370 रुपए बिरयानी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, प्रणीत मोरे की याचिका पर केंद्र और 2 राज्यों को नोटिस
Wasi Siddiqui
•
2026-09-21 16:53:53
370 रुपए बिरयानी विवाद में प्रणीत मोरे ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा से जवाब मांगा।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 21 सितंबर 2026 ✍️ Wasi Siddiqui
370 रुपए बिरयानी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
370 रुपए बिरयानी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मोरे ने अपने खिलाफ अलग-अलग जगह दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की है।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
क्या मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे प्रणीत मोरे
प्रणीत मोरे की याचिका का मुख्य मुद्दा अलग-अलग राज्यों में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ना है। उनके वकील की ओर से अदालत में कहा गया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज मामले एक ही घटनाक्रम से जुड़े हैं, इसलिए इन मामलों की अलग-अलग कार्यवाही से बचने के लिए इन्हें एक साथ किया जाना चाहिए।
मोरे की ओर से यह भी कहा गया कि वह मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनकी मांग मामले को खत्म कराने की बजाय प्राथमिकी की कार्यवाही को एक जगह समेकित करने से जुड़ी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
मामला गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़ा है। शो के दौरान दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने डेट के दौरान 370 रुपए की चिकन बिरयानी पर खर्च का जिक्र करते हुए महिला से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
वीडियो सामने आने के बाद इस बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। विवाद का केंद्र केवल दर्शक की टिप्पणी नहीं रहा, बल्कि शो के दौरान उस टिप्पणी पर कॉमेडियन की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठे।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लिया था संज्ञान
विवाद बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को तलब किया था और हरियाणा पुलिस से कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी थी। आयोग ने महिलाओं की गरिमा, सहमति और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी चिंता जताई थी।
इसके बाद मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई भी हुई। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मोरे, जांगड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। बाद में गुरुग्राम में भी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
मोरे की ओर से माफी का हवाला
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोरे के वकील ने अदालत को बताया कि मोरे ने विवाद को लेकर अलग-अलग मंचों पर माफी मांगी है। राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष भी माफी दिए जाने की बात अदालत को बताई गई।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि विवादित वीडियो को बाद में हटा दिया गया था। वकील ने अदालत में दावा किया कि वीडियो प्रकाशित किए जाने के समय मोरे यात्रा पर थे और उनकी जनसंपर्क टीम ने उनकी अनुमति के बिना उसे प्रकाशित किया था। यह मोरे की ओर से अदालत में रखा गया पक्ष है।
अदालत ने अभी क्या फैसला दिया है
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्राथमिकी को क्लब करने या किसी मामले को रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। आगे की कार्यवाही संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
यह अंतर अहम है। नोटिस जारी होना याचिकाकर्ता को अंतिम राहत मिलना नहीं है। अदालत ने फिलहाल संबंधित सरकारों का पक्ष जानने की प्रक्रिया शुरू की है।
मामला केवल कॉमेडी विवाद तक सीमित नहीं
370 रुपए बिरयानी विवाद ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्टैंड-अप कॉमेडी और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर व्यापक बहस को भी जन्म दिया। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका में स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री के लिए व्यापक नियामकीय ढांचे की मांग का भी उल्लेख किया गया था। उस याचिका में मोरे के शो से जुड़े विवाद को उदाहरण के तौर पर रखा गया था।
हालांकि मौजूदा सुनवाई का तत्काल मुद्दा नियामकीय ढांचा नहीं, बल्कि मोरे के खिलाफ दर्ज अलग-अलग प्राथमिकी की कार्यवाही को एक साथ करने की मांग है।
आगे क्या होगा
अब केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि अलग-अलग प्राथमिकी को एक साथ करने की मांग पर आगे क्या आदेश दिया जाए।
मामले की अगली कार्यवाही इस बात पर महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित सरकारें प्राथमिकी की स्थिति, अधिकार क्षेत्र और एक ही घटनाक्रम से जुड़े मामलों की समानता को लेकर क्या रुख रखती हैं।
विवाद से जुड़े कानूनी पहलू
इस मामले में एक तरफ अभिव्यक्ति और हास्य की सीमाओं को लेकर सवाल उठे हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं की गरिमा, सहमति और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से जुड़े कानूनी प्रावधान भी चर्चा में आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के सामने फिलहाल मुख्य कानूनी सवाल यह है कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए। अदालत का नोटिस इस प्रक्रिया में संबंधित सरकारों का पक्ष दर्ज करने की दिशा में अगला कदम है।
अब निगाह सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर
370 रुपए बिरयानी विवाद में सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा कार्रवाई ने मामले को एक नए कानूनी चरण में पहुंचा दिया है। प्रणीत मोरे की ओर से प्राथमिकी को एक साथ करने की मांग रखी गई है, जबकि अब केंद्र और दोनों राज्य सरकारों का जवाब अदालत के सामने आएगा।
फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए मामले में आगे की तस्वीर संबंधित पक्षों के जवाब और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
वीडियो देखें
ADVERTISEMENT
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।