📍 बैंकॉक ✍️ आसिफ़ ख़ान
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर पिछले दिनों भड़की झड़प में पहली बार तीन थाई नागरिकों की मौत हुई। दोनों देशों के बीच जुलाई में हुए युद्धविराम को ताज़ा हिंसा ने फिर चुनौती दी है। अमेरिका और वेटिकन ने सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है।
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर पिछले सप्ताह से जारी तनाव ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया, जब तीन थाई नागरिक तोप और मोर्टार की गोलाबारी में मारे गए। यह पहली बार है जब हालिया संघर्ष में सिविलियनों की मौत की पुष्टि हुई है। थाई फ़ौज ने बयान जारी करते हुए कहा कि बुधवार रात सीमा के पास स्थित कई चौकियों को भारी हथियारों से निशाना बनाया गया, जिससे स्थानीय आबादी में दहशत फैल गई। उसी रात कई घरों को भी नुकसान पहुँचा।
थाई अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत रविवार को हुई एक झड़प से हुई थी, जिसमें दो थाई सैनिक घायल हुए थे। उस झड़प के साथ ही जुलाई में हुआ शांति agreement प्रभावहीन हो गया था। यह agreement अमेरिकी mediational pressure और मलेशिया की facilitation के ज़रिए लागू हुआ था।
उधर, कंबोडिया की न्यूज़ साइट ‘फ़्रेश न्यूज़’ ने रिपोर्ट किया कि गुरुवार सुबह भी दोनों तरफ़ heavy shelling जारी रही। लोकल आबादी ने बताया कि रातभर गोलियों और धमाकों की आवाज़ें गूंजती रहीं। उर्दू बोलने वाले इलाक़ों के बहुत से परिवारों ने कहा कि हालात इतनी तेज़ी से बिगड़े कि वे अपने essential सामान भी साथ नहीं ले सके।
ताज़ा हिंसा में अब तक लगभग दो दर्जन लोगों की मौत की अनौपचारिक खबरें सामने आई हैं। साथ ही, दोनों देशों की सीमा के आसपास रहने वाले सैकड़ों हज़ार लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन किया है। कई लोग relatives के घरों में पहुँचे, जबकि बाक़ी लोग अस्थायी camps में शरण लेने को मजबूर हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह दोनों देशों के leadership से बात करेंगे और उन्हें conflict cease करने की सलाह देंगे। ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि दोनों पक्ष जुलाई के ceasefire agreement पर वापस लौटें, क्योंकि यह पूरा region peace और stability से जुड़ा है।”
राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि अगर थाईलैंड और कंबोडिया किसी समझौते तक नहीं पहुँचे तो America उनकी trade सुविधा पर reconsideration कर सकता है। यह वही दबाव है जिसने जुलाई में पाँच दिन की ख़ूनी लड़ाई के बाद दोनों देशों को अस्थायी शांति पर सहमत किया था।
वेटिकन सिटी ने भी ताज़ा संघर्ष पर गहरी चिंता जताई है। वहां के officials ने बताया कि पोप लियो चौदहवें ongoing violence से बेहद दुखी हैं और उन्होंने कहा कि क्षेत्र में innocent नागरिकों का displacement बहुत चिंताजनक है। पोप ने कहा कि वे दोनों देशों के नागरिकों के लिए प्रार्थना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे।
दोनों देशों की सेना लगातार एक–दूसरे पर आरोप लगा रही है। थाई फ़ौज का कहना है कि कंबोडिया ने कई checkpoints को निशाना बनाया और anti–personnel landmines बिछाई हैं, जिनसे सैनिक घायल हुए। कंबोडिया की तरफ़ से दावा है कि ये landmines पुराने गृहयुद्ध के समय की हैं और नए सिरे से नहीं लगाई गईं।
उधर, कंबोडिया ने आरोप लगाया कि थाईलैंड ने उसके 18 सैनिकों को सुरक्षित वापस नहीं लौटाया, जबकि थाईलैंड का कहना है कि border engagements में उसकी सैन्य चौकियाँ लगातार target की जा रही हैं।
सीमा के दोनों ओर आबादी में बड़ी बेचेनी है। कई लोग बताते हैं कि हालात कब बिगड़ जाएँ, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। थाई ग्रामीण जानकारी देते हैं कि गोलाबारी की आवाज़ें रुक–रुककर रातभर आती रहती हैं। उर्दू बोलने वाले स्थानीय बसने वाले कहते हैं कि उनके इलाक़ों में electricity भी कई बार बंद हो जाती है, जिससे हालात और भी डरावने लगते हैं।
कई families ने बताया कि school बंद हैं और markets भी restricted timings में खोले जा रहे हैं। Cross–border trade भी बेहद limited हो गया है।
थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिनन चार्नविराकुल ने कहा कि अभी तक अमेरिका की तरफ़ से बातचीत के लिए कोई आधिकारिक संपर्क नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि “public sentiment बहुत तीव्र है, और जब तक हमारी सीमा सुरक्षित नहीं होती, तब तक हम defensive action जारी रखेंगे।”
कंबोडिया सरकार ने भी कहा कि वह बात–चीत के लिए तैयार है लेकिन पहले दोनों देशों को heavy firing रोकनी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, region का सुरक्षा परिदृश्य fragile बना हुआ है और किसी भी छोटी घटना से बड़ा विवाद पैदा हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।