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ब्रह्मांड में दो ऐसे ग्रह हैं जहां हीरे की बारिश होती है

None 2024-07-18 09:02:37
ब्रह्मांड में दो ऐसे ग्रह हैं जहां हीरे की बारिश होती है
हीरे की बारिश होना ये सुनने में आपको थोड़ा अजीब जरूर लगेगा लेकिन ये सच है

New Delhi ,(Shah Times) । ग्रहों की संरचना पृथ्वी से बिल्कुल अलग तो है ही, साथ ही अगर इनके आकार की बात करें तो नेपच्यून ग्रह पृथ्वी से 15 गुना बड़ा है और यूरेनस 17 गुना तक बड़ा है। पृथ्वी और ग्रहों को जलवायु भी अलग होती हैं। बल्कि कई ग्रहों की बाते तो आपको हैरान कर देगी

धरती पर लोग अक्सर मौसम को लेकर शिकायतें करते हैं। यहां बाढ़, सूखा, गर्मी और सर्दी देखने को मिलती है। जिसके कारण अलग-अलग शिकायतें की जाती हैं। वहीं बारिश पर आएं तो उसे लेकर भी सबकी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया रहती है। कोई उसके नीचे भीगना पसंद करता है तो कोई बीमारी की बात कह उससे बचने लगता है। लेकिन चाहे जो हो, हर ग्रह की अपनी खास विशेषता जरूर होती है। आज हम ऐसे ही दो ग्रह के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जहां का मौसम इतना खास है कि वहां हीरे की बारिश होने लगती है। इनपर हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों का दबदबा है।

ग्रहों पर हीरे की बारिश होना ये सुनने में आपको थोड़ा अजीब जरूर लगेगा लेकिन ये सच है। बता दें की सौर मंडल के दूसरे छोर पर दो बड़े ग्रह नेपच्यून और यूरेनस मौजूद हैं। जो गैसों से बने हैं। वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि इन दोनों ग्रहों के अंदरूनी हिस्सों में वातावरणीय दबाव काफी अधिक है, जिसके कारण हाइड्रोजन और कार्बन के बॉन्ड टूट जाते हैं. इसी वजह से यहां हीरे बरसने लगते हैं।

आपको बता दें की इनकी संरचता तो पृथ्वी से अलग है ही, साथ ही अगर इनकीआकार की बात करें तो नेपच्यून पृथ्वी के 15 गुना बड़ा है और यूरेनस 17 गुना तक बड़ा है। वैज्ञानिकों के हाल ही में हुए एक प्रयोग में इस बात की पुष्टि भी हुई थी कि इन ग्रहों पर हीरे की बारिश होती है।

कैसे होती है हीरे की बारिश

नेपच्यून ओर यूरेनस ग्रहों पर हीरे की बारिश के पीछे का कारण काफी आसान है। जैसे हमारे वातावरण में जो वायुमण्डलीय दबाव होता है, उसके जरिए जल वाष्प यानी वॉटर वेपर का कन्डेंशन होता है और इसी तरह बादल बारिश और ओले का रूप लेकर धरती पर बरसते हैं। ठीक उसी प्रकार नेपच्यून और यूरेनस में देखने को मिलता है। यहां वातावरण में मिथेन है और उसपर दबाव बनाने पर हाइड्रोजन अलग हो जाता है, जिसके बाद कार्बन हीरे की शक्ल ले लेता है। नेपच्यून ग्रह की बात करें तो यह धरती से सबसे अधिक दूरी पर है और यहां का तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस नीचे तक रहता है।

हवा चलने की स्पीड होती हैं तेज

दरअसल यहां मीथेन गैस जमी हुई है, जिसके चलते उसी के बादल उड़ते हैं और हवा की रफ्तार किसी भी अन्य ग्रह के मुकाबले काफी तेज होती है। यहां की सतह पूरी तरह से समतल है। दरअसल नेपच्यून में मीथेन की तेज सुपरसोनिक हवाओं को रोकने के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते यहां 1500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती हैं। यहां के वायुमंडल में संघनित कार्बन है, जिसके कारण यहां हीरे की बारिश होती है। लेकिन यहां के बेशकीमती हीरों से इंसानों को कोई लाभ नहीं है। क्योंकि यहां की ठंड से बच पाना काफी मुश्किल है और यहां तक पहुंचना तो उससे भी ज्यादा कठिन होता है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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