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यूक्रेन की मशीनी आर्मी ने बढ़ाई रूस की मुश्किलें, ड्रोन से दुश्मन की लाइन के पीछे उतारे रोबोट

Harish Qureshi • 2026-09-28 11:46:21
यूक्रेन की मशीनी आर्मी ने बढ़ाई रूस की मुश्किलें, ड्रोन से दुश्मन की लाइन के पीछे उतारे रोबोट

यूक्रेन के ऑपरेशन विवाल्डी में भारी ड्रोन से कामिकाज़े ग्राउंड रोबोट रूसी लाइनों के पीछे उतारे गए। कीव ने 3,000 से अधिक रूसी सैन्य नुकसान का दावा किया है।


लाइमन, डोनेट्स्क, यूक्रेन | 28 सितंबर 2026

BY MOHD HARIS


भूमिका


रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन के बाद अब मानवरहित ग्राउंड व्हीकल यानी यूजीवी युद्ध के मैदान की रणनीति बदलते दिखाई दे रहे हैं। यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने ऑपरेशन विवाल्डी के दौरान भारी ड्रोन की मदद से विस्फोटक लदे ग्राउंड रोबोट रूसी सैन्य लाइनों के पीछे पहुंचाने की जानकारी दी है।


यूक्रेनी पक्ष के मुताबिक, इन रोबोटों का इस्तेमाल रूसी ठिकानों, किलेबंदी और सैन्य गतिविधियों के खिलाफ किया गया। कुछ मामलों में रोबोटों को पैदल सैनिकों से पहले भेजा गया, ताकि मानव सैनिकों का सीधा जोखिम कम किया जा सके।


यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि युद्ध में यूएवी यानी हवाई ड्रोन पहले से ही व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हो रहे हैं। अब हवाई ड्रोन और जमीन पर चलने वाले रोबोटों को एक साथ इस्तेमाल करने की कोशिश युद्ध के तरीके में एक नया बदलाव दिखाती है।


जरूरी तथ्य


यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने ऑपरेशन विवाल्डी के दौरान रूसी लाइनों के पीछे ग्राउंड रोबोट पहुंचाने की पुष्टि की है। उसके अनुसार, भारी बमवर्षक ड्रोन इन मानवरहित ग्राउंड सिस्टम को 10 किलोमीटर से अधिक अंदर तक पहुंचाने में इस्तेमाल हुए।


20 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दूसरे चरण में यूक्रेनी सेना ने शैंड्रिहोलोवे और डेरिलोवे पर नियंत्रण स्थापित किया तथा ड्रोबिशेवे में पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की बात कही। यूक्रेनी कमांडर के अनुसार, पहले दो चरणों में कुल 125 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र यूक्रेनी नियंत्रण में वापस आया, जिसमें करीब 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र रूसी कब्जे से वापस लिया गया।


मुख्य घटनाक्रम


ऑपरेशन विवाल्डी के दौरान यूक्रेनी सेना ने पारंपरिक पैदल हमला शुरू करने से पहले ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ग्राउंड रोबोट का इस्तेमाल किया।


यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, भारी ड्रोन ने विस्फोटक लदे मानवरहित ग्राउंड व्हीकल को रूसी सैन्य क्षेत्र के पीछे गिराया। इन रोबोटों को दूर से नियंत्रित किया गया और उन्हें रूसी मोर्चे की किलेबंदी तथा अन्य लक्ष्यों की तरफ भेजा गया।


28 सितंबर की रिपोर्ट में Defence Express ने बताया कि यूक्रेनी एनसी13 यूनिट ने ऐसे ग्राउंड रोबोट इस्तेमाल किए, जिनमें दो डिस्पोजेबल बुलस्पाइक ग्रेनेड लॉन्चर लगाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, रोबोट रूसी ठिकानों के पास पहुंचे, फायर किया और फिर कुछ प्लेटफॉर्म सीधे किलेबंदी की ओर जाकर विस्फोट के लिए इस्तेमाल हुए।


3,000 रूसी सैनिकों के नुकसान का दावा


ऑपरेशन विवाल्डी को लेकर सबसे बड़ा दावा रूसी सैन्य नुकसान से जुड़ा है। यूक्रेनी थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल आंद्रिय बिलेत्स्की के अनुसार, ऑपरेशन के दो चरणों में रूसी सेना के 3,000 से अधिक सैनिकों का नुकसान हुआ। दूसरे चरण में करीब 800 रूसी सैनिकों के नुकसान का भी दावा किया गया।


रोबोट युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है


यूक्रेन लंबे समय से अपनी सैन्य रणनीति में मानवरहित तकनीक पर निर्भरता बढ़ा रहा है। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी यूनिट्स विस्फोटक ले जाने, आपूर्ति पहुंचाने और घायल सैनिकों को निकालने जैसे कामों में यूजीवी का इस्तेमाल कर रही हैं। कुछ रोबोटों को सीधे रूसी ठिकानों पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है।


इसका प्रमुख उद्देश्य सैनिकों को अत्यधिक जोखिम वाले इलाकों से दूर रखना है। अगर किसी किलेबंदी तक पहुंचने में पैदल सैनिकों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है, तो कम से कम कुछ शुरुआती मिशन रोबोटों के जरिए किए जा सकते हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन की कुछ यूनिट्स रोबोटिक सिस्टम को युद्धक भूमिका में तेजी से शामिल कर रही हैं। हालांकि तकनीकी सीमाओं, उत्पादन क्षमता और कठिन भूभाग के कारण रोबोट अभी पैदल सैनिकों का पूर्ण विकल्प नहीं हैं।


ऑपरेशन विवाल्डी का व्यापक संदर्भ


ऑपरेशन विवाल्डी उत्तरी डोनेट्स्क क्षेत्र में लाइमन दिशा में यूक्रेनी सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है। Institute for the Study of War के आकलन के अनुसार, 22 सितंबर तक यूक्रेनी सेना ने लाइमन के उत्तर में कम से कम 125 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण वापस हासिल किया था। ISW ने इसे सीमित स्तर पर यूक्रेनी सैन्य maneuver की वापसी के रूप में दर्ज किया।


यूक्रेनी रिपोर्टिंग में इस ऑपरेशन को रूसी सेना की लाइमन दिशा में दबाव और संभावित घेराबंदी की कोशिश को बाधित करने से जोड़ा गया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी पक्ष का कहना था कि इस कार्रवाई ने डोनेट्स्क के प्रमुख शहरों की दिशा में रूसी दबाव को प्रभावित किया। हालांकि युद्धक्षेत्र की स्थिति लगातार बदल रही है और दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन है।


पहले चरण में कई छोटे इलाकों में यूक्रेनी प्रगति की रिपोर्ट सामने आई थी। दूसरे चरण में शैंड्रिहोलोवे, डेरिलोवे और ड्रोबिशेवे का उल्लेख प्रमुख रूप से किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में इन इलाकों की स्थिति और नियंत्रण को लेकर समय के साथ अलग-अलग अपडेट सामने आए हैं।


ड्रोन से रोबोट गिराने की रणनीति


यूक्रेन की नई रणनीति का सबसे असामान्य हिस्सा हवाई और जमीनी मानवरहित सिस्टम का संयोजन है।


भारी ड्रोन पहले ऐसे इलाके तक पहुंचता है जहां सामान्य ग्राउंड रोबोट को सड़क या खुले मैदान से पहुंचाना कठिन हो सकता है। इसके बाद यूजीवी को रूसी सैन्य क्षेत्र के पीछे उतारने की कोशिश की जाती है।


यूक्रेनी कमांड के अनुसार, कुछ रोबोट विस्फोटक लेकर जाते हैं और कुछ reconnaissance, logistics या दूसरे सहायक मिशन करते हैं। इससे एक ही प्लेटफॉर्म को अलग-अलग सैन्य भूमिकाओं में इस्तेमाल करने की गुंजाइश बनती है।


रूस भी बना रहा है ग्राउंड रोबोट


इस तकनीकी दौड़ में केवल यूक्रेन ही सक्रिय नहीं है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2026 की शुरुआत से उसके ड्रोन ने 3,000 से अधिक रूसी मानवरहित ग्राउंड व्हीकल को निशाना बनाया है। मंत्रालय ने जनवरी से अगस्त तक महीनेवार आंकड़े भी जारी किए हैं और अगस्त में 511 रूसी ग्राउंड रोबोटों के प्रभावित होने का दावा किया है।


यह आंकड़ा एक अलग बात दिखाता है। रूस भी युद्ध में ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए दोनों पक्षों के बीच केवल ड्रोन युद्ध नहीं, बल्कि मानवरहित जमीनी प्लेटफॉर्म को लेकर भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।


क्या रोबोट सैनिकों की जगह ले सकते हैं?


अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।


ग्राउंड रोबोट कई ऐसे काम कर सकते हैं जिनमें सैनिकों के लिए जोखिम ज्यादा होता है। वे विस्फोटक ले जा सकते हैं, सामान पहुंचा सकते हैं, घायल सैनिकों को निकाल सकते हैं और कुछ स्थितियों में हथियार भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


लेकिन उन्हें हर इलाके में प्रभावी ढंग से चलाना आसान नहीं है। कीचड़, मलबा, खाइयां, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, संचार बाधित होना और बैटरी की सीमाएं बड़ी चुनौतियां हैं।

यूजीवी के इस्तेमाल में तेजी आई है, लेकिन उनकी तकनीकी और उत्पादन संबंधी सीमाएं अभी बनी हुई हैं।

वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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