काठमांडू, नेपाल | 26 सितंबर 2026
By Mohd Haris
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ और उससे जुड़ी तबाही को एक महीना होने जा रहा है, लेकिन हजारों परिवारों को अब तक अपने लापता परिजनों के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। आपदा ने रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और ट्रिशूली नदी के पूरे कॉरिडोर में बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया।
21 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 5,700 लोग अब भी लापता थे। एपी की एक हालिया रिपोर्ट में लापता लोगों की संख्या 6,150 बताई गई है। अलग-अलग तारीखों और सरकारी अपडेट में आंकड़े बदलते रहे हैं, इसलिए लापता लोगों की संख्या को ताजा आधिकारिक सत्यापन के साथ देखना जरूरी है।
भोटेकोशी बाढ़ ने कैसे मचाई तबाही
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ ने भोटेकोशी और ट्रिशूली नदी तंत्र के आसपास बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। तेज बहाव के साथ पानी, पत्थर, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर आया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लेशियर के ढहने से पैदा हुए मलबे और पानी ने पर्वतीय इलाकों में कई बस्तियों तथा बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया। इसका असर नेपाल-चीन सीमा से जुड़े इलाकों तक भी पहुंचा।
हाइड्रोपावर सुरंगें बनीं सबसे बड़ी चुनौती
बचाव अभियान में सबसे कठिन काम हाइड्रोपावर परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में फंसे लोगों का पता लगाना है। मोटी मिट्टी, चट्टानों और मलबे ने कई सुरंगों को बंद कर दिया है।
23 सितंबर को नेपाल के ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने संसद में बताया कि विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं और संबंधित संरचनाओं में 800 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इनमें 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 439 लोग शामिल हैं।
मंत्री के अनुसार, अपर त्रिशूली-1 परियोजना में बाढ़ से पहले 1,433 लोग काम कर रहे थे। इनमें 955 लोगों को बचाया गया या बाद में उनसे संपर्क हुआ, जबकि 439 लोग अब भी लापता बताए गए। इस परियोजना की सुरंग से 39 शव बरामद किए जा चुके हैं।
सुरंगों में मिले शव, तलाश अभी जारी
बचाव टीमों ने सितंबर में कई हाइड्रोपावर सुरंगों से शव बरामद किए हैं। 18 सितंबर को अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग से छह शव मिले थे। नेपाली सेना के मुताबिक, शव स्टील रिइन्फोर्समेंट के बीच फंसे मिले और उन्हें गैस कटर तथा अन्य रेस्क्यू उपकरणों की मदद से निकाला गया।
रिपोर्ट किया कि बचाव दल सुरंगों में ड्रिलिंग, नियंत्रित विस्फोट और भारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई जगह मलबा इतना अधिक है कि अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है।
लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव क्यों
बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बदलती रही है। शुरुआती दिनों में सरकार ने लगभग 4,200 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। सितंबर की शुरुआत में यह संख्या 5,000 से ऊपर पहुंची। 16 सितंबर को रॉयटर्स ने नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के हवाले से करीब 5,200 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी।
इस बदलाव का एक कारण खोज और पहचान प्रक्रिया का लगातार अपडेट होना है। कई लोग बाद में संपर्क में आए, जबकि कुछ शवों और मानव अवशेषों की पहचान अभी बाकी है।
नेपाल सरकार ने डीएनए सैंपलिंग भी शुरू की। 16 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने 1,206 शवों से और 1,889 लापता लोगों के परिजनों से डीएनए नमूने लिए थे। उस समय केवल 105 शवों की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंपा गया था।
ज्यादातर शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती
आपदा के बाद बरामद मानव अवशेषों की पहचान करना भी राहत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कई शव पूरी स्थिति में नहीं मिले हैं, जबकि कुछ अवशेष लंबे समय तक मलबे और पानी में रहने के कारण पहचान के लिए कठिन स्थिति में हैं।
नेपाल पुलिस और फोरेंसिक टीमों ने डीएनए मिलान के जरिए परिवारों को आधिकारिक जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे उन परिवारों को भी जवाब मिलने की उम्मीद है जिनके सदस्य अब तक लापता हैं।
परिवारों की परेशानी बढ़ती जा रही
लापता लोगों के परिवारों के लिए समय बीतना सबसे कठिन स्थिति बनता जा रहा है। काठमांडू में अस्पतालों और संबंधित सरकारी केंद्रों के आसपास परिवार अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर जानकारी तलाशते रहे हैं।
काठमांडू पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि कुछ परिवार उन लोगों के अंतिम मोबाइल सिग्नल, अस्पतालों की सूची और बरामद शवों की तस्वीरों के आधार पर अपने रिश्तेदारों का सुराग खोज रहे हैं। हालांकि, मोबाइल नेटवर्क से किसी व्यक्ति की मौजूदगी की निश्चित पुष्टि करना संभव नहीं है।
कुछ परिवारों ने शव नहीं मिलने के बावजूद धार्मिक अंतिम संस्कार भी शुरू कर दिए हैं। लेकिन शव या कानूनी रूप से मान्य मृत्यु प्रमाणन न होने की स्थिति में मुआवजे, बीमा और अन्य अधिकारों से जुड़े मामले जटिल हो रहे हैं।
विदेशी नागरिक भी लापता
आपदा में नेपाल के नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। 16 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट में करीब 5,200 लापता लोगों में 636 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए थे।
नेपाल के पर्यटन और सीमा क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की आवाजाही अधिक होने के कारण पहचान प्रक्रिया में अलग-अलग देशों की एजेंसियों और दूतावासों के साथ समन्वय भी जरूरी हो गया है।
राहत और रेस्क्यू में भारत समेत कई देशों की मदद
नेपाल के बचाव अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहायता भी शामिल रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें सुरंगों में बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ काम कर रही थीं। ड्रोन, विशेष रेस्क्यू उपकरण और अन्य तकनीकी संसाधनों का भी इस्तेमाल किया गया।
नेपाल सरकार ने शुरुआती चरण में सड़क, बिजली और दूरसंचार व्यवस्था बहाल करने पर भी जोर दिया। 9 सितंबर के सरकारी अपडेट के मुताबिक, उस समय 13,646 लोगों को बचाया जा चुका था और करीब 5,100 लोग लापता थे।
आपदा ने हाइड्रोपावर ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया। एपी के मुताबिक, 13 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुईं और कई परियोजनाओं में कर्मचारी सुरंगों के भीतर फंसे या लापता हुए।
नेपाल की अर्थव्यवस्था में हाइड्रोपावर का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसलिए इस आपदा का असर केवल मानवीय नुकसान तक सीमित नहीं है। बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, सड़क संपर्क और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ा है।
मलबा हटाना सबसे कठिन काम
राहत एजेंसियों के सामने पर्वतीय भौगोलिक स्थिति एक बड़ी चुनौती है। संकरी घाटियां, क्षतिग्रस्त सड़कें, टूटे पुल और भारी मलबा बचाव टीमों की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं।
रिपोर्ट ने बताया कि संकरे हवाई मार्ग, कठिन पर्वतीय भूगोल और भारी मात्रा में जमा मलबा लापता लोगों को खोजने में प्रमुख बाधाएं हैं।
हाइड्रोपावर सुरंगों में स्थिति और जटिल है। वहां पानी, कीचड़ और चट्टानों के बीच सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना पड़ रहा है।
क्या अभी भी किसी के जीवित मिलने की उम्मीद है
बचाव अभियान जारी है, लेकिन एक महीने बाद जीवित लोगों की तलाश पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गई है। फिर भी अधिकारियों ने खोज अभियान बंद नहीं किया है।
23 सितंबर को ऊर्जा मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार तब तक खोज और बचाव अभियान जारी रखेगी जब तक किसी जीवित व्यक्ति को खोजने की संभावना मौजूद है।
सितंबर की शुरुआत में हाइड्रोपावर सुरंगों से कुछ लोगों को जीवित निकालने की घटनाएं भी हुई थीं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने तीन लोगों के सुरंगों से जीवित बचाए जाने की पुष्टि की थी, जिनमें दो नेपाली और एक चीनी नागरिक शामिल थे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।