प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च मित्रता सम्मान मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर तंज कसा। उन्होंने बाबर और संघ परिवार की राजनीतिक बयानबाजी का जिक्र किया।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 31 अगस्त 2026
✍️ Mohd Naved
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च मित्रता सम्मान मिलने के बाद भारत की सियासत में इस सम्मान को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बाबर को लेकर की जाने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर निशाना साधा।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओली दाराजाली दोस्तलिक सम्मान प्रदान किया। उज्बेकिस्तान के आधिकारिक राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक दोस्ती, व्यापक रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया है।
सम्मान समारोह के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम को घरेलू राजनीति से जोड़ते हुए बीजेपी और संघ परिवार पर निशाना साधा। उनके मुताबिक बीजेपी और संघ से जुड़े राजनीतिक विमर्श में बाबर का नाम लंबे समय से विवाद और आलोचना का हिस्सा रहा है।
ओवैसी के बयान में फरगाना घाटी का भी उल्लेख आया। ऐतिहासिक रूप से बाबर का जन्म फरगाना क्षेत्र के अंदिजान में हुआ था, जो आज के उज्बेकिस्तान में स्थित है। फरगाना घाटी वर्तमान में उज्बेकिस्तान के साथ-साथ ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के कुछ हिस्सों तक फैली हुई है।
ओवैसी ने अपने बयान के जरिए बीजेपी और संघ परिवार के उस राजनीतिक विमर्श पर सवाल उठाया जिसमें मुगल काल और बाबर का उल्लेख अक्सर वैचारिक और चुनावी बहसों में होता रहा है।
ओवैसी की राजनीतिक टिप्पणी से अलग उज्बेकिस्तान के आधिकारिक दस्तावेज में सम्मान के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के आदेश के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक मित्रता और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क लंबे समय से रहे हैं। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए अहम साझेदारों में शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी को विदेशों से मिलने वाले सम्मान पहले भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहे हैं। सत्ता पक्ष इन्हें भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कूटनीतिक प्रभाव से जोड़ता रहा है, जबकि विपक्ष कई बार इन सम्मानों को लेकर अलग राजनीतिक नजरिया सामने रखता है।
इस पूरे मामले में विवाद सम्मान को लेकर नहीं, बल्कि उसके बाद हुई राजनीतिक टिप्पणी को लेकर है। उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च मित्रता सम्मान से नवाजा है। इस फैसले का आधिकारिक आधार द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग में योगदान बताया गया है।
ओवैसी के बयान से साफ है कि ऐतिहासिक शख्सियतों और मुगल काल से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में अभी भी संवेदनशील राजनीतिक विषय बने हुए हैं। विदेश नीति और घरेलू राजनीति के बीच इस तरह का संबंध राजनीतिक दलों को अपने-अपने नैरेटिव को मजबूत करने का अवसर देता है।
फिलहाल उज्बेकिस्तान की तरफ से दिए गए सम्मान का आधिकारिक एजेंडा भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को मजबूत करना है। भारत में इस पर जारी राजनीतिक बहस का केंद्र बाबर, बीजेपी और संघ परिवार को लेकर ओवैसी की टिप्पणी है।
प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान भारत की विदेश नीति और मध्य एशिया के साथ बढ़ते संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। वहीं ओवैसी की प्रतिक्रिया बताती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी उपलब्धियां भी भारतीय घरेलू सियासत में अलग-अलग राजनीतिक नजरियों के साथ देखी जाती हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।