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इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कॉमेडियन पुलकित मणि ने नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। मनोज मुंतशिर ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

Mohammad Naved • 2026-09-22 11:57:53
इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कॉमेडियन पुलकित मणि ने नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। मनोज मुंतशिर ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कॉमेडियन पुलकित मणि की PM मोदी की मिमिक्री पर विवाद हुआ। मनोज मुंतशिर ने इसे लेकर राहुल गांधी और कार्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

Location | Date

इंदौर, मध्य प्रदेश | 22 सितंबर 2026

By Mohd Naved

इंदौर के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री मोदी की शैली और कुछ सार्वजनिक प्रसंगों की नकल करते हुए प्रस्तुति दी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उस दौरान मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम का वीडियो कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया था।

विवाद के केंद्र में मिमिक्री का वह हिस्सा है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति, बोलने के अंदाज और एक बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने से जुड़े पुराने प्रसंग का संदर्भ दिखाई देता है। इस प्रस्तुति के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने इसे राजनीतिक हास्य और मिमिक्री के तौर पर देखा।

मनोज मुंतशिर की प्रतिक्रिया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने इस विवाद पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि उन्होंने वीडियो में हास्य के बजाय ‘मसखरी’, ‘संवेदन-शून्यता’ और ‘बदतमीजी’ देखी। उन्होंने बुजुर्ग महिला को सम्मान देने वाले प्रसंग को मजाक का विषय बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई।

मुंतशिर ने अपने पोस्ट में राजनीतिक विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए मर्यादा के सवाल पर अपनी व्यक्तिगत राय रखी। उन्होंने लिखा कि विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके अनुसार मर्यादा से गिरना चारित्रिक पतन है। यह टिप्पणी मुंतशिर की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया है, इसे घटना के बारे में स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बीरबल, पंचतंत्र और तेनालीराम की कहानियों का संदर्भ भी दिया और राजनीतिक मिमिक्री करने वालों को लेकर आपत्ति दर्ज की।

राहुल गांधी की भूमिका को लेकर क्या सामने आया

इस मामले में एक अहम तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों में पुलकित मणि को प्रधानमंत्री मोदी की मिमिक्री करने वाला कलाकार बताया गया है। राहुल गांधी उस समय मंच पर मौजूद थे और मणि के साथ प्रस्तुति के दौरान संवाद करते दिखाई दिए। इसलिए रिपोर्टिंग में यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि मिमिक्री किसने की और राहुल गांधी की भूमिका क्या थी।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट ने कार्यक्रम को राहुल गांधी और पुलकित मणि की संयुक्त मंचीय प्रस्तुति के तौर पर पेश किया है। वहीं इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस द्वारा साझा किए गए वीडियो का हवाला देते हुए लिखा कि मणि ने राहुल गांधी के साथ स्किट में प्रधानमंत्री मोदी की मिमिक्री की।

इसलिए इसे सीधे तौर पर यह कहना कि राहुल गांधी ने स्वयं प्रधानमंत्री की मिमिक्री की, उपलब्ध स्रोतों की तुलना में अधिक व्यापक दावा होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी मौजूदगी और मणि के साथ मंचीय संवाद स्पष्ट रूप से दर्ज है।

बीजेपी की आपत्ति

वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और किरेन रिजिजू समेत बीजेपी नेताओं ने इस प्रस्तुति की आलोचना की। गोयल ने इसे प्रधानमंत्री को लेकर ‘चीप पॉलिटिकल थिएटर’ बताया, जबकि रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी की आलोचना की। बीजेपी नेताओं की आपत्ति खास तौर पर उस हिस्से पर थी जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां से जुड़े प्रसंग का मजाक बताया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘अपमान’, ‘असंवेदनशीलता’ या ‘मर्यादा का उल्लंघन’ जैसे शब्द राजनीतिक प्रतिक्रिया और मूल्यांकन हैं। इन्हें तथ्य के रूप में नहीं, संबंधित नेताओं के बयान के रूप में रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

कांग्रेस और दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया

विवाद पर कांग्रेस से जुड़े नेता राशिद अल्वी ने पुलकित मणि का बचाव किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इसे मिमिक्री बताया और कहा कि इसमें अपमान का उद्देश्य नहीं था। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी इस विवाद में राहुल गांधी का बचाव करते हुए राजनीतिक हास्य के लिए जगह होने की बात कही।

लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने भी मिमिक्री को लेकर सामने आई आलोचनाओं का जवाब दिया और प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयानों का संदर्भ देते हुए राजनीतिक व्यंग्य का पक्ष रखा। इस तरह विवाद में केवल एकतरफा प्रतिक्रिया नहीं रही, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों ने अलग-अलग दृष्टिकोण रखे।

‘छात्रों की गूंज’ का मूल एजेंडा क्या था

19 सितंबर का इंदौर कार्यक्रम मूल रूप से छात्रों के मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था पर संवाद के लिए आयोजित किया गया था। राहुल गांधी ने छात्रों से शिक्षा, परीक्षा, भर्ती और भविष्य से जुड़े सवालों पर बातचीत की। कार्यक्रम में छात्रों की ओर से एमपीपीएससी, नर्सिंग शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ को युवाओं और विद्यार्थियों से सीधे संवाद के अभियान के रूप में पेश किया था। इंदौर इस श्रृंखला का पांचवां कार्यक्रम था। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

यानी कार्यक्रम का मूल एजेंडा शिक्षा और युवाओं के मुद्दे थे, लेकिन मंच पर हुई राजनीतिक मिमिक्री ने इसके बाद पूरे आयोजन की सार्वजनिक चर्चा का एक बड़ा हिस्सा बदल दिया।

विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि

भारत में प्रधानमंत्री और दूसरे प्रमुख राजनीतिक नेताओं की मिमिक्री तथा राजनीतिक व्यंग्य लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। लोकतांत्रिक राजनीति में व्यंग्य सत्ता और विपक्ष दोनों की आलोचना का माध्यम रहा है। लेकिन जब किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हास्य सीधे किसी राजनीतिक व्यक्ति या उसके परिवार से जुड़े संवेदनशील प्रसंगों तक पहुंचता है, तो उसकी स्वीकार्यता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक मतभेद सामने आते हैं।

इस मामले में भी यही हुआ। एक पक्ष ने इसे राजनीतिक व्यंग्य के दायरे में देखा, जबकि बीजेपी नेताओं और मनोज मुंतशिर जैसे आलोचकों ने इसे गरिमा और सार्वजनिक संवाद के मानकों से जोड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं दर्ज हैं।

पुलकित मणि को लेकर भी विवाद

मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, विवाद के बाद कॉमेडियन पुलकित मणि ने नोएडा, लखनऊ और कानपुर में प्रस्तावित अपने कुछ शो रद्द कर दिए। रिपोर्ट में इसके पीछे उन्हें मिली कथित धमकियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया गया है।

यहां भी ‘धमकी’ से जुड़ी जानकारी को कथित तौर पर ही रिपोर्ट करना उचित है, जब तक संबंधित मामलों में पुलिस कार्रवाई या स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध न हो।

घटना की टाइमलाइन

19 सितंबर 2026 को इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसका फोकस छात्रों के सवाल और शिक्षा व्यवस्था था।

इसी कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया।

20 सितंबर को बीजेपी नेताओं की आलोचना सामने आई और मिमिक्री को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हुई।

इसके बाद मनोज मुंतशिर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज की। उनके बयान ने मनोरंजन जगत से जुड़े सार्वजनिक चेहरों की प्रतिक्रियाओं को भी इस विवाद का हिस्सा बना दिया।

21 सितंबर तक विवाद के बीच पुलकित मणि के कुछ शो रद्द होने की रिपोर्ट सामने आई।

22 सितंबर को भी इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।

असली सवाल क्या है

इस पूरे प्रकरण में तीन अलग-अलग मुद्दों को एक साथ नहीं मिलाना चाहिए। पहला, कार्यक्रम में हुई मिमिक्री एक दर्ज घटना है। दूसरा, उस मिमिक्री को लेकर राजनीतिक दलों और सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। तीसरा, मिमिक्री की मर्यादा या स्वीकार्यता पर फैसला एक मूल्य-आधारित बहस है, जिसे तथ्यात्मक रिपोर्टिंग में संबंधित पक्षों के नजरिए के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी की मंच पर मौजूदगी भी दर्ज है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना अधिक सटीक है कि पुलकित मणि ने मिमिक्री की और राहुल गांधी उस प्रस्तुति में मंच पर मौजूद थे। इस अंतर को बनाए रखना खबर की क्रेडिबिलिटी के लिए जरूरी है।

आगे क्या

फिलहाल विवाद का मुख्य असर राजनीतिक बयानबाजी, सोशल मीडिया बहस और कॉमेडियन के कार्यक्रमों पर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस मिमिक्री को लेकर किसी औपचारिक आपराधिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं मिली है।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित राजनीतिक दल, कलाकार और प्रशासन इस विवाद पर कोई औपचारिक कदम उठाते हैं या नहीं। फिलहाल इसे राजनीतिक व्यंग्य, सार्वजनिक मर्यादा और चुनावी-सियासी संवाद की सीमाओं पर चल रही बहस के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री ने छात्रों से जुड़े मूल एजेंडे के साथ एक नया राजनीतिक विवाद जोड़ दिया है। पुलकित मणि की प्रस्तुति के बाद बीजेपी नेताओं और अन्य सार्वजनिक हस्तियों ने आलोचना की, जबकि कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने इसे मिमिक्री और राजनीतिक हास्य के दायरे में रखा।

मनोज मुंतशिर की प्रतिक्रिया इस विवाद में एक व्यक्तिगत और सार्वजनिक टिप्पणी है। उनकी आपत्ति को रिपोर्ट करना जरूरी है, लेकिन उसे निष्पक्ष रिपोर्टिंग में अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध तथ्यों में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि मिमिक्री हुई, राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे और इसके अर्थ तथा मर्यादा को लेकर राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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