सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को फिलहाल रोकने से इनकार किया है। कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI से चार सप्ताह में जवाब मांगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है। ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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📍 New Delhi 📰 29 September 2026 ✍️ Apurva Choudhary
₹2,000 से ऊपर UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने इस व्यवस्था पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI से जवाब मांगा गया है।
मामला अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR व्यवस्था को चुनौती दी गई है। सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।
सुप्रीम कोर्ट ने MDR पर तुरंत रोक क्यों नहीं लगाई?
याचिकाकर्ता की ओर से नई व्यवस्था के लागू होने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने फिलहाल यह अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने MDR व्यवस्था को अंतिम रूप से सही ठहरा दिया है, ऐसा नहीं है। मामले में सरकार और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब आने के बाद कानूनी सवालों पर आगे सुनवाई होगी।
पीठ ने केंद्र से इस व्यवस्था के कानूनी और तकनीकी आधार को स्पष्ट करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि अगर MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स या सरकारी शुल्क नहीं है, तो इसके लिए कानूनी आधार और इसकी प्रकृति क्या है। अदालत ने इसी पहलू पर विस्तृत जवाब मांगा है।
केंद्र ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने अदालत को बताया कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है और सरकार को इस राशि में से कोई पैसा नहीं मिलेगा। सरकार के मुताबिक यह भुगतान व्यवस्था के भीतर शामिल संस्थाओं के बीच सेटलमेंट से जुड़ा शुल्क है।
केंद्र ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। सरकार के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन इस MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। अदालत ने सरकार से इन दावों और पूरी व्यवस्था का आधार हलफनामे के जरिए स्पष्ट करने को कहा है।
नया UPI MDR नियम क्या है?
घोषित फ्रेमवर्क के तहत सामान्य Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की पात्र राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह MDR सीधे UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से वसूलने के लिए निर्धारित शुल्क नहीं है, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लागू होने वाला चार्ज है।
₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। यानी बहुत बड़ी राशि के लेनदेन में भी इस सामान्य MDR व्यवस्था के तहत ₹300 से अधिक MDR नहीं होगा।
क्या हर ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4% लगेगा?
यह सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है। केवल यह कहना कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट 0.4 प्रतिशत महंगा हो जाएगा, सही नहीं होगा।
नई व्यवस्था मुख्य रूप से निर्दिष्ट Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन पर लागू है। Person-to-Person यानी P2P ट्रांसफर, चाहे राशि कितनी भी हो, इस MDR व्यवस्था से बाहर रखे गए हैं और मुफ्त रहेंगे।
इसके अलावा ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगाया जाएगा। छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग Zero-MDR व्यवस्था रखी गई है। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
छोटे कारोबारियों के लिए क्या प्रावधान है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार छोटे मर्चेंट, जिनमें स्ट्रीट वेंडर और स्थानीय दुकानदार शामिल हैं, और जो निर्धारित P2PM श्रेणी में UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, Zero-MDR व्यवस्था के तहत बने रहेंगे।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों और माइक्रो बिजनेस पर अतिरिक्त भुगतान लागत का दबाव कम रखना है। इस व्यवस्था के कारण सामान्य छोटे मूल्य वाले डिजिटल पेमेंट का बड़ा हिस्सा MDR से बाहर रहेगा।
ग्राहक को अभी कितना भुगतान करना होगा?
फिलहाल UPI ग्राहक के लिए तुरंत कोई नया 0.4 प्रतिशत चार्ज शुरू नहीं हुआ है। घोषित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होनी है और सुप्रीम कोर्ट ने अभी इसके खिलाफ अंतरिम रोक नहीं लगाई है।
हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लागू होगा और इसे ग्राहक पर सीधे डालने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मर्चेंट MDR की लागत ग्राहक से न वसूलें। UPI ऐप प्रोवाइडर्स को भी अतिरिक्त प्लेटफॉर्म या छिपे हुए चार्ज लगाने से रोका गया है।
कुछ सेक्टर में MDR अलग होगा
नई व्यवस्था में सभी पात्र मर्चेंट लेनदेन के लिए एक जैसा MDR नहीं रखा गया है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र लेनदेन पर फ्लैट ₹5 MDR निर्धारित किया गया है।
वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर या डीलर से जुड़े कुछ कैपिटल मार्केट पेमेंट के लिए MDR 0.02 प्रतिशत रखा गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।
सरकार और भुगतान कंपनियों को पैसा क्यों चाहिए?
सरकार का पक्ष है कि UPI को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं की लागत को ध्यान में रखना जरूरी है। MDR से मिलने वाली राशि बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स जैसे संबंधित प्रतिभागियों के बीच वितरित की जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह पैसा UPI के संचालन, विस्तार और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद करेगा। सरकार ने यह भी कहा है कि MDR संग्रह का 5 प्रतिशत छोटे कारोबारियों में UPI को बढ़ावा देने वाले फंड के लिए रखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य कानूनी सवाल क्या है?
इस मामले का मुख्य सवाल सिर्फ MDR की दर 0.4 प्रतिशत होने तक सीमित नहीं है। अदालत यह भी देख रही है कि इस तरह के चार्ज को लागू करने का वैधानिक आधार क्या है और अलग-अलग डिजिटल पेमेंट माध्यमों के बीच शुल्क संबंधी व्यवस्था किस तरह निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता ने नई व्यवस्था की वैधानिकता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत किए गए बदलावों और संबंधित अधिसूचनाओं के आधार पर लाई गई है। अदालत ने अभी इनमें से किसी पक्ष के दावे को अंतिम रूप से स्वीकार या खारिज नहीं किया है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI, NPCI और संबंधित पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद अदालत मामले में उठाए गए कानूनी, तकनीकी और नियामकीय सवालों पर आगे सुनवाई करेगी।
फिलहाल 15 अक्टूबर 2026 की प्रभावी तारीख बरकरार है, क्योंकि अदालत ने अंतरिम रोक नहीं लगाई है। हालांकि यह व्यवस्था अदालत के समक्ष चुनौती के अधीन है और आगे की सुनवाई में इसमें बदलाव, निर्देश या अन्य आदेश की स्थिति बन सकती है।
इसलिए आम UPI उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि ₹2,000 से ऊपर का हर UPI भुगतान अपने आप 0.4 प्रतिशत महंगा नहीं हो रहा है। प्रस्तावित MDR निर्दिष्ट मर्चेंट लेनदेन पर केंद्रित है और मौजूदा सरकारी फ्रेमवर्क के मुताबिक इसका सीधा भुगतान ग्राहक को नहीं करना है।