यूपी 2027 चुनाव: कांग्रेस का 150 सीटों से कम पर न लड़ने का रुख, अक्टूबर में सीट शेयरिंग पर फैसला
Mohammad Naved
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2026-09-29 11:14:48
यूपी चुनाव 2027: कांग्रेस ने 150 सीटों की सीमा तय की, अक्टूबर में गठबंधन पर फैसला
सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग पर बढ़ी हलचल, कांग्रेस ने 150 सीटों से कम पर जताई असहमति
उत्तर प्रदेश चुनाव: कांग्रेस का बड़ा सीट दावा, 403 सीटों पर उम्मीदवार होने का दावा
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश
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29 सितंबर 2026
✍️ MOHD NAVED
यूपी चुनाव से पहले सीट शेयरिंग पर नया मोड़
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अहम दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि गठबंधन की स्थिति में वह 150 से कम विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट शेयरिंग पर अक्टूबर में फैसला होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार उपलब्ध हैं।
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दल अपने संगठन और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, सीटों का अंतिम बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है।
कांग्रेस का 150 सीटों पर रुख
राजेंद्र पाल गौतम के बयान के मुताबिक कांग्रेस गठबंधन के तहत 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने गठबंधन में कांग्रेस के लिए 50% सीटों की हिस्सेदारी के अधिकार का भी दावा किया है।
यह 50% का दावा 403 सदस्यीय विधानसभा में 201.5 सीट के बराबर बैठता है। हालांकि कांग्रेस के सार्वजनिक रूप से बताए गए न्यूनतम आंकड़े की बात करें तो पार्टी ने 150 सीटों से नीचे जाने से इनकार किया है। अंतिम सीट संख्या बातचीत और गठबंधन के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसलिए 150 सीटों को अभी अंतिम सीट बंटवारा मानना सही नहीं होगा। यह कांग्रेस की मौजूदा बातचीत की स्थिति और दावेदारी है।
अक्टूबर में सामने आ सकता है सीट शेयरिंग फॉर्मूला
कांग्रेस प्रभारी के अनुसार सीट शेयरिंग पर बातचीत पिछले करीब 2 महीनों से चल रही है। उन्होंने कहा है कि अक्टूबर में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
इससे आने वाले दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बातचीत का फोकस सीटों की संख्या के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्रों के चयन पर भी रहेगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 निर्वाचित सीटें हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है।
मामला केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं
सीट शेयरिंग में चुनौती केवल यह तय करना नहीं है कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी। दोनों दलों के लिए उन सीटों का चयन भी अहम होगा, जहां संबंधित संगठन, स्थानीय नेतृत्व और पिछला चुनावी प्रदर्शन मजबूत रहा है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस उन इलाकों में विधानसभा सीटों पर दावा मजबूत करना चाहती है जहां उसने 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन किया था। वहीं सीटों के चयन को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद की स्थिति भी सामने आई है।
इन दावों पर अंतिम तस्वीर सीट शेयरिंग समझौते के बाद ही सामने आएगी।
403 सीटों पर उम्मीदवार होने का दावा
कांग्रेस का कहना है कि उसके पास उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार उपलब्ध हैं।
यह दावा पार्टी की संगठनात्मक तैयारी को लेकर है। हालांकि उम्मीदवार उपलब्ध होने और किसी गठबंधन समझौते के तहत उन सभी सीटों पर चुनाव लड़ने में अंतर है।
अगर गठबंधन अंतिम रूप लेता है, तो दोनों दलों को अपने-अपने हिस्से की सीटों और उम्मीदवारों को लेकर समन्वय करना होगा।
कांग्रेस और सपा का चुनावी संदर्भ
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। अब दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी साथ चुनावी रणनीति पर बातचीत कर रहे हैं।
लेकिन विधानसभा चुनाव का गणित लोकसभा चुनाव से अलग होता है। विधानसभा स्तर पर स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय संगठन, सामाजिक समीकरण और सीटवार प्रभाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी वजह से सीट शेयरिंग की बातचीत में केवल कुल सीटों का आंकड़ा पर्याप्त नहीं होगा। दोनों दलों को सीटवार राजनीतिक स्थिति पर भी सहमति बनानी होगी।
150 सीटों का दावा क्यों महत्वपूर्ण है
403 सीटों वाली विधानसभा में 150 सीटों पर लड़ने का कांग्रेस का न्यूनतम रुख गठबंधन वार्ता के लिए एक स्पष्ट शुरुआती स्थिति बनाता है।
वहीं कांग्रेस द्वारा 50% हिस्सेदारी का दावा इससे भी बड़ा आंकड़ा सामने रखता है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि 50% हिस्सेदारी का दावा और 150 सीटों का न्यूनतम रुख एक ही बात नहीं हैं। अंतिम समझौता दोनों पक्षों की बातचीत के बाद तय होगा।
इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस और सपा के बीच सीटों का अंतिम फार्मूला क्या होगा।
आगे क्या होगा
अक्टूबर सीट शेयरिंग प्रक्रिया के लिहाज से अहम महीना बन सकता है। बातचीत में कुल सीटों की संख्या, निर्वाचन क्षेत्रों का चयन और उम्मीदवारों की तैयारी जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
कांग्रेस ने 150 सीटों से कम पर चुनाव न लड़ने का अपना रुख सार्वजनिक किया है। अब गठबंधन के दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया और बातचीत से निकलने वाला अंतिम फॉर्मूला महत्वपूर्ण होगा।
जब तक औपचारिक समझौता सामने नहीं आता, 150 सीटों का आंकड़ा कांग्रेस की दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए, अंतिम सीट बंटवारे के रूप में नहीं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने सीट शेयरिंग पर अपनी स्थिति काफी स्पष्ट कर दी है। पार्टी कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है और सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उपलब्ध होने का दावा कर रही है।
दूसरी ओर, अंतिम सीट बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है। अक्टूबर में होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सीटों की संख्या तथा सीटों के चयन पर किस फॉर्मूले तक पहुंचती हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि 150 सीटों का आंकड़ा कांग्रेस की घोषित दावेदारी है, अंतिम गठबंधन समझौता नहीं।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।