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उज्बेकिस्तान के सम्मान पर ओवैसी का तंज, बोले बाबर के देश से मोदी को अवॉर्ड मिला

Mohammad Naved 2026-08-31 11:14:04
उज्बेकिस्तान के सम्मान पर ओवैसी का तंज, बोले बाबर के देश से मोदी को अवॉर्ड मिला

प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च मित्रता सम्मान मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर तंज कसा। उन्होंने बाबर और संघ परिवार की राजनीतिक बयानबाजी का जिक्र किया।

📍 नई दिल्ली

🗓️ 31 अगस्त 2026

✍️ Mohd Naved

उज्बेकिस्तान के सम्मान पर ओवैसी का तंज, बोले बाबर के देश से मोदी को अवॉर्ड मिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च मित्रता सम्मान मिलने के बाद भारत की सियासत में इस सम्मान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बाबर को लेकर की जाने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर निशाना साधा।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी को मिले सम्मान पर बीजेपी को बधाई देते हुए बाबर के मध्य एशियाई मूल का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस क्षेत्र से बाबर भारत आया था, उसी देश ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है।

मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओली दाराजाली दोस्तलिक सम्मान प्रदान किया। उज्बेकिस्तान के आधिकारिक राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक दोस्ती, व्यापक रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया है।

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ओली दाराजाली दोस्तलिक उज्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं के लिए सर्वोच्च सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मान को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को समर्पित किया।

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्क के साथ व्यापार, निवेश, परिवहन तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

ओवैसी ने बाबर का मुद्दा क्यों उठाया

सम्मान समारोह के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम को घरेलू राजनीति से जोड़ते हुए बीजेपी और संघ परिवार पर निशाना साधा। उनके मुताबिक बीजेपी और संघ से जुड़े राजनीतिक विमर्श में बाबर का नाम लंबे समय से विवाद और आलोचना का हिस्सा रहा है।

ओवैसी ने कहा कि जिस देश से बाबर भारत आया था, उसी देश ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान दिया है। उन्होंने इसे बीजेपी और संघ परिवार के लिए आत्ममंथन का विषय बताया।

ओवैसी का यह बयान मूल रूप से एक राजनीतिक तंज है। इसे उज्बेकिस्तान सरकार की ओर से दिए गए सम्मान के आधिकारिक कारण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उज्बेकिस्तान ने अपने आधिकारिक दस्तावेज में सम्मान का आधार दोनों देशों के संबंधों और सहयोग को मजबूत करने में मोदी के योगदान को बताया है।

बाबर और फरगाना घाटी का संदर्भ

ओवैसी के बयान में फरगाना घाटी का भी उल्लेख आया। ऐतिहासिक रूप से बाबर का जन्म फरगाना क्षेत्र के अंदिजान में हुआ था, जो आज के उज्बेकिस्तान में स्थित है। फरगाना घाटी वर्तमान में उज्बेकिस्तान के साथ-साथ ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के कुछ हिस्सों तक फैली हुई है।

इसलिए राजनीतिक बहस में इसे बाबर के मूल क्षेत्र के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इतिहास को मौजूदा राष्ट्रीय सीमाओं के साथ सीधे जोड़ते समय ऐतिहासिक और आधुनिक भौगोलिक संदर्भ के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

ओवैसी का बयान और राजनीतिक संदेश

ओवैसी ने अपने बयान के जरिए बीजेपी और संघ परिवार के उस राजनीतिक विमर्श पर सवाल उठाया जिसमें मुगल काल और बाबर का उल्लेख अक्सर वैचारिक और चुनावी बहसों में होता रहा है।

उनका तर्क यह है कि अगर उज्बेकिस्तान के नेतृत्व ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है, तो भारतीय राजनीति में बाबर के नाम को लेकर होने वाली बयानबाजी पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। यह ओवैसी का राजनीतिक दृष्टिकोण है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान मिलने वाले सम्मानों का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रधानमंत्री जहां जाते हैं, वहां उन्हें सम्मान मिलता है। उनके बयान में इस उपलब्धि पर बधाई के साथ बीजेपी पर राजनीतिक कटाक्ष भी शामिल था।

सम्मान का आधिकारिक कारण क्या है

ओवैसी की राजनीतिक टिप्पणी से अलग उज्बेकिस्तान के आधिकारिक दस्तावेज में सम्मान के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के आदेश के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक मित्रता और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

दस्तावेज में राजनीतिक, व्यापारिक, आर्थिक, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने में योगदान का भी उल्लेख है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक बताया।

भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का संदर्भ

भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क लंबे समय से रहे हैं। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए अहम साझेदारों में शामिल है।

मौजूदा दौर में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को सुरक्षा, व्यापार, निवेश, परिवहन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। उज्बेकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया सर्वोच्च मित्रता सम्मान इसी व्यापक द्विपक्षीय रिश्ते के संदर्भ में देखा जा रहा है।

विदेश सम्मान और घरेलू राजनीति

प्रधानमंत्री मोदी को विदेशों से मिलने वाले सम्मान पहले भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहे हैं। सत्ता पक्ष इन्हें भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कूटनीतिक प्रभाव से जोड़ता रहा है, जबकि विपक्ष कई बार इन सम्मानों को लेकर अलग राजनीतिक नजरिया सामने रखता है।

उज्बेकिस्तान का सम्मान भी इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। एक तरफ सरकार और आधिकारिक पक्ष इसे भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों की मजबूती से जोड़ रहा है। दूसरी तरफ ओवैसी ने इसे बीजेपी की ऐतिहासिक और वैचारिक राजनीति पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है।

इस अंतर को समझना जरूरी है। सम्मान दिए जाने का आधिकारिक कारण और उस पर भारतीय राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया दो अलग मुद्दे हैं।

विवाद का केंद्र क्या है

इस पूरे मामले में विवाद सम्मान को लेकर नहीं, बल्कि उसके बाद हुई राजनीतिक टिप्पणी को लेकर है। उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च मित्रता सम्मान से नवाजा है। इस फैसले का आधिकारिक आधार द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग में योगदान बताया गया है।

ओवैसी ने उसी घटनाक्रम को भारत की घरेलू राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए बाबर का संदर्भ उठाया। उनके बयान का निशाना प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा बीजेपी और संघ परिवार का वैचारिक विमर्श रहा।

आगे की सियासी तस्वीर

ओवैसी के बयान से साफ है कि ऐतिहासिक शख्सियतों और मुगल काल से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में अभी भी संवेदनशील राजनीतिक विषय बने हुए हैं। विदेश नीति और घरेलू राजनीति के बीच इस तरह का संबंध राजनीतिक दलों को अपने-अपने नैरेटिव को मजबूत करने का अवसर देता है।

फिलहाल उज्बेकिस्तान की तरफ से दिए गए सम्मान का आधिकारिक एजेंडा भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को मजबूत करना है। भारत में इस पर जारी राजनीतिक बहस का केंद्र बाबर, बीजेपी और संघ परिवार को लेकर ओवैसी की टिप्पणी है।

प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया के साथ बढ़ते संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। वहीं ओवैसी की प्रतिक्रिया बताती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी उपलब्धियां भी भारतीय घरेलू सियासत में अलग-अलग राजनीतिक नजरियों के साथ देखी जाती हैं।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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