अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की शब्दावली को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। 8 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' इस्तेमाल होना चाहिए। अपने सोशल मीडिया बयान में उन्होंने पुराने शब्द का इस्तेमाल करने वालों को 'दुश्मन' तक बता दिया।
इस बयान का अहम पहलू यह है कि अमेरिकी प्रशासन की अपनी वेबसाइटों और सरकारी संचार में अब भी AI शब्द मौजूद है। सितंबर में जारी राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बावजूद नई शब्दावली पूरी तरह लागू नहीं हुई है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
8 अक्टूबर को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक बयान जारी किया। उन्होंने दावा किया कि व्हाइट हाउस उन लोगों को दुश्मन मानता है जो अधिक सटीक बताए जा रहे नए शब्द 'सुपर इंटेलिजेंस' के बजाय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' का इस्तेमाल करते हैं।
यह राष्ट्रपति का सार्वजनिक बयान था। इसे AI शब्द इस्तेमाल करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ किसी कानूनी कार्रवाई की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
सितंबर में जारी हुआ था एग्जीक्यूटिव ऑर्डर
ट्रंप इससे पहले 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में AI का नाम बदलने की अपनी मंशा ज़ाहिर कर चुके थे।
इसके बाद सितंबर के अंत में जारी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में संघीय एजेंसियों को आधिकारिक संचार में 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द अपनाने का निर्देश दिया गया।
अहम बात यह है कि इस आदेश में AI शब्द इस्तेमाल करने पर किसी दंड या आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं बताया गया। आदेश में सुपर इंटेलिजेंस की परिभाषा के लिए मौजूदा अमेरिकी कानूनी AI परिभाषा का इस्तेमाल किया गया है।
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर क्या हुआ?
8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन की AI.gov वेबसाइट पर बड़े अक्षरों में SI.gov प्रदर्शित किया गया।
लेकिन उस समय वेबसाइट का मूल इंटरनेट एड्रेस AI.gov ही था। रिपोर्ट के अनुसार, SI.gov खोलने पर एरर दिखाई दे रहा था।
दूसरी तरफ़, व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी की वेबसाइट पर भी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल हो रहा था।
यह स्थिति सरकारी आदेश और उसके डिजिटल क्रियान्वयन के बीच अंतर दिखाती है।
### AI और सुपर इंटेलिजेंस में क्या अंतर है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
कंप्यूटर आधारित तकनीकों का व्यापक क्षेत्र, जिसमें भाषा समझना, डेटा विश्लेषण, तस्वीर पहचानना और निर्णय लेने में सहायता जैसे कार्य शामिल हैं।

सुपर इंटेलिजेंस (SI)
वैज्ञानिक और तकनीकी चर्चा में आम तौर पर ऐसी संभावित बुद्धिमत्ता के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द, जो लगभग सभी महत्वपूर्ण बौद्धिक क्षेत्रों में इंसानी क्षमता से आगे हो।
यही वजह है कि दोनों शब्दों को एक-दूसरे का सीधा विकल्प मानना तकनीकी रूप से विवादास्पद है।
ट्रंप प्रशासन ने सरकारी शब्दावली में बदलाव का रास्ता चुना है, लेकिन इससे मौजूदा AI सिस्टम वैज्ञानिक अर्थ में सुपर इंटेलिजेंट नहीं बन जाते।
AI नीति पर प्रशासन का व्यापक एजेंडा
शब्दावली बदलने की यह मुहिम ऐसे समय चल रही है, जब अमेरिका AI डेवलपमेंट, डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी रेगुलेशन पर बड़े फैसलों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने सुपर इंटेलिजेंस से जुड़ी नीतियों में तालमेल के लिए एक टास्क फोर्स भी गठित की है।
टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष स्कॉट कूपर ने 6 अक्टूबर की बातचीत में संकेत दिया कि प्रशासन ऐसे सख्त नियम बनाने में जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता जो तेज़ी से बदलती टेक्नोलॉजी के सामने जल्द पुराने पड़ जाएं।
आगे क्या होगा?
अब प्रमुख सवाल यह है कि अमेरिकी संघीय एजेंसियां अपनी वेबसाइटों, दस्तावेज़ों और डिजिटल सेवाओं में नई शब्दावली को किस हद तक लागू करती हैं।
इसके साथ यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि तकनीकी संस्थान और वैज्ञानिक समुदाय इस राजनीतिक नामकरण को अपनाते हैं या अपनी स्थापित परिभाषाओं का इस्तेमाल जारी रखते हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टिंग में AI शब्द के सामान्य इस्तेमाल पर किसी व्यापक कानूनी प्रतिबंध की पुष्टि नहीं होती।
क्या टेक्नोलॉजी का नाम बदलने से उसकी वास्तविकता बदलती है?
डोनाल्ड ट्रंप का AI को सुपर इंटेलिजेंस कहने पर ज़ोर देना केवल शब्दों का बदलाव नहीं है। यह उस राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा है जिसके ज़रिये अमेरिकी सरकार उभरती टेक्नोलॉजी को लेकर सार्वजनिक धारणा प्रभावित करना चाहती है।
इस पूरे घटनाक्रम में 3 पहलू महत्वपूर्ण हैं।
पहला, वैज्ञानिक परिभाषा और राजनीतिक संदेश के बीच अंतर। AI एक स्थापित तकनीकी क्षेत्र है। सुपर इंटेलिजेंस का अर्थ इससे कहीं अधिक विशिष्ट है। यदि दोनों को समानार्थी बना दिया जाए तो टेक्नोलॉजी की वास्तविक क्षमता और संभावित जोखिमों को समझने में भ्रम पैदा हो सकता है।
दूसरा, सरकारी निर्देशों की विश्वसनीयता। राष्ट्रपति का आदेश प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखता है। लेकिन यदि सरकारी वेबसाइटें, दस्तावेज़ और आधिकारिक संचार अलग-अलग शब्द इस्तेमाल करते रहें, तो नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
तीसरा, नवाचार और जवाबदेही का संतुलन। AI को लेकर रोजगार, डेटा प्राइवेसी, सुरक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही के सवाल बने हुए हैं। शब्दावली बदलने से इन मुद्दों का समाधान अपने आप नहीं होता।
अमेरिका की AI नीति का असर अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और नीति संबंधी चर्चाओं पर पड़ सकता है। हालांकि भारत सहित दूसरे देशों के नियमों पर इस नामकरण का कोई स्वतः कानूनी प्रभाव स्थापित नहीं है।
इस घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि राजनीतिक घोषणा, सरकारी आदेश और वैज्ञानिक सहमति 3 अलग स्तर हैं। इनके बीच अंतर बनाए रखना ज़रूरी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।