‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ रिव्यू: बिहार की लोककथा, छठ और रहस्य के बीच फंसी फिल्म
Mohammad Naved
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2026-09-26 13:39:05
Location | Date
मुंबई | 26 सितंबर 2026
By Mohd Naved
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म का आधार बिहार की लोककथाओं, वन देवी से जुड़ी मान्यताओं, एक रहस्यमयी जंगल और इंसानी लालच के बीच टकराव पर रखा गया है। दीपक कुमार मिश्रा के निर्देशन में बनी यह फिल्म लोकविश्वास और सुपरनैचुरल फैंटेसी को मुख्यधारा की हिंदी सिनेमा भाषा में पेश करने की कोशिश करती है।
फिल्म को लेकर शुरुआती समीक्षाओं में एक बात सामने आती है। इसकी लोककथा आधारित दुनिया, वातावरण और विजुअल प्रस्तुति को कई समीक्षकों ने उल्लेखनीय माना, जबकि पटकथा और दूसरे हिस्से की गति को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी सामने आई हैं। इसलिए ‘द व्वान’ की समीक्षा को केवल स्टारकास्ट या विजुअल स्केल के आधार पर देखना पर्याप्त नहीं होगा।
जरूरी तथ्य
‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा मुख्य भूमिका में हैं और तमन्ना भाटिया उनके साथ प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, श्वेता तिवारी और अनुप सोनी समेत कई कलाकार भी दिखाई देते हैं। निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है, जबकि कहानी और स्क्रीनप्ले से जुड़े क्रेडिट्स में अरुणाभ कुमार समेत अन्य लेखक शामिल हैं।
फिल्म का जॉनर फैंटेसी, मिस्ट्री और थ्रिलर के आसपास रखा गया है। इसकी कहानी एक ऐसे शहरी व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पुश्तैनी गांव और वहां मौजूद निषिद्ध जंगल से जुड़े स्थानीय विश्वासों को स्वीकार नहीं करता।
कहानी का मुख्य आधार
सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार ऋषि एक तर्कवादी और शहरी पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है। कहानी उसे बिहार स्थित अपने पुश्तैनी गांव तक ले जाती है। वहां जंगल और वन देवी से जुड़ी पुरानी मान्यताएं उसके सामने आती हैं।
फिल्म का मूल संघर्ष आधुनिक तर्क और स्थानीय लोकविश्वास के बीच रखा गया है। जंगल को लेकर गांव में कई तरह की मान्यताएं हैं और उसके भीतर जाने को लेकर एक स्पष्ट निषेध मौजूद है। कहानी आगे बढ़ते हुए इसी निषेध, मान्यता और रहस्य को सुपरनैचुरल संघर्ष में बदलती है।
बिहार की लोककथा फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा
‘द व्वान’ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में बिहार की लोककथा को कहानी के केंद्र में रखना शामिल है। फिल्म के प्रचार और सार्वजनिक रिपोर्टों में पटना के निकट बिहटा स्थित वन देवी मंदिर और उससे जुड़ी स्थानीय परंपराओं का भी उल्लेख हुआ है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहटा के निकट वन देवी मंदिर सदियों पुरानी स्थानीय मान्यताओं और लोकपरंपराओं से जुड़ा हुआ है। मंदिर पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बताया गया है।
यही सांस्कृतिक संदर्भ फिल्म की दुनिया को एक स्थानीय आधार देता है। हालांकि फिल्म की कथा एक सिनेमाई फैंटेसी है, इसलिए इसे बिहार की वास्तविक लोकपरंपराओं का दस्तावेज मानना उचित नहीं होगा।
छठ का सांस्कृतिक संदर्भ
फिल्म में छठ का भी महत्वपूर्ण संदर्भ है। सितंबर 2026 में रिलीज हुए ‘छठी मैया’ गीत के बाद फिल्म और छठ परंपरा के संबंध को लेकर चर्चा हुई। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बिहार और झारखंड के लोगों की प्रतिक्रियाओं का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, गीत में छठ की भक्ति और सांस्कृतिक भावना दिखाई देती है, लेकिन कुछ परंपरागत पहलुओं को सिनेमाई तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा को फिल्मी कथा में इस्तेमाल करने और वास्तविक अनुष्ठानिक परंपरा के पालन में फर्क होता है। ‘द व्वान’ को इसी संदर्भ में एक फैंटेसी फिल्म के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।
फिल्म की समीक्षा में क्या सामने आया
25 सितंबर को रिलीज के बाद अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने फिल्म की समीक्षा प्रकाशित की। टाइम्स ऑफ इंडिया ने फिल्म को बिहार की लोककथाओं और वन देवी से जुड़ी कहानी के आधार पर बनी फैंटेसी मिस्ट्री बताया और इसकी शुरुआत में मौजूद संभावनाओं का उल्लेख किया। उसी समीक्षा में पटकथा के असमान होने की आलोचना भी की गई।
पिंकविला की समीक्षा में भी फिल्म की शुरुआत को मजबूत बताया गया, जबकि दूसरे हिस्से में कहानी के execution को लेकर सवाल उठाए गए। समीक्षा में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का भी उल्लेख किया गया।
एबीपी लाइव की समीक्षा ने भी फिल्म की शुरुआती पकड़ और बाद के हिस्से में कहानी के बिखरने के बीच अंतर की ओर इशारा किया।
दूसरी तरफ, कुछ समीक्षाओं में फिल्म के लोककथा वाले आधार और विजुअल एंबिशन को सकारात्मक पहलू माना गया। मिड-डे ने फिल्म को लोककथा, आस्था, रहस्य और फैंटेसी के मिश्रण के रूप में देखा।
इससे स्पष्ट है कि शुरुआती क्रिटिकल रिस्पॉन्स एकतरफा नहीं है। फिल्म के विजुअल और लोककथा आधारित संसार की तारीफ के साथ-साथ स्क्रीनप्ले और दूसरे हिस्से को लेकर आलोचना भी सामने आई है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार
सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार फिल्म के केंद्रीय संघर्ष को आगे बढ़ाता है। ऋषि शुरुआत में स्थानीय धार्मिक और लोकविश्वासों को तर्क की कसौटी पर देखता है। लेकिन कहानी उसे ऐसे घटनाक्रम में ले जाती है जहां उसका शुरुआती दृष्टिकोण चुनौती के सामने आता है।
यह बदलाव फिल्म के फैंटेसी पक्ष का अहम हिस्सा है। रॉटन टोमेटोज की फिल्म जानकारी भी मुख्य किरदार को एक तर्कवादी शहरी व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है, जो निषिद्ध जंगल से जुड़े अलौकिक घटनाक्रम में फंस जाता है।
तमन्ना भाटिया की भूमिका
तमन्ना भाटिया फिल्म में ऋषि के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उपलब्ध समीक्षा सामग्री के अनुसार, उनका किरदार कहानी के भावनात्मक और व्यक्तिगत पक्ष से जुड़ा हुआ है।
पिंकविला की समीक्षा में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की केमिस्ट्री को फिल्म के काम करने वाले पहलुओं में शामिल किया गया है।
लोकविश्वास बनाम आधुनिक तर्क
‘द व्वान’ का केंद्रीय विचार केवल जंगल और किसी अलौकिक शक्ति तक सीमित नहीं है। इसकी कहानी आधुनिक तर्क और पीढ़ियों से चले आ रहे लोकविश्वास के बीच तनाव पैदा करती है।
यह विषय भारतीय सिनेमा में नया नहीं है, लेकिन बिहार की स्थानीय लोककथा को आधार बनाना फिल्म को अलग सांस्कृतिक संदर्भ देता है। फिल्मफेयर ने भी फिल्म के आधार में मिथक, हॉरर, एडवेंचर और एक्शन के मिश्रण का उल्लेख किया है।
फिल्म की चुनौती यह है कि लोककथा को बड़े पैमाने की फैंटेसी के साथ जोड़ते समय कहानी का भावनात्मक और कथात्मक संतुलन बना रहे। उपलब्ध समीक्षाओं में इसी बिंदु पर अलग-अलग राय दिखाई देती है।
फिल्म की प्रमुख कमजोरी
शुरुआती समीक्षाओं का सबसे आम आलोचनात्मक बिंदु पटकथा है। कई समीक्षाओं में कहा गया है कि फिल्म का पहला हिस्सा वातावरण और रहस्य स्थापित करता है, लेकिन दूसरे हिस्से में कथा की पकड़ कमजोर होती है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इसे एक ऐसी लोककथा आधारित कहानी बताया जिसमें शुरुआती संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन असमान लेखन फिल्म की गति और प्रभाव को प्रभावित करता है।
यह एक समीक्षा-आधारित निष्कर्ष है, न कि कोई वस्तुनिष्ठ तथ्य। अलग दर्शकों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
फिल्म की सांस्कृतिक प्रासंगिकता
बिहार की लोककथाओं और स्थानीय परंपराओं को बड़े हिंदी सिनेमा के केंद्र में लाना फिल्म की महत्वपूर्ण विशेषता है। वन देवी से जुड़ी मान्यताओं और छठ जैसे सांस्कृतिक संदर्भों ने रिलीज से पहले ही फिल्म के प्रति रुचि पैदा की।
फिल्म की टीम ने सितंबर 2026 में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मुलाकात की थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने छठ पूजा की परंपरा का पालन किया और फिल्म में बिहार की परंपराओं को सामने लाने पर चर्चा की।
रिलीज और मौजूदा स्थिति
फिल्म 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसकी अवधि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर करीब 2 घंटे 15 मिनट से 2 घंटे 25 मिनट के बीच दर्ज की गई है, इसलिए अवधि के आंकड़े में स्रोतों के बीच अंतर दिखाई देता है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 2 घंटे 45 मिनट की अवधि दर्ज की है, जबकि रॉटन टोमेटोज 2 घंटे 25 मिनट बताता है।
ऐसे में प्रकाशन के लिए फिल्म की रनटाइम को लेकर किसी एक आंकड़े को निर्णायक रूप से इस्तेमाल करने के बजाय आधिकारिक थिएटर लिस्टिंग को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म की शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 25 सितंबर को सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में फिल्म के लोककथा पक्ष, विजुअल और सुपरनैचुरल तत्वों की तारीफ करने वाले दर्शकों का उल्लेख किया।
दूसरी ओर, पेशेवर समीक्षाओं में पटकथा और क्लाइमैक्स को लेकर आलोचना भी सामने आई है। इसलिए शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं को पूरे दर्शक वर्ग का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।
आगे क्या देखना होगा
‘द व्वान’ के लिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन, दर्शकों की लंबी अवधि की प्रतिक्रिया और वीकेंड के बाद समीक्षात्मक रुझान होंगे।
फिल्म की लोककथा आधारित थीम उसे सामान्य शहरी फैंटेसी से अलग पहचान देती है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि दर्शक फिल्म की कथा, सांस्कृतिक प्रस्तुति और सुपरनैचुरल तत्वों को किस तरह स्वीकार करते हैं।
‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ बिहार की लोककथा, वन देवी की मान्यता, छठ के सांस्कृतिक संदर्भ और सुपरनैचुरल फैंटेसी को एक बड़े हिंदी सिनेमाई कैनवास पर रखने की कोशिश करती है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की मौजूदगी फिल्म को मुख्यधारा का स्टार पावर देती है, जबकि दीपक कुमार मिश्रा का निर्देशन लोककथा को फैंटेसी-थ्रिलर के रूप में पेश करता है।
शुरुआती समीक्षाओं में फिल्म के विजुअल संसार और लोककथा वाले आधार को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां हैं। साथ ही पटकथा, दूसरे हिस्से की गति और कहानी के execution पर आलोचना भी दर्ज हुई है।
इसलिए ‘द व्वान’ को केवल एक स्टार-स्टडेड बॉलीवुड फिल्म के रूप में देखना इसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को सीमित कर देगा। इसकी असली पहचान बिहार की लोककथा को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश और उस कोशिश के सिनेमाई execution में है।
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।