सोमवार, 24 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
None

ट्रंप का Tariff Signal,भारत-रूस तेल आयात और बाजार की चाल

None 2026-01-05 18:23:11
ट्रंप का Tariff Signal,भारत-रूस तेल आयात और बाजार की चाल

  डोनाल्ड ट्रंप- नरेंद्र मोदी टिप्पणी के बीच ट्रेड डील की चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने का संकेत दिया है। बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है और बाजार वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए है।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि भारत अब रूस से तेल की खरीद कम कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री एक अच्छे व्यक्ति हैं और नई दिल्ली जानती थी कि यदि रूस से तेल का आयात जारी रहता, तो वाशिंगटन की ओर से टैरिफ जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते थे।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत लंबे समय से चल रही है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पिछले वर्ष कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका।

https://youtube.com/shorts/i6fVhiCu1c0?si=MnyZFLv-_dQqthqW

टैरिफ पर संकेत

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन बहुत जल्दी नई दिल्ली पर टैरिफ बढ़ा सकता है। उनके अनुसार, भारत को यह पता था कि अमेरिका रूस से जारी व्यापार को लेकर संतुष्ट नहीं है। इस टिप्पणी के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर एक बार फिर ध्यान गया है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने कहा कि बीते वर्षों में हुए कई कूटनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक मेल-मुलाकातों से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के प्रति अमेरिका का रुख कभी नरम और कभी सख्त बना हुआ है।

व्यापार बातचीत की पृष्ठभूमि

भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है। दोनों देशों ने पिछले साल लगभग छह दौर की वार्ता की। इन बैठकों में टैरिफ, मार्केट एक्सेस, टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टर से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। हालांकि, अभी तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

बाजार की चाल

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की, लेकिन दिन के अंत में दबाव में बंद हुआ। निफ्टी 26,333.70 अंक पर खुला, कारोबार के दौरान 26,373.20 का स्तर छुआ और अंत में 78 अंक की गिरावट के साथ 26,250 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 322 अंक फिसलकर 84,439 पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता को बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है।

शुक्रवार का प्रदर्शन

इससे पहले शुक्रवार को बाजार में मजबूती देखी गई थी। बीएसई सेंसेक्स 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85,760.01 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 108 अंक की तेजी के साथ 26,328.55 पर बंद हुआ था।

रूस से तेल आयात

गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर सलाह दी थी। इसके बाद भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल का आयात कम किया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें रूस का हिस्सा करीब 35 प्रतिशत के आसपास रहता है।

आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत ने पिछले तीन वर्षों में सबसे कम रूसी कच्चा तेल आयात किया। इससे पहले नवंबर में खरीद अपेक्षाकृत मजबूत रही थी। बताया जा रहा है कि दिसंबर में बाजार स्थितियों और प्रतिबंधों के कारण आयात में कमी आई।

आयात के आंकड़े

डेटा के मुताबिक, सितंबर में भारत ने रूस से लगभग 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया। अक्टूबर में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा। नवंबर में आयात लगभग 1.84 मिलियन बैरल प्रति दिन था। दिसंबर में इसमें गिरावट दर्ज की गई और आयात करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के आसपास रहा।

वैश्विक स्थिति

वैश्विक स्तर पर निवेशक वेनेजुएला और अमेरिका के बीच जारी विवाद पर भी नजर रखे हुए हैं। इसे एक ग्लोबल टेंशन के दौर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिखा है। ब्रेंट क्रूड लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला की सप्लाई का असर पहले से ही वैश्विक बाजार में सीमित था, इसलिए कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।

एयर फोर्स वन में टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत उन्हें खुश करना चाहता था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को नेक दिल इंसान बताया और कहा कि भारत जानता था कि रूस से व्यापार को लेकर अमेरिका खुश नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं और यह कदम भारत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अमेरिकी सीनेटर का बयान

एयर फोर्स वन में ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ ही वह मुख्य कारण हैं, जिनके चलते नई दिल्ली अब रूस से कम तेल खरीद रही है।

ग्राहम ने अपने टैरिफ बिल का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य रूसी तेल खरीदने वाले देशों से आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाना है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति के ग्राहकों पर दबाव डालना जरूरी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेताओं ने ट्रंप के बयान को मोदी सरकार पर राजनीतिक हमले के रूप में लिया है। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए बयानों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।

आगे की नजर

ट्रंप के बयान और बाजार की हालिया चाल के बीच निवेशक और उद्योग जगत भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में टैरिफ, तेल आयात और वैश्विक संकेतों से बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

-->

  डोनाल्ड ट्रंप- नरेंद्र मोदी टिप्पणी के बीच ट्रेड डील की चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने का संकेत दिया है। बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है और बाजार वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए है।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि भारत अब रूस से तेल की खरीद कम कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री एक अच्छे व्यक्ति हैं और नई दिल्ली जानती थी कि यदि रूस से तेल का आयात जारी रहता, तो वाशिंगटन की ओर से टैरिफ जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते थे।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत लंबे समय से चल रही है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पिछले वर्ष कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका।

https://youtube.com/shorts/i6fVhiCu1c0?si=MnyZFLv-_dQqthqW

टैरिफ पर संकेत

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन बहुत जल्दी नई दिल्ली पर टैरिफ बढ़ा सकता है। उनके अनुसार, भारत को यह पता था कि अमेरिका रूस से जारी व्यापार को लेकर संतुष्ट नहीं है। इस टिप्पणी के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर एक बार फिर ध्यान गया है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने कहा कि बीते वर्षों में हुए कई कूटनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक मेल-मुलाकातों से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के प्रति अमेरिका का रुख कभी नरम और कभी सख्त बना हुआ है।

व्यापार बातचीत की पृष्ठभूमि

भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है। दोनों देशों ने पिछले साल लगभग छह दौर की वार्ता की। इन बैठकों में टैरिफ, मार्केट एक्सेस, टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टर से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। हालांकि, अभी तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

बाजार की चाल

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की, लेकिन दिन के अंत में दबाव में बंद हुआ। निफ्टी 26,333.70 अंक पर खुला, कारोबार के दौरान 26,373.20 का स्तर छुआ और अंत में 78 अंक की गिरावट के साथ 26,250 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 322 अंक फिसलकर 84,439 पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता को बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है।

शुक्रवार का प्रदर्शन

इससे पहले शुक्रवार को बाजार में मजबूती देखी गई थी। बीएसई सेंसेक्स 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85,760.01 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 108 अंक की तेजी के साथ 26,328.55 पर बंद हुआ था।

रूस से तेल आयात

गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर सलाह दी थी। इसके बाद भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल का आयात कम किया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें रूस का हिस्सा करीब 35 प्रतिशत के आसपास रहता है।

आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत ने पिछले तीन वर्षों में सबसे कम रूसी कच्चा तेल आयात किया। इससे पहले नवंबर में खरीद अपेक्षाकृत मजबूत रही थी। बताया जा रहा है कि दिसंबर में बाजार स्थितियों और प्रतिबंधों के कारण आयात में कमी आई।

आयात के आंकड़े

डेटा के मुताबिक, सितंबर में भारत ने रूस से लगभग 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया। अक्टूबर में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा। नवंबर में आयात लगभग 1.84 मिलियन बैरल प्रति दिन था। दिसंबर में इसमें गिरावट दर्ज की गई और आयात करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के आसपास रहा।

वैश्विक स्थिति

वैश्विक स्तर पर निवेशक वेनेजुएला और अमेरिका के बीच जारी विवाद पर भी नजर रखे हुए हैं। इसे एक ग्लोबल टेंशन के दौर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिखा है। ब्रेंट क्रूड लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला की सप्लाई का असर पहले से ही वैश्विक बाजार में सीमित था, इसलिए कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।

एयर फोर्स वन में टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत उन्हें खुश करना चाहता था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को नेक दिल इंसान बताया और कहा कि भारत जानता था कि रूस से व्यापार को लेकर अमेरिका खुश नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं और यह कदम भारत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अमेरिकी सीनेटर का बयान

एयर फोर्स वन में ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ ही वह मुख्य कारण हैं, जिनके चलते नई दिल्ली अब रूस से कम तेल खरीद रही है।

ग्राहम ने अपने टैरिफ बिल का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य रूसी तेल खरीदने वाले देशों से आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाना है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति के ग्राहकों पर दबाव डालना जरूरी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेताओं ने ट्रंप के बयान को मोदी सरकार पर राजनीतिक हमले के रूप में लिया है। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिए गए बयानों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।

आगे की नजर

ट्रंप के बयान और बाजार की हालिया चाल के बीच निवेशक और उद्योग जगत भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत के अगले कदमों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में टैरिफ, तेल आयात और वैश्विक संकेतों से बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर