वॉशिंगटन डीसी | तेहरान | न्यूयॉर्क | 28 सितंबर 2026
By Mohd Haris
होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने पर फिर अटका समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिश एक बार फिर होर्मुज़ स्ट्रेट पर आकर अटक गई है। ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाता है, तो तेहरान सात दिनों के भीतर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खोलने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 सितंबर को कहा कि उन्होंने ईरान की पेशकश खारिज कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान आर्थिक दबाव में है और जल्द समझौते की तरफ बढ़ सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि युद्ध जल्द खत्म होगा। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर नए सैन्य हमलों की संभावना से साफ इनकार नहीं किया।
ट्रंप का दावा, ईरान पर आर्थिक दबाव असरदार
ट्रंप ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी दबाव का असर पड़ा है। उन्होंने ईरान की महंगाई, मुद्रा और आर्थिक स्थिति को लेकर कई बड़े दावे किए। इनमें महंगाई के करीब 300 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा भी शामिल है।
इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें ईरान की आर्थिक स्थिति का स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा माना जाना चाहिए।
व्हाइट हाउस भी पहले ईरान की तेल आय और होर्मुज़ में अमेरिकी नौसैनिक नियंत्रण को लेकर कई बड़े दावे कर चुका है। अगस्त में व्हाइट हाउस ने कहा था कि अमेरिकी सुरक्षा के तहत करीब 1,500 वाणिज्यिक जहाज स्ट्रेट से गुजरे और ईरान की तेल निर्यात क्षमता पर गंभीर असर पड़ा। इन आंकड़ों को भी अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक दावे के रूप में देखना जरूरी है।
ईरान की पेशकश क्या थी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका तक सात दिन की एक योजना पहुंचने की जानकारी दी थी। प्रस्ताव का मूल ढांचा यह था कि अमेरिका सैन्य दबाव कम करे, ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाए और कुछ आर्थिक रियायतें दे। इसके बाद होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से सामान्य समुद्री आवाजाही के लिए खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी पक्ष ने यह संकेत दिया था कि अमेरिकी सैन्य दबाव कम होने और बंदरगाह नाकाबंदी हटने की स्थिति में स्ट्रेट को एक सप्ताह के भीतर खोलने की तैयारी है।
ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव
ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने ईरान का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उनके मुताबिक, ईरान तत्काल होर्मुज़ खोलना चाहता है क्योंकि उस पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
ट्रंप के बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की। बाद की रिपोर्टों में सामने आया कि अमेरिकी राष्ट्रपति आने वाले दिनों में बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं।
इससे मौजूदा स्थिति दोहरी दिखाई देती है। एक तरफ अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। दूसरी तरफ वॉशिंगटन कूटनीतिक संपर्क को पूरी तरह बंद करने के संकेत भी नहीं दे रहा।
अराघची का जवाब, ईरान युद्ध और बातचीत दोनों के लिए तैयार
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी दबाव के जवाब में कहा कि तेहरान नए सैन्य संघर्ष के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत का रास्ता भी खुला है।
उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ईरान के लिए आर्थिक संपत्तियों तक पहुंच, तेल बेचने की क्षमता और सैन्य दबाव में कमी अहम मुद्दे हैं।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका के मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी नीति तय नहीं कर रहा है। उनका कहना था कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों पर ध्यान दे रहा है और कूटनीति की संभावना को खुला रखना चाहता है।
होर्मुज़ इतना अहम क्यों है
होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले तेल और गैस परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से जुड़ा है।
रिपोर्ट ने सितंबर में बताया था कि युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और गैस शिपमेंट इस मार्ग से गुजरते थे। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान से सिर्फ अमेरिका और ईरान प्रभावित नहीं होते। खाड़ी के तेल उत्पादक देश, एशिया के ऊर्जा आयातक, यूरोप के बाजार और वैश्विक शिपिंग सेक्टर पर भी असर पड़ता है।
भारत के लिए भी यह मुद्दा अहम है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से आयात बिल, रुपया, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। सितंबर में होर्मुज़ को लेकर संभावित कूटनीतिक प्रगति की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये में सीमित मजबूती दर्ज की गई थी।
मध्यावधि चुनाव का संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण है
अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनाव नवंबर में होने हैं। ऐसे में ईरान युद्ध और ऊर्जा कीमतें अमेरिकी घरेलू राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
हालांकि, यह कहना उचित नहीं होगा कि ट्रंप की ईरान नीति केवल चुनावी गणित से संचालित है। सार्वजनिक बयानों में ट्रंप ने ईरान की परमाणु क्षमता को रोकना, सैन्य दबाव बनाए रखना और युद्ध समाप्त करने को अमेरिकी नीति के प्रमुख उद्देश्यों के रूप में पेश किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध को अपनी नीति के हिस्से के रूप में बचाव किया और ईरान से होर्मुज़ खोलने तथा बातचीत फिर शुरू करने का आह्वान किया।
नए अमेरिकी हमलों की संभावना पर ट्रंप का बयान
27 सितंबर को ट्रंप से पूछा गया कि क्या मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर नए अमेरिकी हमले हो सकते हैं। उन्होंने इस संभावना को खारिज नहीं किया।
उन्होंने कहा कि वह इस बारे में निश्चित बयान नहीं देना चाहते, लेकिन संभावना मौजूद है।
इसी बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध बहुत जल्द समाप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आएगी।
इन बयानों से यह स्पष्ट है कि वॉशिंगटन की नीति में बातचीत और सैन्य दबाव दोनों विकल्प फिलहाल खुले हैं।
ईरान भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा
ईरान की स्थिति भी कठोर बनी हुई है। तेहरान ने होर्मुज़ को खोलने के लिए अपनी शर्तों को वापस नहीं लिया है।
ईरानी पक्ष का तर्क है कि स्ट्रेट खोलना व्यापक युद्धविराम और आर्थिक राहत से जुड़ा होना चाहिए। अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले बिना व्यापक शर्तों के समुद्री मार्ग को सामान्य करे।
यही मूल मतभेद बातचीत को रोक रहा है। दोनों पक्ष होर्मुज़ को अपने रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में देखते हैं।
कूटनीतिक रास्ता अभी बंद नहीं हुआ
दिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों में कठोरता के बावजूद बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
ट्रंप ने प्रस्ताव खारिज करने के बाद भी आने वाले सप्ताह में बातचीत फिर शुरू होने की संभावना जताई है। दूसरी तरफ अराघची ने कहा कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।