₹40 होगा।
यदि MDR पर 18% GST लागू होता है, तो ₹40 पर GST ₹7.20 होगा। इस स्थिति में कुल MDR संबंधित कटौती ₹47.20 बनती है।
यह गणना MDR पर लागू GST के आधार पर है। पूरी ₹10,000 की भुगतान राशि पर 18% GST लगाने का मतलब नहीं है। MDR और उसके टैक्स का वास्तविक लेखांकन संबंधित बिलिंग और टैक्स व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
आम ग्राहक के लिए क्या बदलेगा
नई व्यवस्था में ग्राहक के लिए UPI भुगतान शुल्क लागू करने की घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने कहा है कि P2P लेन-देन पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के पात्र P2M भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे।
₹2,000 से अधिक के पात्र P2M भुगतान में MDR मर्चेंट स्तर पर लागू होगा। इसलिए ग्राहक के UPI ऐप में अलग से 0.4% शुल्क जुड़ना इस व्यवस्था का घोषित मॉडल नहीं है।
हालांकि, कारोबारी अपनी लागत को कीमतों में कैसे समायोजित करते हैं, यह अलग आर्थिक सवाल है। अदालत में दाखिल याचिका में इसी संभावित अप्रत्यक्ष प्रभाव को भी उठाया गया है।
छोटे कारोबारियों के लिए व्यवस्था
नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को अलग श्रेणी में राहत देने का प्रावधान है। निर्धारित पात्र छोटे मर्चेंट, जिनकी UPI QR के जरिए मासिक प्राप्ति ₹1 लाख तक है, MDR से बाहर रखे गए हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर छोटे दुकानदार स्वतः हर स्थिति में MDR से बाहर होगा। पात्रता संबंधित मर्चेंट श्रेणी और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगी।
UPI के पुराने मॉडल से कितना अलग है मामला
UPI के मर्चेंट भुगतान में लंबे समय से zero-MDR व्यवस्था रही है। सरकार ने इस मॉडल को बनाए रखने के लिए पेमेंट इकोसिस्टम को इंसेंटिव भी दिए हैं।
वित्त मंत्रालय के संसदीय जवाब के अनुसार FY 2021-22 से FY 2024-25 के दौरान UPI इकोसिस्टम को जारी इंसेंटिव सपोर्ट करीब ₹8,730 करोड़ रहा।
नई व्यवस्था इसी आर्थिक मॉडल में बदलाव करती है। अब चुनिंदा बड़े मर्चेंट भुगतानों से पेमेंट इकोसिस्टम में प्रत्यक्ष MDR आय पैदा करने की कोशिश है।
अदालत में मुख्य कानूनी सवाल
PIL में कई सवाल उठाए गए हैं। इनमें यह भी शामिल है कि ₹2,000 की सीमा किस आधार पर तय की गई, ₹1 लाख की मासिक प्राप्ति सीमा के पीछे कौन सा डेटा इस्तेमाल हुआ और MDR की दर तथा कैप तय करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही।
याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के बीच शुल्क-मुक्त व्यवस्था के अंतर पर भी सवाल उठाया गया है।
अदालत के सामने अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था का वैधानिक आधार कितना स्पष्ट है और नीति बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
Important Figures and Dates
14 सितंबर 2026 को नई शुल्क-मुक्त श्रेणियों से जुड़ी केंद्र की अधिसूचना सामने आई।
15 सितंबर 2026 को नई MDR व्यवस्था का विस्तृत ढांचा सामने आया।
16 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की गई।
28 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सूचीबद्ध है।
15 अक्टूबर 2026 से नई MDR व्यवस्था लागू होने का प्रस्ताव है, बशर्ते अदालत से कोई अलग आदेश न आए।
What Happens Next
अब मामले में अदालत का रुख अहम रहेगा। सुनवाई के दौरान केंद्र, RBI और अन्य संबंधित पक्षों से MDR व्यवस्था के कानूनी और आर्थिक आधार पर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में 28 सितंबर की सुनवाई सूचीबद्ध होने की पुष्टि है। किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष को पहले से मान लेना उचित नहीं होगा।
यदि अदालत नई व्यवस्था पर कोई अंतरिम आदेश देती है, तो 15 अक्टूबर की प्रस्तावित लागू तारीख और MDR का वास्तविक क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है। यदि ऐसा कोई आदेश नहीं आता, तो घोषित ढांचे के अनुसार निर्धारित श्रेणियों में MDR व्यवस्था लागू होनी है।
Conclusion
UPI MDR विवाद का केंद्र केवल ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर 0.4% शुल्क नहीं है। असली बहस डिजिटल पेमेंट के आर्थिक मॉडल, पेमेंट इकोसिस्टम की कमाई, मर्चेंट लागत, उपभोक्ता हित और सरकारी नीति की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर है।
केंद्र सरकार इसे UPI के दीर्घकालिक वित्तीय और तकनीकी ढांचे से जोड़ रही है। याचिकाकर्ता इसके कानूनी आधार, पारदर्शिता और संभावित आर्थिक असर पर सवाल उठा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस विवाद के अगले चरण की दिशा तय करेगी।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।