यूनेस्को ने 2026 ICT इन एजुकेशन प्राइज के लिए फिनलैंड के Generation AI और ब्राज़ील के Redação Paraná को चुना। दोनों परियोजनाएं AI के साथ क्रिटिकल थिंकिंग पर जोर देती हैं।
पेरिस, फ्रांस | 9 सितंबर 2026
By Mohd Haris
एआई और शिक्षा पर यूनेस्को का फोकसयूनेस्को ने 2026 के किंग हमद बिन ईसा अल-खलीफा पुरस्कार फॉर द यूज़ ऑफ आईसीटी इन एजुकेशन के लिए फिनलैंड और ब्राज़ील की 2 शिक्षा पहलों को सम्मानित किया है। पुरस्कार की 2026 की थीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्रिएटिविटी और क्रिटिकल थिंकिंग को नए तरीके से विकसित करना थी।
फिनलैंड की परियोजना का नाम जेनरेशन एआई है। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड, यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और यूनिवर्सिटी ऑफ ऊलू समेत अन्य साझेदारों ने विकसित किया है।
ब्राज़ील की पहल रेडाकाओ पराना है। यह पराना राज्य के शिक्षा सचिवालय की एआई आधारित सार्वजनिक शिक्षा नीति और डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
जेनरेशन एआई की शुरुआत 2022 में हुई थी। इसका मकसद विद्यार्थियों को एआई के केवल उपयोगकर्ता के रूप में तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें एआई सिस्टम को समझने, सवाल करने और आलोचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता देना है।
यूनेस्को के मुताबिक इस पहल के शैक्षणिक संसाधनों को 50 से अधिक देशों में 200,000 से ज्यादा बार एक्सेस किया गया है। इसके वर्कशॉप और स्कूल कार्यक्रमों में करीब 1,500 विद्यार्थी और शिक्षक शामिल हुए हैं।
परियोजना में इन्क्वायरी और को-डिज़ाइन आधारित शिक्षण पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विद्यार्थियों को एआई के सामाजिक, नैतिक और तकनीकी पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
ब्राज़ील की रेडाकाओ पराना पहल को 2020 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया और 2021 में इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया।
यह एआई आधारित प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को लेखन अभ्यास और फीडबैक उपलब्ध कराता है। इसमें एआई की सहायता से मिलने वाले फीडबैक को शिक्षक के मार्गदर्शन के साथ जोड़ा गया है।
यूनेस्को के अनुसार इस कार्यक्रम की पहुंच पराना राज्य में करीब 850,000 विद्यार्थियों और 2,000 स्कूलों तक हुई है। कार्यक्रम का उद्देश्य लेखन क्षमता के साथ तर्क, रचनात्मकता और उच्च स्तरीय सोच को मजबूत करना है।
यूनेस्को आईसीटी इन एजुकेशन प्राइज़ की स्थापना 2005 में हुई थी। यह पुरस्कार शिक्षा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अभिनव इस्तेमाल को मान्यता देता है।
2026 में पुरस्कार का खास फोकस एआई के ऐसे इस्तेमाल पर रहा, जिससे विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को एआई के हवाले करने के बजाय उसे विकसित कर सकें।
यूनेस्को ने बताया कि 2026 के लिए सदस्य देशों और संगठनात्मक साझेदारों से 100 से अधिक नामांकन मिले थे। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय ज्यूरी ने इन 2 परियोजनाओं को चुना।
पुरस्कार समारोह 9 सितंबर 2026 को पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में डिजिटल लर्निंग वीक के दौरान हुआ। इस वर्ष डिजिटल लर्निंग वीक की थीम थी, “एजुकेशन इन द एज ऑफ एआई: फैक्ट्स | फ्रिक्शंस | फ्रंटियर्स।”
यूनेस्को ने इस आयोजन के जरिए शिक्षा में एआई के इस्तेमाल के साथ मानव एजेंसी, समानता, नैतिकता और सार्वजनिक हित को केंद्र में रखने पर जोर दिया।
यूनेस्को का मौजूदा रुख एआई को शिक्षा में केवल तकनीकी सुविधा के तौर पर देखने के बजाय मानव-केंद्रित और नैतिक इस्तेमाल पर जोर देता है।
जेनरेशन एआई और रेडाकाओ पराना दोनों में एक साझा पहलू दिखाई देता है। एआई को शिक्षक और विद्यार्थी की भूमिका का विकल्प बनाने के बजाय सीखने, लेखन, तर्क और आलोचनात्मक सोच को समर्थन देने वाले टूल के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
इस पुरस्कार के जरिए यूनेस्को ने शिक्षा में एआई के इस्तेमाल को लेकर एक अहम नीति-संदेश भी सामने रखा है। तकनीक का विस्तार अपने आप में पर्याप्त नहीं है। उसके इस्तेमाल का शैक्षणिक उद्देश्य और विद्यार्थियों की सोच पर उसका असर भी अहम है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।