सूर्या ने बेटी को घर में पहले प्रवेश कराया, याद की पुरानी बात
बेटी दिया की याद ने सूर्या को क्यों किया भावुक?
‘लक्ष्मी घर आई’, बेटी के जन्म की याद से जुड़ा सूर्या का किस्सा
अभिनेता सूर्या ने बेटी दिया के जन्म से जुड़ी एक निजी याद साझा की। उन्होंने बताया कि नवजात बेटी को घर में पहले प्रवेश कराने का पल उनके लिए खास था। यह पारिवारिक अनुभव उनकी नई फिल्म ‘विश्वनाथ एंड सन्स’ के भावनात्मक हिस्से से भी जुड़ा है, जिसमें पिता और परिवार रिश्तों की अहमियत दिखाते हैं।
चेन्नई / मुंबई | 13 अगस्त 2026 | Shah Times
By Mohd Haris
तमिल सिनेमा के अभिनेता सूर्या इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘विश्वनाथ एंड सन्स’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म की रिलीज़ से पहले अभिनेता ने अपने निजी जीवन की एक भावनात्मक याद साझा की, जिसमें उनकी बेटी दिया के जन्म के बाद घर में उनके स्वागत का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, सूर्या ने बताया कि उन्होंने अपनी नवजात बेटी को घर में सबसे पहले प्रवेश कराया और इस पल को परिवार के लिए शुभ माना।
यह किस्सा इसलिए भी अहम है क्योंकि सूर्या के लिए पिता की भूमिका केवल निजी जिंदगी तक सीमित नहीं रही। उनकी बेटी दिया और बेटे देव के साथ उनके रिश्ते से जुड़ी कई बातें पहले भी सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा रही हैं। 2010 में बेटे के जन्म के समय सूर्या ने परिवार और बच्चों को प्राथमिकता देने की बात कही थी। उस समय उन्होंने अपनी बड़ी बेटी दिया को नए बच्चे के आने के बाद पर्याप्त भावनात्मक सुरक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया था।
भारतीय परिवारों में बेटी के जन्म को शुभता और समृद्धि से जोड़ने की परंपरा लंबे समय से मौजूद रही है। सूर्या की याद में भी यही भाव दिखाई देता है। बेटी के घर में पहले प्रवेश को उन्होंने एक भावनात्मक पारिवारिक रस्म के रूप में याद किया।
यहां ‘लक्ष्मी घर आई’ का इस्तेमाल धार्मिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि बेटी के जन्म को शुभ मानने वाली पारिवारिक भावना के तौर पर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्ट में इसी निजी अनुभव को सूर्या की याद के केंद्र में रखा गया है।
सूर्या की नई फिल्म ‘विश्वनाथ एंड सन्स’ निर्देशक वेंकी अटलूरी की फैमिली ड्रामा है। फिल्म में सूर्या संजय विश्वनाथ का किरदार निभा रहे हैं। कहानी में परिवार, उम्र, रिश्तों और निजी जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष अहम भूमिका निभाता है। फिल्म में मामिता बैजू भी मुख्य भूमिका में हैं।
फिल्म के शुरुआती पोस्टर और टीज़र में सूर्या को एक बच्चे के साथ दिखाया गया था। इस वजह से कहानी को लेकर काफी कयास लगाए गए। इंडिया टुडे ने भी टीज़र के संदर्भ में लिखा था कि फिल्म में एक बच्चे से जुड़ा ट्रैक दिखाई देता है और यह कहानी के भावनात्मक हिस्से से जुड़ा हुआ है।
अब सूर्या की निजी याद सामने आने के बाद इस पहलू को और दिलचस्प नज़रिया मिला है। हालांकि, निजी जीवन की घटना और फिल्म के किरदार को एक ही घटना मानना सही नहीं होगा। फिल्म एक काल्पनिक कहानी है, जबकि बेटी से जुड़ा सूर्या का अनुभव उनकी वास्तविक जिंदगी का हिस्सा है।
सूर्या और ज्योतिका की बेटी दिया का जन्म 2007 में हुआ था। परिवार में उनके बाद बेटे देव का जन्म 2010 में हुआ। परिवार ने बच्चों को मीडिया की लगातार निगाह से काफी हद तक दूर रखा है, हालांकि समय-समय पर दोनों कलाकारों ने बच्चों से जुड़ी उपलब्धियां साझा की हैं।
2025 में दिया ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनके ग्रेजुएशन के मौके पर परिवार की तस्वीरें सामने आई थीं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इन तस्वीरों में दिया के साथ उनके नाना-नानी और दादा-दादी भी नजर आए थे।
दिया ने कैमरे के सामने अभिनय करने के बजाय फिल्म निर्माण के पीछे काम करने में रुचि दिखाई है। 2025 में उनकी डॉक्यूमेंट्री-ड्रामा ‘लीडिंग लाइट’ का जिक्र हुआ, जिसे उन्होंने निर्देशित किया था। फिल्म में बॉलीवुड की महिला गाफर्स की अनकही कहानियों को सामने रखा गया।
सूर्या और ज्योतिका ने कई मौकों पर परिवार और काम के बीच संतुलन की बात की है। मई 2026 में दोनों अपने बेटे और बेटी के साथ मुंबई में ज्योतिका की फिल्म ‘सिस्टम’ के प्रीमियर पर नजर आए थे। उस दौरान ज्योतिका ने बताया था कि दोनों एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और परिवार की जिम्मेदारियां साझा करते हैं।
यह पारिवारिक दृष्टिकोण सूर्या की सार्वजनिक छवि में भी लगातार दिखाई देता है। 2010 में उन्होंने बेटी दिया को नए भाई के जन्म के बाद परिवार में उसकी जगह और भावनात्मक सुरक्षा का ध्यान रखने की बात कही थी। उनके मुताबिक, बड़े बच्चे को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि नए बच्चे के आने से उसका महत्व कम हो गया है।
‘विश्वनाथ एंड सन्स’ केवल रोमांस पर आधारित फिल्म नहीं है। इसके नैरेटिव में परिवार, जिम्मेदारी और रिश्तों का असर भी महत्वपूर्ण है। सूर्या का किरदार संजय विश्वनाथ एक अनुभवी इंटरनेशनल पिस्टल शूटर है, जो अपनी निजी जिंदगी और पेशेवर आकांक्षाओं के बीच संतुलन तलाशता है।
फिल्म के टीज़र ने उम्र के अंतर वाले रिश्ते को लेकर भी चर्चा पैदा की। सूर्या और मामिता बैजू के किरदारों के बीच करीब दो दशक का उम्र अंतर दिखाया गया है। यह फिल्म के केंद्रीय भावनात्मक संघर्षों में से एक है।
सूर्या ने हालिया बातचीत में रिश्तों में सम्मान और लंबे समय तक प्रेम बनाए रखने की अहमियत पर भी बात की है। उन्होंने कहा कि लंबे वैवाहिक रिश्ते में भी एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
सूर्या की बेटी के जन्म से जुड़ी यह याद इसलिए चर्चा में आई है क्योंकि यह अभिनेता के स्टारडम से अलग उनका निजी पक्ष सामने लाती है। एक बड़े तमिल स्टार के तौर पर उनकी फिल्मों में एक्शन और ड्रामा अक्सर प्रमुख रहे हैं, लेकिन हाल के प्रोजेक्ट्स में पारिवारिक और भावनात्मक रिश्तों पर भी ज्यादा जोर दिखाई देता है।
‘विश्वनाथ एंड सन्स’ इसी बदलाव का हिस्सा नजर आती है। हालांकि फिल्म की कहानी और सूर्या की निजी जिंदगी के बीच सीधा संबंध स्थापित करना उचित नहीं होगा, लेकिन अभिनेता के निजी अनुभवों ने कुछ भावनात्मक दृश्यों को समझने में संदर्भ जरूर दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट इसी कड़ी को सामने रखती है।
सूर्या की इस याद में कोई बड़ा फिल्मी ड्रामा नहीं है। इसकी अहमियत एक छोटे पारिवारिक पल में है। बेटी के जन्म के समय घर में उसका पहला प्रवेश परिवार के लिए खुशी, उम्मीद और शुभता का प्रतीक बना।
समय बीतने के साथ वही बेटी अब अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दिया के फिल्म निर्माण में शुरुआती कदम इस बात का संकेत देते हैं कि परिवार की सिनेमाई विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंच रही है, हालांकि अपने अलग रास्ते के साथ।
‘विश्वनाथ एंड सन्स’ 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है। फिल्म में सूर्या के साथ मामिता बैजू, राधिका सरथकुमार और रवीना टंडन महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
सूर्या के लिए फिल्म की रिलीज़ ऐसे समय में हो रही है जब उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी पुरानी यादें भी चर्चा में हैं। बेटी के जन्म का यह किस्सा उनके प्रशंसकों को अभिनेता की पारिवारिक संवेदनशीलता का एक अलग पहलू दिखाता है।
सूर्या की बेटी के जन्म से जुड़ी ‘लक्ष्मी घर आई’ वाली याद एक निजी पारिवारिक पल है, लेकिन इसके सामने आने से अभिनेता के व्यक्तित्व का एक संवेदनशील पक्ष सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नवजात बेटी को घर में पहले प्रवेश कराने के उस पल को आज भी याद रखा है।
दूसरी तरफ, ‘विश्वनाथ एंड सन्स’ में परिवार, रिश्ते और भावनात्मक जिम्मेदारियां कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसलिए निजी अनुभव और फिल्मी नैरेटिव के बीच समानता दिखना स्वाभाविक है, लेकिन दोनों को एक ही घटना मानना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।