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यूपी धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश: जाकिर नाईक और इंटरनेशनल फंडिंग से जुड़े तार

None 2025-07-21 13:38:16
यूपी धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश: जाकिर नाईक और इंटरनेशनल फंडिंग से जुड़े तार

ATS का खुलासा: विदेशी पैसों से यूपी में धर्मांतरण कर रहा था कट्टरपंथी गिरोह

जाकिर नाईक की संस्था के जरिए फंडिंग, यूपी में धर्मांतरण का बड़ा खुलासा


यूपी में अवैध धर्मांतरण गिरोहों के तार कट्टरपंथी जाकिर नाईक से जुड़ते मिले हैं। ATS और खुफिया एजेंसियां विदेशी फंडिंग नेटवर्क की पड़ताल में जुटीं।

यूपी में धर्मांतरण रैकेट: जाकिर नाईक से जुड़ते तार और अंतरराष्ट्रीय साजिश की परतें

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण से जुड़े रैकेट का जाल लगातार फैलता जा रहा है। हाल ही में आगरा, बलरामपुर, दिल्ली और कोलकाता से जुड़े मामलों में यह सामने आया कि इस नेटवर्क के पीछे न सिर्फ भारत में सक्रिय कट्टरपंथी तत्व हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और भगोड़े इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक से भी तार जुड़े हैं।

आगरा से खुली साजिश की परतें

आगरा में दर्ज एक मामूली गुमशुदगी के केस ने एक बड़े षड्यंत्र का भंडाफोड़ कर दिया। दो बहनों के लापता होने के बाद की गई जांच में सामने आया कि वे एक संगठित धर्मांतरण गिरोह की गिरफ्त में थीं। बड़ी बहन पूर्व में भी 2021 में कश्मीर जा चुकी थी, जहां उसे नेट कोचिंग के बहाने इस्लामी विचारधारा से प्रभावित किया गया था। इस बार दोनों बहनों को कोलकाता से बरामद किया गया।

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जांच में सामने आया कि धर्मांतरण के इस नेटवर्क को गोवा की एक महिला आयशा उर्फ एसबी कृष्णा फंड करती थी। यह पैसा कनाडा में बैठे सैय्यद दाऊद अहमद से आता था और भारत में आयशा के माध्यम से बांटा जाता था। इस पैसे को यूएई, लंदन और अमेरिका जैसे रास्तों से भारत भेजा जाता था ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।

शेखर राय और मनोज की अहम भूमिका

आयशा का पति शेखर राय उर्फ हसन अली इस पूरे नेटवर्क का कानूनी सलाहकार था। धर्मांतरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की व्यवस्था, नाम बदलवाने की प्रक्रिया और फर्जी पहचान पत्र बनवाने का काम वह देखता था। दिल्ली से गिरफ्तार मनोज उर्फ मुस्तफा नाबालिग लड़कियों को फुसलाकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता था। वह फर्जी पहचान पर सिम कार्ड उपलब्ध कराता और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था।

एटीएस की सख्त कार्रवाई और नए खुलासे

उत्तर प्रदेश एटीएस ने अब तक इस नेटवर्क के कई अहम सदस्यों को गिरफ्तार किया है। बलरामपुर के छांगुर गिरोह पर शिकंजा कसता जा रहा है। छांगुर के भतीजे सबरोज की गिरफ्तारी के बाद दो और आरोपितों की जानकारी मिली है जो दुबई में भी सक्रिय थे। उनकी गतिविधियों की पुष्टि एटीएस को नीतू उर्फ नसरीन के बयानों से मिली, जिसने स्वीकारा कि वह दुबई में इन दोनों के संपर्क में थी और फंडिंग के लेन-देन की व्यवस्था वहीं से की जाती थी।

कट्टरपंथी वीडियो और मानसिक ब्रेनवॉश

इस नेटवर्क में शामिल अब्दुल रहमान कुरैशी, जो आगरा का ही निवासी है, एक यूट्यूब चैनल के माध्यम से इस्लामिक कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था। उसके वीडियो में हिंदू प्रतीकों का मजाक उड़ाया जाता और युवाओं को ब्रेनवॉश किया जाता था। कोलकाता से गिरफ्तार ओसामा लड़कियों को इस्लामी बहनों के तौर पर प्रशिक्षित करता था। मनोज और ओसामा, दोनों ही इस्लामी जीवनशैली को युवतियों पर थोपने के प्रयास में लगे थे।

पीड़ित परिवारों की आपबीती

बड़ी बहन, जो पहले नवरात्रि के व्रत रखती थी, देवी-देवताओं में आस्था रखती थी, अब वह हिजाब पहनने लगी थी और परिवार को ‘बुतपरस्त’ कहने लगी थी। उसने अपनी 19 वर्षीय बहन को लेकर घर से भागने की योजना बनाई और उसे भी इस साजिश में शामिल कर लिया। परिवार के अनुसार उन्होंने सालों तक बेटी की गतिविधियों पर निगरानी रखी, लेकिन धर्मांतरण की मानसिकता इतनी गहराई से उसकी सोच में बैठ चुकी थी कि वह आखिरकार भाग निकली।

इंटरनेशनल लिंक और आतंकी संगठन

ATS और पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया कि यह नेटवर्क सिर्फ धर्मांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से भी है। विदेशी फंडिंग के जरिए भारत में इस्लामिक नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। आरोपी सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे और भारत के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के पूजा से जुड़े वीडियो शेयर कर इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ प्रचार कर रहे थे।

जाकिर नाईक का कनेक्शन

इस पूरे नेटवर्क के तार जाकिर नाईक से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। उसकी संस्था ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ पहले ही भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित की जा चुकी है। नाईक के कई वीडियो ऐसे हैं जो युवाओं को कट्टरपंथी सोच की ओर ले जाते हैं। उसकी गतिविधियां मलेशिया से संचालित हो रही हैं और ईडी उसकी संस्थाओं की जांच कर रही है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में पकड़े गए धर्मांतरण नेटवर्कों को फंडिंग विदेशों से ही मिल रही है, जो कि सीधे-सीधे जाकिर नाईक से जुड़ी संस्थाओं तक जाती है।

टेक्नोलॉजी और फर्जी पहचान का दुरुपयोग

इस रैकेट ने टेक्नोलॉजी का भी भरपूर दुरुपयोग किया। सोशल मीडिया, ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, फर्जी पहचान पत्र, और डिजिटल उपकरणों के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाई गई। फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेज बनाकर लड़कियों को ट्रांसफर किया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिन युवतियों का धर्मांतरण करवाया गया, उन्हें नई पहचान और सुरक्षा दी जाती थी ताकि वे वापस अपने परिवार से न जुड़ सकें।

एजेंसियों की सतर्कता और अगला कदम

एटीएस और खुफिया एजेंसियों की नजर अब ऐसे नेटवर्कों पर है जो धीरे-धीरे समाज में धार्मिक असंतुलन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन संस्थाओं पर शक है, उनमें से कई की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। साजिश का उद्देश्य केवल धर्मांतरण नहीं, बल्कि भारत को इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की दीर्घकालिक योजना है। युवाओं को टारगेट करके उन्हें इस योजना का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नतीजा

यूपी में अवैध धर्मांतरण से जुड़ा यह मामला एक गहरी और खतरनाक साजिश का संकेत देता है। यह केवल कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि भारत की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला है। कट्टरपंथी जाकिर नाईक और उससे जुड़े नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई समय की मांग है। इस साजिश को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर कठोर कानून और कार्रवाई करनी होगी।

देश की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर रिपोर्ट को ज्यादा से ज्यादा साझा करें। अपने बच्चों को सतर्क करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस या एटीएस को दें।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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