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सुभारती विश्वविद्यालय में स्वराज दिवस राष्ट्रभक्ति के साथ संपन्न

None 2025-12-31 20:10:21
सुभारती विश्वविद्यालय में स्वराज दिवस राष्ट्रभक्ति के साथ संपन्न

स्वराज दिवस पर सुभारती विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक व शैक्षणिक आयोजन

📍 Meerut ✍️ Asif Khan 

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में स्वराज दिवस दो चरणों में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में ध्वजारोहण, पुष्पांजलि, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन शामिल रहा।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में स्वराज दिवस का आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक घटनाओं को स्मरण करना और छात्रों को उनसे अवगत कराना रहा। पूरे परिसर में व्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई थीं और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रथम चरण का आयोजन

कार्यक्रम का पहला चरण विश्वविद्यालय परिसर स्थित आई एन ए शहीद स्मारक पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल डॉक्टर जी के थपलियाल, कुलपति डॉक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर शल्या राज, सुभारती डिफेंस अकादमी के निदेशक कर्नल राजेश त्यागी सहित विभिन्न संकायाध्यक्ष और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वातावरण शांत और अनुशासित रहा।

ध्वजारोहण कार्यक्रम

प्रथम चरण के बाद कार्यक्रम का दूसरा चरण बोधी उपवन परिसर में अशोक स्तंभ के समीप आयोजित किया गया। यहां मुख्य अतिथि फिल्म निर्माता और निर्देशक अमलन कुसुम घोष ने आई एन ए आज़ाद हिंद फौज का ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के समय उपस्थित सभी लोगों ने आज़ाद हिंद गान का सामूहिक वाचन किया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सहभागिता देखी गई।

ऐतिहासिक संदर्भ

कार्यक्रम के दौरान स्वराज दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। यह बताया गया कि 30 दिसंबर 1943 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत का पहला स्वतंत्र राज्य घोषित किया गया था। इसी दिन पोर्ट ब्लेयर में आज़ाद हिंद सरकार के गठन की घोषणा हुई थी। इस ऐतिहासिक दिन की स्मृति में स्वराज दिवस मनाया जाता है।

सभागार कार्यक्रम

ध्वजारोहण के बाद सत्यजीत रे सभागार में विस्तृत कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि अमलन कुसुम घोष का स्वागत विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पौधा भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता और जनसंचार विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रीति सिंह ने किया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में ललित कला संकाय के छात्रों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद शामुक्त बैंड द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही और सभागार में उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना।

पुस्तक विमोचन

कार्यक्रम के दौरान गणेश शंकर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर आशुतोष वर्मा और राम प्रकाश तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक नैरेटिव ऑफ जस्टिस का विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन विश्वविद्यालय के मंच पर अतिथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन

स्वराज दिवस के अवसर पर अमलन कुसुम घोष द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री गुमनामी बाबा का प्रदर्शन किया गया। डॉक्यूमेंट्री को सभागार में उपस्थित शिक्षकों और छात्रों ने देखा। प्रदर्शन के दौरान सभागार में शांति और अनुशासन बना रहा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का वक्तव्य

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल डॉक्टर जी के थपलियाल ने अपने संबोधन में स्वराज दिवस के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों की जानकारी साझा की और छात्रों से अध्ययन के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की बात कही।

कुलपति का संबोधन

कुलपति डॉक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता प्राप्ति से जुड़े ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों की भूमिका इतिहास और संस्कृति से जुड़ी जानकारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी का वक्तव्य

मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर शल्या राज ने कार्यक्रम के आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे आयोजन छात्रों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता में सहायक होते हैं।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

मुख्य अतिथि अमलन कुसुम घोष ने अपने संबोधन में अपने शोध और डॉक्यूमेंट्री निर्माण के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर शोध और दस्तावेजीकरण से नई पीढ़ी को तथ्यात्मक जानकारी मिलती है। उनका वक्तव्य श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक सुना।

सहभागिता

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। सुभारती डिफेंस अकादमी, पत्रकारिता विभाग और ललित कला संकाय की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। समापन के बाद उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने एक दूसरे से औपचारिक बातचीत की। आयोजन निर्धारित समय और व्यवस्था के अनुसार संपन्न हुआ।

समग्र आयोजन

स्वराज दिवस का यह आयोजन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तत्वों का संतुलित समावेश रहा।

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स्वराज दिवस पर सुभारती विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक व शैक्षणिक आयोजन

📍 Meerut ✍️ Asif Khan 

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में स्वराज दिवस दो चरणों में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में ध्वजारोहण, पुष्पांजलि, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन शामिल रहा।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में स्वराज दिवस का आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक घटनाओं को स्मरण करना और छात्रों को उनसे अवगत कराना रहा। पूरे परिसर में व्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई थीं और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रथम चरण का आयोजन

कार्यक्रम का पहला चरण विश्वविद्यालय परिसर स्थित आई एन ए शहीद स्मारक पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल डॉक्टर जी के थपलियाल, कुलपति डॉक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर शल्या राज, सुभारती डिफेंस अकादमी के निदेशक कर्नल राजेश त्यागी सहित विभिन्न संकायाध्यक्ष और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वातावरण शांत और अनुशासित रहा।

ध्वजारोहण कार्यक्रम

प्रथम चरण के बाद कार्यक्रम का दूसरा चरण बोधी उपवन परिसर में अशोक स्तंभ के समीप आयोजित किया गया। यहां मुख्य अतिथि फिल्म निर्माता और निर्देशक अमलन कुसुम घोष ने आई एन ए आज़ाद हिंद फौज का ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के समय उपस्थित सभी लोगों ने आज़ाद हिंद गान का सामूहिक वाचन किया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सहभागिता देखी गई।

ऐतिहासिक संदर्भ

कार्यक्रम के दौरान स्वराज दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। यह बताया गया कि 30 दिसंबर 1943 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत का पहला स्वतंत्र राज्य घोषित किया गया था। इसी दिन पोर्ट ब्लेयर में आज़ाद हिंद सरकार के गठन की घोषणा हुई थी। इस ऐतिहासिक दिन की स्मृति में स्वराज दिवस मनाया जाता है।

सभागार कार्यक्रम

ध्वजारोहण के बाद सत्यजीत रे सभागार में विस्तृत कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि अमलन कुसुम घोष का स्वागत विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पौधा भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता और जनसंचार विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रीति सिंह ने किया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में ललित कला संकाय के छात्रों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद शामुक्त बैंड द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही और सभागार में उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना।

पुस्तक विमोचन

कार्यक्रम के दौरान गणेश शंकर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर आशुतोष वर्मा और राम प्रकाश तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक नैरेटिव ऑफ जस्टिस का विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन विश्वविद्यालय के मंच पर अतिथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन

स्वराज दिवस के अवसर पर अमलन कुसुम घोष द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री गुमनामी बाबा का प्रदर्शन किया गया। डॉक्यूमेंट्री को सभागार में उपस्थित शिक्षकों और छात्रों ने देखा। प्रदर्शन के दौरान सभागार में शांति और अनुशासन बना रहा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का वक्तव्य

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल डॉक्टर जी के थपलियाल ने अपने संबोधन में स्वराज दिवस के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों की जानकारी साझा की और छात्रों से अध्ययन के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की बात कही।

कुलपति का संबोधन

कुलपति डॉक्टर प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता प्राप्ति से जुड़े ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों की भूमिका इतिहास और संस्कृति से जुड़ी जानकारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी का वक्तव्य

मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर शल्या राज ने कार्यक्रम के आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे आयोजन छात्रों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता में सहायक होते हैं।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

मुख्य अतिथि अमलन कुसुम घोष ने अपने संबोधन में अपने शोध और डॉक्यूमेंट्री निर्माण के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर शोध और दस्तावेजीकरण से नई पीढ़ी को तथ्यात्मक जानकारी मिलती है। उनका वक्तव्य श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक सुना।

सहभागिता

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। सुभारती डिफेंस अकादमी, पत्रकारिता विभाग और ललित कला संकाय की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। समापन के बाद उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने एक दूसरे से औपचारिक बातचीत की। आयोजन निर्धारित समय और व्यवस्था के अनुसार संपन्न हुआ।

समग्र आयोजन

स्वराज दिवस का यह आयोजन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तत्वों का संतुलित समावेश रहा।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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