Uttar Pradesh
मुजफ्फरनगर में ‘विजन ट्रेड इंडिया’ के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा, 3 गिरफ्तार
Wasi Siddiqui
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2026-09-23 16:51:21
मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम पुलिस ने ‘विजन ट्रेड इंडिया’ के जरिए व्यापारियों को विदेशी खरीदार और बड़े ऑर्डर दिलाने का झांसा देकर कथित ठगी करने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 23 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
विदेशी व्यापारिक ऑर्डर के नाम पर ठगी का आरोप
मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम पुलिस ने व्यापारियों से धोखाधड़ी कर रकम हड़पने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ‘विजन ट्रेड इंडिया’ नाम की वेबसाइट के जरिए व्यापारियों को देश-विदेश में बड़े खरीदार और थोक व्यापारिक ऑर्डर उपलब्ध कराने का दावा करते थे।
पुलिस जांच में विभिन्न राज्यों से जुड़ी 30 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों में करीब 1.50 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन, 1 पैन कार्ड, कंपनी से जुड़े दस्तावेज और ICE-UK के फर्जी प्रमाण-पत्र बरामद करने की जानकारी दी है।
‘बड़े खरीदार’ उपलब्ध कराने का दावा
पुलिस के अनुसार आरोपी कृषि उत्पाद, कपड़े और फैशन, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और रसायन समेत कई कारोबारी क्षेत्रों के लिए विदेशी खरीदार उपलब्ध कराने का दावा करते थे।
व्यापारियों को बड़े ऑर्डर दिलाने और अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ाने का भरोसा देकर सदस्यता और सब्सक्रिप्शन शुल्क के नाम पर रकम ली जाती थी। पुलिस का कहना है कि रकम मिलने के बाद व्यापारियों से अलग-अलग प्रमाण-पत्र और वेरिफिकेशन शुल्क के नाम पर अतिरिक्त भुगतान भी कराया जाता था।
फर्जी प्रमाण-पत्रों की जांच में खुलासा
साइबर क्राइम पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों की ओर से इस्तेमाल किए गए विभिन्न प्रमाण-पत्रों की ऑनलाइन पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक GMP, ISO और ICE-UK से संबंधित प्रमाण-पत्रों की जांच में इनके फर्जी होने की जानकारी सामने आई।
पुलिस का आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल व्यापारियों के बीच कारोबारी भरोसा पैदा करने के लिए किया जाता था। भुगतान लेने के बाद कथित तौर पर वास्तविक कारोबारी खरीदार या ऑर्डर उपलब्ध नहीं कराए जाते थे।
भुगतान के बाद संपर्क बंद करने का आरोप
पुलिस जांच के मुताबिक व्यापारियों से रकम हासिल करने के बाद आरोपियों की ओर से लंबे समय तक कोई वास्तविक व्यापारिक सौदा उपलब्ध नहीं कराया जाता था। बाद में कथित तौर पर फोन कॉल और व्हाट्सऐप संदेशों का जवाब देना भी बंद कर दिया जाता था।
जांच में बैंक खातों और दूसरे दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस अब संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और अन्य शिकायतों की पड़ताल कर रही है।
‘प्रतिबिम्ब’ पोर्टल से मिली अहम जानकारी
पुलिस के मुताबिक गृह मंत्रालय, भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘प्रतिबिम्ब’ पर दर्ज साइबर अपराध शिकायतों की जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आया।
इन शिकायतों में ठगी की रकम मुजफ्फरनगर से एटीएम के जरिए निकाले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और अन्य जांच के जरिए संबंधित मोबाइल नंबरों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर ‘विजन ट्रेड इंडिया’ के जरिए व्यापारियों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया।
3 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल सैनी, गौरव कुमार और शिवम कुमार के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार विशाल सैनी मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना थाना क्षेत्र के पारासौली का रहने वाला है। गौरव कुमार नई दिल्ली के पालम क्षेत्र का निवासी बताया गया है और उसका मूल पता बिहार के दरभंगा जिले का है।
तीसरे आरोपी शिवम कुमार का पता दिल्ली के द्वारका क्षेत्र का बताया गया है। पुलिस के मुताबिक उसका मूल निवास भी दरभंगा, बिहार में है।
30 से अधिक शिकायतों में करीब 1.50 करोड़ की धोखाधड़ी
साइबर क्राइम पुलिस की विस्तृत जांच में अलग-अलग राज्यों से जुड़ी 30 से अधिक शिकायतों में करीब 1.50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने की बात कही गई है।
यह आंकड़ा पुलिस जांच में अब तक सामने आई शिकायतों पर आधारित है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अन्य शिकायतों के साथ संबंधित मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की भी जांच जारी है। इसलिए जांच पूरी होने के बाद मामले का दायरा बदल सकता है।
मुकदमा दर्ज
पुलिस ने इस मामले में थाना साइबर क्राइम, मुजफ्फरनगर में मुकदमा संख्या 35/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5), 111, 336(3), 338 और 340(2) के तहत कार्रवाई की गई है।
मामले में पुलिस अब कथित वित्तीय नेटवर्क, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य संभावित शिकायतों की जांच कर रही है।
बरामदगी में क्या मिला
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास से 3 मोबाइल फोन, 1 पैन कार्ड, कंपनी से संबंधित दस्तावेज और ICE-UK के कथित फर्जी प्रमाण-पत्र बरामद हुए हैं।
बरामद डिजिटल और दस्तावेजी सामग्री की जांच से पुलिस को मामले में इस्तेमाल किए गए नेटवर्क और कथित ठगी के तौर-तरीकों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी मिलने की उम्मीद है।
साइबर ठगी में व्यापारियों के लिए अहम सबक
यह मामला कारोबारी क्षेत्र में ऑनलाइन वेरिफिकेशन और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के दावों की स्वतंत्र जांच की अहमियत सामने लाता है। किसी वेबसाइट या कंपनी की ओर से विदेशी खरीदार, बड़े ऑर्डर या अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन का दावा किए जाने पर कारोबारी को भुगतान से पहले संबंधित संस्था और प्रमाण-पत्र की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।
खास तौर पर सदस्यता शुल्क, वेरिफिकेशन शुल्क, सर्टिफिकेशन फीस या किसी कथित विदेशी खरीदार के लिए अग्रिम भुगतान मांगने पर दस्तावेजों और कंपनी की वास्तविक कारोबारी पहचान की जांच जरूरी है।
जांच अभी जारी
मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। अन्य मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और शिकायतों के संबंध में भी पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल पुलिस की ओर से सामने रखी गई जानकारी आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों पर आधारित है। अदालत में आरोपों की न्यायिक समीक्षा के बाद ही अंतिम कानूनी स्थिति तय होगी।
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।