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गाजा पर कतर के PM का कड़ा बयान, कहा- तबाही को किसी तरह जायज नहीं ठहरा सकते

Harish Qureshi • 2026-09-30 11:56:28
गाजा पर कतर के PM का कड़ा बयान, कहा- तबाही को किसी तरह जायज नहीं ठहरा सकते

कतर के PM शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने गाजा में जारी तबाही की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इजरायल पर युद्धविराम प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया।


दोहा, कतर | 29 सितंबर 2026

By Mohd Haris


गाजा में जारी तबाही पर कतर के PM का कड़ा बयान


कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने गाजा की स्थिति पर इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। 29 सितंबर 2026 को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने गाजा में जारी तबाही को लेकर कहा कि इसे किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता। उनके बयान में युद्धविराम और मध्यस्थता की कोशिशों का भी जिक्र रहा।


कतर लंबे समय से गाजा संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। कतर सरकार के मुताबिक, दोहा ने मिस्र और अमेरिका के साथ मिलकर युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिशों में भूमिका निभाई है।


कतर PM ने क्या कहा


शेख मोहम्मद ने गाजा में इजरायली कार्रवाई को लेकर बेहद सख्त रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि गाजा में जिस स्तर की तबाही हुई है, उसे किसी भी तर्क के आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने मौजूदा हालात को युद्धविराम समझौते से जुड़े दायित्वों के संदर्भ में भी उठाया।


कतर के प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोहा गाजा में युद्धविराम को कायम रखने और समझौते के अगले चरण को आगे बढ़ाने की कोशिशों में सक्रिय है।


युद्धविराम प्रयासों पर भी उठाए सवाल


कतर का कहना है कि गाजा में मध्यस्थता की उसकी कोशिशों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही कतर की मध्यस्थता को इजरायल की ओर से कमजोर किया गया। यह उनका राजनीतिक आकलन और आरोप है, जिसे इजरायल की प्रतिक्रिया के साथ देखा जाना जरूरी है।


कतर ने 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में भी इजरायल से गाजा युद्धविराम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की अपील की थी। कतर ने कहा था कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन को रोकना और फिलिस्तीनियों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।


गाजा पर कतर का आधिकारिक रुख


कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उद्घाटन सत्र में गाजा की स्थिति को लेकर कड़ा बयान दिया था। उन्होंने गाजा में मानवीय संकट और नागरिकों की पीड़ा का मुद्दा उठाया तथा स्थायी शांति के लिए युद्धविराम और राजनीतिक समाधान पर जोर दिया।


कतर ने अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं की रक्षा और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच की मांग भी की है।


कतर की मध्यस्थता क्यों अहम है


गाजा संघर्ष में कतर की भूमिका केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रही है। दोहा ने इजरायल, हमास और अमेरिका के बीच वार्ता में मध्यस्थ के तौर पर काम किया है। कतर के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा था कि मध्यस्थता के जरिए बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई तथा गाजा तक मानवीय सहायता पहुंचाने में परिणाम मिले हैं।


इसी वजह से गाजा में किसी भी नए युद्धविराम या समझौते की बातचीत में कतर की भूमिका को अहम माना जाता है।


कतर ने अंतरराष्ट्रीय कानून का मुद्दा उठाया


29 सितंबर को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में कतर के स्थायी प्रतिनिधि ने भी गाजा और वेस्ट बैंक में जारी इजरायली कार्रवाइयों की आलोचना की। कतर ने नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने, मानवीय संकट और जबरन विस्थापन की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर उल्लंघन के रूप में वर्णित किया।


यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कतर की ओर से इस्तेमाल की गई कानूनी और राजनीतिक भाषा उसके आधिकारिक रुख को दर्शाती है। किसी कार्रवाई के अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अंतिम कानूनी निर्धारण के लिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होते हैं।


गाजा संकट पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश


कतर लगातार यह कहता रहा है कि गाजा में स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक प्रक्रिया से हासिल होना चाहिए। उसका आधिकारिक रुख 2-स्टेट समाधान और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के समर्थन पर आधारित है।


कतर ने यह भी कहा है कि गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच, युद्धविराम और बंधकों की रिहाई किसी भी स्थायी राजनीतिक समाधान की बुनियादी शर्तों में शामिल हैं।


आगे क्या होगा


कतर के प्रधानमंत्री का ताजा बयान गाजा पर दोहा के लगातार सख्त होते कूटनीतिक रुख को दर्शाता है। लेकिन बयान के साथ सबसे बड़ी चुनौती युद्धविराम समझौते को जमीन पर लागू कराना और मानवीय सहायता की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।


आने वाले दिनों में गाजा में सैन्य गतिविधियों, युद्धविराम की स्थिति और मध्यस्थता वार्ता पर अंतरराष्ट्रीय निगाहें रहेंगी। कतर की भूमिका भी इसी कूटनीतिक प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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