इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने तथा विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। इसे कानून बनने से पहले संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
रोम | 21 सितंबर 2026
By Mohd Haris
मेलोनी ने रखा नया स्कूल प्रस्ताव
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों को लेकर नई नीति का ऐलान किया है। उनके प्रस्ताव में स्कूलों के भीतर बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने तथा प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने की बात शामिल है।
मेलोनी ने यह घोषणा 20 सितंबर को रोम में अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के कार्यक्रम में की। प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे संसद की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
बुर्का और नकाब पर प्रस्तावित रोक
मेलोनी ने खास तौर पर बुर्का और नकाब का उल्लेख किया है। उन्होंने स्कूलों में चेहरा ढकने वाले इन परिधानों पर रोक लगाने की बात कही।
बुर्का पूरे शरीर और चेहरे को ढकता है, जबकि नकाब चेहरे को ढकता है और आम तौर पर आंखें दिखाई देती हैं। हिजाब इससे अलग है, क्योंकि इसमें चेहरा खुला रहता है।
मेलोनी के मौजूदा बयान में हिजाब पर प्रतिबंध की बात स्पष्ट रूप से नहीं कही गई है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में हिजाब का उल्लेख आया, लेकिन रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टिंग में प्रस्ताव को बुर्का और नकाब तक सीमित बताया गया है।
विदेशी छात्रों की संख्या पर कैप
प्रस्ताव का दूसरा अहम हिस्सा विदेशी छात्रों की संख्या से जुड़ा है। मेलोनी ने कहा है कि सरकार कानून के जरिए हर कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करेगी।
हालांकि प्रस्तावित नई सीमा कितनी होगी, इसका आंकड़ा अभी घोषित नहीं किया गया है।
इटली में पहले से विदेशी छात्रों की संख्या पर एक प्रशासनिक सीमा मौजूद है। 2010 के नियमों के तहत सामान्य तौर पर कक्षा और स्कूल में गैर-इतालवी छात्रों की संख्या 30% तक रखने की व्यवस्था की गई थी। व्यवहार में स्थानीय परिस्थितियों के कारण इस सीमा को कई जगह लचीले तरीके से लागू किया गया है।
इतालवी भाषा पर भी जोर
मेलोनी की योजना में विदेशी छात्रों के अभिभावकों से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है।
उनके मुताबिक जिन विदेशी छात्रों को इटली की स्कूल व्यवस्था में गंभीर एकीकरण संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, उनके माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
सरकार इस कदम को भाषा, शिक्षा और सामाजिक एकीकरण से जोड़ रही है।
मेलोनी ने क्या तर्क दिया
मेलोनी ने अपने भाषण में कहा कि इटली आने वाले लोगों को इतालवी भाषा सीखनी चाहिए, देश की संस्कृति समझनी चाहिए और कानूनों का सम्मान करना चाहिए।
विदेशी छात्रों की संख्या पर उन्होंने स्कूलों में भाषा सीखने और एकीकरण की चुनौती का हवाला दिया। उनका तर्क है कि यदि किसी कक्षा में कुछ छात्र इतालवी नहीं समझते हैं, तो शिक्षक और दूसरे छात्र उनके भाषा सीखने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यदि ऐसे छात्रों की संख्या बहुत अधिक हो जाए, तो उनके मुताबिक एकीकरण मुश्किल हो जाता है।
मौजूदा कानून क्या कहता है
इटली में बुर्का या नकाब पर देशव्यापी स्पष्ट प्रतिबंध पहले से मौजूद नहीं है।
1975 के एक कानून में ऐसे हेलमेट या कपड़ों पर रोक है जिनसे पहचान मुश्किल होती है, जब तक उसके पीछे उचित कारण न हो। 2008 में इटली की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधान के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की व्याख्या भी की थी। पहचान सत्यापन की जरूरत होने पर चेहरा दिखाना आवश्यक माना गया था।
यानी मेलोनी की प्रस्तावित नीति मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों के लिए अधिक स्पष्ट और सख्त कानूनी प्रावधान जोड़ सकती है।
कानून बनने के लिए आगे क्या होगा
मेलोनी के ऐलान के मुताबिक प्रस्ताव को पहले मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।
सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून बनने के लिए संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव को संसद में 60 दिनों के भीतर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
इसलिए फिलहाल इसे लागू हो चुका प्रतिबंध कहना सही नहीं होगा। अभी यह सरकार की प्रस्तावित नीति है।
इटली में विदेशी छात्र कितने हैं
फोंडाज़ियोने आईएसएमयू के आंकड़ों के मुताबिक इटली के स्कूलों में गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्र कुल नामांकन का लगभग 11.6% हैं।
इस आंकड़े में विदेशी नागरिकता वाले छात्र शामिल हैं। यह आंकड़ा सीधे तौर पर किसी छात्र की धार्मिक पहचान या उसके परिवार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को नहीं दर्शाता।
यही अंतर नीति की बहस में महत्वपूर्ण है। विदेशी नागरिकता और किसी विशेष धर्म या समुदाय से जुड़ाव एक ही बात नहीं है।
प्रस्ताव पर उठ रहे सवाल
मेलोनी की योजना को लेकर इटली में संवैधानिक और शिक्षा संबंधी बहस शुरू हो गई है।
संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ साल्वातोरे क्यूरेरी ने एएनएसए से कहा कि इटली के संविधान का अनुच्छेद 34 स्कूल को सभी के लिए खुला अधिकार मानता है। उनके अनुसार यदि नई व्यवस्था परिवारों और बच्चों को उनके रहने वाले क्षेत्र से दूर जाने के लिए मजबूर करने जैसी स्थिति पैदा करती है, तो उसके अनुपात और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठ सकते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं ने भी प्रस्ताव की आलोचना की है। ग्रीन एंड लेफ्ट एलायंस के सांसद एंजेलो बोनेली ने सरकार पर स्कूलों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।
यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे सरकार की नीति के स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यूरोप में चेहरा ढकने पर अलग-अलग नियम
यूरोप में चेहरे को ढकने वाले परिधानों को लेकर अलग-अलग देशों में अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं।
फ्रांस और बेल्जियम में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को ढकने पर व्यापक प्रतिबंध लागू हैं। ऑस्ट्रिया में भी सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों से जुड़े अलग नियम मौजूद हैं। वहीं जर्मनी में देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध के बजाय कुछ पेशों और राज्यों के स्तर पर अलग-अलग प्रतिबंध लागू हैं।
इसलिए इटली का प्रस्ताव यूरोप में मौजूद व्यापक बहस का हिस्सा है, लेकिन हर देश का संवैधानिक और कानूनी ढांचा अलग है।
असली विवाद किस बात पर है
मेलोनी सरकार इस नीति को भाषा सीखने, स्कूलों में एकीकरण और राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जोड़ रही है।
दूसरी ओर आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता, समान शिक्षा के अधिकार और विदेशी परिवारों के साथ भेदभाव के संभावित सवालों से जोड़ रहे हैं।
इन दोनों पक्षों के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रस्ताव की वास्तविक कानूनी भाषा और विदेशी छात्रों की नई अधिकतम सीमा अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसके अंतिम प्रभाव का आकलन प्रस्ताव के औपचारिक पाठ और संसद की बहस के बाद ही अधिक स्पष्ट होगा।
आगे की निगाह संसद पर
अब ध्यान इस बात पर है कि इतालवी मंत्रिमंडल प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी देता है और उसमें विदेशी छात्रों की सीमा कितनी तय की जाती है।
बुर्का और नकाब पर प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे, स्कूलों में इसके अनुपालन और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सवाल भी आगे की बहस का हिस्सा रहेंगे।
फिलहाल मेलोनी ने नीति की दिशा स्पष्ट कर दी है, लेकिन अंतिम कानूनी प्रावधान और उसके लागू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
निष्कर्ष
इटली में स्कूल, प्रवासन, भाषा और धार्मिक परिधान से जुड़ी बहस एक नए चरण में पहुंच गई है। जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने बुर्का और नकाब पर स्कूलों में रोक तथा विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की योजना सामने रखी है।
लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि यह अभी प्रस्ताव है, लागू कानून नहीं। विदेशी छात्रों की नई सीमा, प्रतिबंध का सटीक कानूनी दायरा और संसद की मंजूरी के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
आने वाले दिनों में इटली की संसद और संवैधानिक बहस यह तय करेगी कि प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ता है और स्कूलों में इसका वास्तविक असर क्या होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।